संयुक्त राष्ट्र के विशेषज्ञों ने काबुल में हुए हवाई हमले की स्वतंत्र जांच की मांग की

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संयुक्त राष्ट्र के विशेषज्ञों ने काबुल में हुए हवाई हमले की स्वतंत्र जांच की मांग की

सारांश

काबुल में पाकिस्तान द्वारा किए गए हवाई हमले पर संयुक्त राष्ट्र के विशेषज्ञों ने स्वतंत्र जांच की मांग की है। यह घटना नागरिकों के लिए गंभीर खतरे का संकेत है, जिससे युद्धविराम की आवश्यकता और बढ़ गई है।

Key Takeaways

  • संयुक्त राष्ट्र ने काबुल में हवाई हमले की जांच की मांग की है।
  • अफगानिस्तान में कम से कम 289 नागरिक हताहत हुए हैं।
  • युद्धविराम की आवश्यकता को लेकर विशेषज्ञों ने आवाज उठाई है।

काबुल, २५ मार्च (राष्ट्र प्रेस)। संयुक्त राष्ट्र के विशेषज्ञों ने काबुल के पुनर्वास केंद्र पर पाकिस्तान द्वारा किए गए हवाई हमलों की तत्काल, स्वतंत्र और पारदर्शी जांच की मांग की है। अफगानिस्तान में मानवाधिकारों की स्थिति पर संयुक्त राष्ट्र के विशेष प्रतिवेदक रिचर्ड बेनेट ने बुधवार को यह जानकारी दी।

पाकिस्तान ने १६ मार्च को काबुल के एक नशा मुक्ति अस्पताल पर हवाई हमले किए, जिसमें सैकड़ों नागरिकों की मौत और कई अन्य घायल हो गए थे।

बेनेट ने कहा कि इस अपील में पाकिस्तान और अफगानिस्तान के बीच स्थायी युद्धविराम, अंतरराष्ट्रीय कानून का पालन, नागरिकों की सुरक्षा और जवाबदेही सुनिश्चित करने की मांग की गई है।

बेनेट ने सोशल मीडिया प्लेटफार्म 'एक्स' पर पोस्ट कर कहा, “हमारा बयान न केवल अफगानिस्तान और पाकिस्तान से स्थायी युद्धविराम पर सहमत होने का आह्वान करता है, बल्कि अंतरराष्ट्रीय कानून के सम्मान, नागरिकों की सुरक्षा और जवाबदेही की भी मांग करता है, जिसकी शुरुआत काबुल के अस्पताल की तत्काल, स्वतंत्र और पारदर्शी जांच से होनी चाहिए।”

संयुक्त राष्ट्र के विशेषज्ञों ने मंगलवार को पाकिस्तान और अफगानिस्तान से नए सिरे से युद्धविराम घोषित करने का अनुरोध किया।

विशेषज्ञों ने कहा, “हम पाकिस्तान और अफगानिस्तान के वास्तविक शासकों से स्थायी युद्धविराम के लिए प्रतिबद्ध होने, संघर्ष के मूल कारणों का समाधान करने और अंतरराष्ट्रीय कानून के उल्लंघनों के लिए जवाबदेही सुनिश्चित करने का आग्रह करते हैं।”

उन्होंने कहा कि २६ फरवरी से अब तक अफगानिस्तान में कम से कम २८९ नागरिक हताहत हुए हैं, जिनमें ७६ की मौत और २१३ घायल हुए हैं, जबकि १,१५,००० से अधिक लोग विस्थापित हो चुके हैं।

विशेषज्ञों ने कहा, “नागरिक ढांचे को नुकसान पहुंचा है, जिसमें चिकित्सा सुविधाएं, घर, बाजार और विस्थापित लोगों के ठिकाने शामिल हैं। स्कूल और सीमाएं बंद कर दी गई हैं और व्यापार निलंबित है।”

विशेषज्ञों के अनुसार, १६ मार्च को काबुल के एक नशा मुक्ति केंद्र पर हुए पाकिस्तानी हवाई हमले में संभवतः सैकड़ों लोग मारे गए और घायल हुए।

उन्होंने कहा, “हम इस हमले की निंदा करते हैं, पीड़ितों के परिवारों के प्रति अपनी गहरी संवेदना व्यक्त करते हैं और घायलों के शीघ्र स्वस्थ होने की कामना करते हैं।”

विशेषज्ञों ने सभी पक्षों से अंतरराष्ट्रीय मानवाधिकार कानून और अंतरराष्ट्रीय मानवीय कानून का सम्मान करने, विशेष रूप से नागरिकों और उनके ठिकानों की सुरक्षा सुनिश्चित करने का आह्वान किया।

उन्होंने सभी कथित उल्लंघनों की तत्काल, स्वतंत्र और पारदर्शी जांच, दोषियों के खिलाफ कार्रवाई और पीड़ितों को न्याय दिलाने की मांग की, जो अंतरराष्ट्रीय मानकों के अनुरूप हो।

विशेषज्ञों ने कहा कि हालिया संघर्ष २१-२२ फरवरी को पाकिस्तान की ओर से तहरीक-ए-तालिबान पाकिस्तान (टीटीपी) के ठिकानों पर किए गए हवाई हमलों, २६ फरवरी को अफगान अधिकारियों की ओर से सीमा पर जवाबी हमलों और २७ फरवरी को पाकिस्तान की ओर से काबुल, कंधार और अन्य स्थानों पर किए गए हमलों के बाद शुरू हुआ।

विशेषज्ञों ने जोर देकर कहा, “अफगानिस्तान पर पाकिस्तान का हमला संयुक्त राष्ट्र चार्टर के अनुच्छेद-२ और प्रथागत अंतरराष्ट्रीय कानून के तहत बल प्रयोग पर प्रतिबंध का उल्लंघन करता है। आत्मरक्षा का अधिकार तभी होता है, जब पहले तालिबान ने पाकिस्तान पर हमला किया हो या टीटीपी को हमले के लिए भेजा हो।”

उन्होंने यह भी कहा, “पाकिस्तान ने यह साबित करने के लिए कोई विश्वसनीय सबूत प्रस्तुत नहीं किया है कि उसके क्षेत्र में हुए टीटीपी हमले अफगानिस्तान के वास्तविक शासकों की ओर से निर्देशित या नियंत्रित थे।”

Point of View

NationPress
25/03/2026

Frequently Asked Questions

संयुक्त राष्ट्र के विशेषज्ञों ने क्या मांग की है?
उन्हें काबुल में पाकिस्तान द्वारा किए गए हवाई हमले की तत्काल, स्वतंत्र और पारदर्शी जांच की मांग की है।
इस हमले में कितने लोग प्रभावित हुए?
इस हमले में सैकड़ों नागरिक हताहत हुए हैं, जिनमें ७६ की मौत और २१३ घायल हुए हैं।
क्या पाकिस्तान ने अपनी कार्रवाई का कोई सबूत पेश किया?
पाकिस्तान ने यह साबित करने के लिए कोई विश्वसनीय सबूत प्रस्तुत नहीं किया है कि टीटीपी के हमले अफगानिस्तान के शासकों द्वारा निर्देशित थे।
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