अमेरिकी विदेश विभाग के दस्तावेजों में मोदी की कूटनीति की सराहना, ट्रंप संग रिश्तों को बताया रणनीतिक सफलता
सारांश
मुख्य बातें
अमेरिकी विदेश विभाग के दस्तावेजों के अनुसार, प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की फरवरी 2025 की वॉशिंगटन यात्रा के दौरान की गई कूटनीतिक पहल, रक्षा समझौतों और राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के साथ उनके व्यक्तिगत संबंधों को भारतीय सोशल मीडिया उपयोगकर्ताओं ने व्यापक रूप से सराहा। ये दस्तावेज़ अमेरिकी सूचना की स्वतंत्रता अधिनियम (FOIA) के तहत जुलाई 2025 में सार्वजनिक किए गए थे।
दस्तावेज़ में क्या कहा गया
18 फरवरी 2025 की इस रिपोर्ट में अमेरिकी दूतावास के विश्लेषकों ने भारत में सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर मोदी की यात्रा से जुड़ी प्रतिक्रियाओं का अध्ययन किया। दस्तावेज़ में सकारात्मक और नकारात्मक, दोनों प्रकार की चर्चाओं का उल्लेख किया गया है। रिपोर्ट के अनुसार, मोदी के समर्थकों ने ट्रंप, उद्योगपति एलन मस्क और भारतीय-अमेरिकी समुदाय के साथ उनकी बैठकों को वैश्विक मंच पर भारत के हितों की रणनीतिक पैरवी के रूप में देखा।
व्यापार और रक्षा सहयोग पर प्रतिक्रिया
व्यापार वार्ता और रक्षा समझौतों पर मोदी की कूटनीतिक सक्रियता को कई वर्गों में सराहा गया। दस्तावेज़ के अनुसार, राष्ट्रपति ट्रंप द्वारा प्रधानमंत्री मोदी को 'टफ नेगोशिएटर' कहे जाने को सोशल मीडिया पर भारत के हितों की मज़बूत पैरवी के प्रमाण के रूप में देखा गया। अमेरिकी दूतावास के विश्लेषण में इस पहल को सैन्य तकनीक के सह-उत्पादन और रक्षा सहयोग को बढ़ावा देने वाली सकारात्मक कदम के रूप में रेखांकित किया गया।
ब्लेयर हाउस में ठहरना बना चर्चा का विषय
दस्तावेज़ में यह भी उल्लेख किया गया कि व्हाइट हाउस के सामने स्थित ऐतिहासिक ब्लेयर हाउस में प्रधानमंत्री मोदी का ठहरना अमेरिका द्वारा दिए गए विशेष सम्मान के प्रतीक के रूप में देखा गया। सोशल मीडिया पर कुछ उपयोगकर्ताओं ने इसकी तुलना पूर्व प्रधानमंत्री जवाहरलाल नेहरू और इंदिरा गांधी की अमेरिकी यात्राओं से भी की।
यात्रा की पृष्ठभूमि
प्रधानमंत्री मोदी ने 13 फरवरी 2025 को व्हाइट हाउस में राष्ट्रपति ट्रंप से मुलाकात की थी। ट्रंप के दोबारा राष्ट्रपति पद संभालने के बाद यह मोदी की पहली अमेरिका यात्रा थी। यात्रा के दौरान एलन मस्क से भेंट, भारतीय-अमेरिकियों के साथ संवाद और ट्रंप के साथ संयुक्त प्रेस कार्यक्रम में शामिल होने को भारत की प्रभावी कूटनीति के रूप में व्यापक रूप से रेखांकित किया गया।
आगे क्या
इन दस्तावेज़ों के सार्वजनिक होने से भारत-अमेरिका संबंधों की कूटनीतिक परतों पर नई बहस छिड़ने की संभावना है। यह ऐसे समय में सामने आया है जब दोनों देश व्यापार और रक्षा सहयोग के कई मोर्चों पर सक्रिय रूप से जुड़े हुए हैं।