उरूमची में बेल्ट एंड रोड सलाहकार समिति की 2026 बैठक, हरित विकास और AI सहयोग पर जोर
सारांश
मुख्य बातें
बेल्ट एंड रोड अंतर्राष्ट्रीय सहयोग मंच की सलाहकार समिति की 2026 वार्षिक बैठक शुक्रवार, 18 जुलाई 2026 को पश्चिमोत्तर चीन के शिनच्यांग उइगुर स्वायत्त प्रदेश की राजधानी उरूमची में आयोजित हुई। इस बैठक में मिस्र के पूर्व प्रधानमंत्री शेरिफ इस्माइल और पाकिस्तान के पूर्व प्रधानमंत्री अंवर-उल-हक काकर सहित विभिन्न देशों के प्रतिनिधि शामिल हुए।
बैठक का केंद्रीय विषय
इस वर्ष की बैठक का मुख्य विषय था — 'अशांत अंतर्राष्ट्रीय परिस्थितियों में बेल्ट एंड रोड सहयोग को और अधिक प्रभावी बनाना'। वैश्विक भू-राजनीतिक तनावों और आर्थिक अनिश्चितताओं के बीच यह विषय-चयन विशेष रूप से प्रासंगिक माना जा रहा है। सदस्यों ने नए अवसरों और चुनौतियों, कनेक्टिविटी को सुदृढ़ करने तथा अंतर्राष्ट्रीय प्रचार-प्रसार जैसे अहम मुद्दों पर विचारों का आदान-प्रदान किया।
सदस्यों के प्रमुख सुझाव
बैठक में उपस्थित सदस्यों ने 'हार्ड कनेक्टिविटी' (भौतिक अवसंरचना), 'सॉफ्ट कनेक्टिविटी' (नीति एवं नियामक समन्वय) और 'दिलों की कनेक्टिविटी' (जन-से-जन संपर्क) को एक साथ आगे बढ़ाने पर बल दिया। इसके अतिरिक्त, हरित एवं निम्न-कार्बन विकास, डिजिटल अर्थव्यवस्था और आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) जैसे भविष्योन्मुखी क्षेत्रों में सहयोग बढ़ाने का सुझाव दिया गया।
सदस्यों ने यह भी रेखांकित किया कि बेल्ट एंड रोड पहल ने विश्व अर्थव्यवस्था को अधिक लचीलापन और विकास की नई क्षमता प्रदान की है। गौरतलब है कि यह पहल अब एक दशक से अधिक पुरानी हो चुकी है और इसके तहत दर्जनों देशों में अवसंरचना परियोजनाएँ चल रही हैं।
सलाहकार समिति की पृष्ठभूमि
चीन ने वर्ष 2018 में इस सलाहकार समिति की स्थापना एक गैर-लाभकारी अंतर्राष्ट्रीय नीति परामर्श तंत्र के रूप में की थी। यह समिति बेल्ट एंड रोड सहयोग और इस मंच के विकास के लिए बौद्धिक सहयोग एवं नीतिगत सुझाव प्रदान करती है। उरूमची में इस बैठक का आयोजन इस दृष्टि से भी उल्लेखनीय है, क्योंकि शिनच्यांग प्रदेश भू-रणनीतिक रूप से मध्य एशिया और दक्षिण एशिया से जुड़ने वाले प्रमुख गलियारों का केंद्र है।
आगे की राह
बैठक में अंतर्राष्ट्रीय प्रचार को लगातार मजबूत करने पर सहमति बनी। यह ऐसे समय में आया है जब पश्चिमी देशों की ओर से बेल्ट एंड रोड परियोजनाओं की पारदर्शिता और ऋण-स्थिरता को लेकर सवाल उठाए जाते रहे हैं। आने वाले महीनों में समिति के सुझावों को नीतिगत दिशा में किस हद तक शामिल किया जाता है, यह देखना महत्वपूर्ण होगा।