होर्मुज स्ट्रेट पर ईरानी तेल निर्यात रोका: मार्को रुबियो का दावा, स्वतंत्र पुष्टि नहीं
सारांश
मुख्य बातें
अमेरिकी विदेश मंत्री मार्को रुबियो ने दावा किया है कि अमेरिका ने होर्मुज स्ट्रेट के रास्ते ईरान के तेल निर्यात को प्रभावी रूप से अवरुद्ध कर दिया है, जबकि अन्य देशों का कच्चा तेल इसी जलमार्ग से निर्बाध रूप से वैश्विक बाज़ारों तक पहुँच रहा है। यह बयान उन्होंने 15 अक्टूबर को एक समाचार चैनल को दिए साक्षात्कार में दिया, जिसे अमेरिकी विदेश विभाग ने 19 अक्टूबर 2026 को सार्वजनिक किया। हालाँकि, उनके दावों की स्वतंत्र रूप से पुष्टि नहीं हुई है।
रुबियो के प्रमुख दावे
रुबियो के अनुसार, पिछले 30 दिनों के औसत को देखें तो होर्मुज स्ट्रेट से प्रतिदिन लगभग 1.3 से 1.4 करोड़ बैरल तेल वैश्विक बाज़ार में पहुँच रहा है। उनका कहना था कि कुछ दिनों में यह मात्रा संघर्ष शुरू होने से पहले के स्तर के बराबर भी रही। उन्होंने कहा, "दुनिया में सिर्फ एक ही देश है जो होर्मुज स्ट्रेट से एक भी बैरल तेल नहीं भेज पा रहा, और वह ईरान है।"
गौरतलब है कि इस दावे के साथ कोई स्वतंत्र शिपिंग डेटा या सत्यापन योग्य आँकड़े पेश नहीं किए गए, जिससे यह स्पष्ट हो सके कि प्रतिबंधों के कारण ईरान का वास्तविक तेल निर्यात किस हद तक प्रभावित हुआ है।
अमेरिकी सैन्य भूमिका और रणनीति
रुबियो ने बताया कि अमेरिकी सैन्य बल होर्मुज स्ट्रेट में वाणिज्यिक जहाज़ों को ईरानी हमलों से बचाने में सक्रिय हैं। उनके अनुसार, अमेरिकी सेना की यह भूमिका फ़िलहाल मुख्यतः रक्षात्मक है — जहाज़ों की सुरक्षा सुनिश्चित करना और साथ ही ईरान पर आर्थिक दबाव बनाए रखना। विदेश मंत्री ने दावा किया कि अमेरिकी सैन्य अभियानों ने ईरान की नौसैनिक ताकत, वायु रक्षा प्रणाली तथा मिसाइल और ड्रोन निर्माण क्षमताओं को काफी हद तक कमज़ोर किया है।
होर्मुज स्ट्रेट का वैश्विक महत्व
होर्मुज स्ट्रेट दुनिया के सबसे महत्वपूर्ण ऊर्जा जलमार्गों में से एक है। खाड़ी क्षेत्र के तेल उत्पादक देश इसी मार्ग से अपना कच्चा तेल भारत, चीन और एशिया की अन्य प्रमुख अर्थव्यवस्थाओं तक पहुँचाते हैं। यह ऐसे समय में आया है जब वैश्विक ऊर्जा बाज़ार पहले से ही भू राजनीतिक अनिश्चितताओं के कारण दबाव में हैं।
प्रतिबंधों का उद्देश्य
रुबियो ने ईरान पर लगाए गए आर्थिक प्रतिबंधों का बचाव करते हुए कहा कि इनका मकसद हिज़्बुल्लाह, हमास और इराक के सशस्त्र समूहों तक ईरानी वित्तपोषण को कम करना है। उन्होंने कहा, "प्रतिबंधों के ज़रिए जो भी एक डॉलर आप उनसे रोकते हैं, वह एक डॉलर कम हो जाता है जो हिज़्बुल्लाह को मिल सकता था, एक डॉलर कम जो हमास को मिल सकता था।" इसके अलावा, उन्होंने कहा कि प्रशासन की प्राथमिकता यह सुनिश्चित करना है कि ईरान परमाणु हथियार विकसित न कर सके।
आगे की स्थिति
रुबियो ने स्वीकार किया कि ईरान के साथ लंबे समय से चल रहे तनाव को लेकर अंतरराष्ट्रीय स्तर पर नाराज़गी है, लेकिन उनका कहना था कि अमेरिका ने अपने प्रमुख सैन्य लक्ष्य हासिल किए हैं। विश्लेषकों के अनुसार, होर्मुज स्ट्रेट पर किसी भी दीर्घकालिक व्यवधान का असर भारत सहित एशिया के उन देशों पर सीधे पड़ेगा जो खाड़ी से अपनी ऊर्जा ज़रूरतों का बड़ा हिस्सा पूरा करते हैं। वाशिंगटन का कहना है कि वह ईरान पर दबाव बनाए रखते हुए वैश्विक ऊर्जा आपूर्ति को अप्रभावित रखने की कोशिश जारी रखेगा।