12 अक्टूबर 2026
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क्रिस मर्फी का यमन में अमेरिकी सैन्य कार्रवाई से इनकार, रियाद हमले में 1 भारतीय की मौत

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क्रिस मर्फी का यमन में अमेरिकी सैन्य कार्रवाई से इनकार, रियाद हमले में 1 भारतीय की मौत

सारांश

हूती विद्रोहियों के रियाद एयरपोर्ट हमले में 12 मौतें — और हमले से ठीक एक दिन पहले वहीं मौजूद रहे अमेरिकी सीनेटर क्रिस मर्फी ने अमेरिकी सैन्य हस्तक्षेप को साफ नकार दिया। एक भारतीय की मौत और 3 ICU में — 27 लाख से ज़्यादा भारतीय सऊदी अरब में हैं, दिल्ली सतर्क है।

मुख्य बातें

हूती विद्रोहियों ने रियाद एयरपोर्ट पर हमला किया, जिसमें 12 लोगों की मौत हुई।
हमले में 11 भारतीय घायल हुए; एक भारतीय नागरिक की रविवार को मौत हो गई।
तीन भारतीय अभी भी ICU में हैं, हालत स्थिर; बाकी को छुट्टी दे दी गई।
अमेरिकी सीनेटर क्रिस मर्फी हमले से एक दिन पहले उसी एयरपोर्ट पर थे और यमन में अमेरिकी युद्ध का विरोध किया।
जयशंकर ने दुख जताया; विदेश मंत्रालय ने नागरिकों पर हमलों को 'पूरी तरह अस्वीकार्य' बताया।
सऊदी अरब में करीब 27.4 लाख भारतीय निवास करते हैं।

अमेरिकी सीनेटर क्रिस मर्फी ने 12 अक्टूबर 2026 को स्पष्ट किया कि यमन में किसी भी प्रकार की अमेरिकी सैन्य कार्रवाई नहीं होनी चाहिए — यह बयान उन्होंने उस हमले के एक दिन बाद दिया, जब ईरान समर्थित हूती विद्रोहियों ने रियाद एयरपोर्ट पर हमला किया और 12 लोगों की जान चली गई। इस हमले में 11 भारतीय नागरिक भी घायल हुए, जिनमें से एक की मौत रविवार को हो गई।

मर्फी की मौजूदगी और बयान

कनेक्टिकट से डेमोक्रेटिक सांसद मर्फी ने सीबीएस के कार्यक्रम 'फेस द नेशन' में बताया कि वे हमले से ठीक एक दिन पहले उसी रियाद एयरपोर्ट से गुजरे थे। वे सऊदी अरब और कतर के अधिकारियों से इस युद्ध को समाप्त कराने की संभावनाओं पर चर्चा करने के बाद वापस लौट रहे थे। उन्होंने कहा, "हाँ, मैं हमले से एक दिन पहले उसी एयरपोर्ट पर था। मैं सऊदी और कतर के अधिकारियों से मिलकर आया था, जो इस युद्ध को खत्म कराने के लिए बातचीत कर रहे हैं।"

जब उनसे जवाबी सैन्य कार्रवाई पर राय माँगी गई, तो मर्फी ने स्पष्ट शब्दों में कहा, "नहीं, मेरा मानना है कि अमेरिका को यमन में युद्ध नहीं करना चाहिए।" उन्होंने आगाह किया कि अमेरिकी सैन्य हस्तक्षेप से ईरान और हूती विद्रोहियों के साथ टकराव और गहरा हो सकता है।

मर्फी की नीतिगत सिफारिशें

सीनेटर मर्फी के अनुसार, क्षेत्र में तैनात अमेरिकी सैनिकों की सुरक्षा सुनिश्चित करने का सबसे कारगर तरीका युद्ध को समाप्त करना है। उन्होंने सुझाव दिया कि अमेरिका को एकतरफा अपनी सैन्य गतिविधियाँ रोकनी चाहिए और लाल सागर तथा समुद्री मार्गों की सुरक्षा की जिम्मेदारी क्षेत्रीय सहयोगियों को सौंपनी चाहिए। यह ऐसे समय में आया है जब हूती आंदोलन ने सऊदी नेतृत्व वाले सैन्य अभियान के बाद सऊदी हवाई अड्डों, सैन्य ठिकानों और तेल प्रतिष्ठानों पर हमले तेज कर दिए हैं।

भारतीय नागरिकों पर असर

रियाद स्थित भारतीय दूतावास ने बताया कि हमले में 11 भारतीय घायल हुए, जिनमें से एक की रविवार को मौत हो गई। दूतावास ने जानकारी दी कि उसके अधिकारियों ने सभी संबंधित अस्पतालों का दौरा किया। तीन भारतीय आईसीयू में हैं और उनकी हालत स्थिर बताई गई है; दो अन्य सामान्य वार्ड में भर्ती हैं, जबकि शेष को अस्पताल से छुट्टी दे दी गई है। दूतावास ने कहा कि वह मृतक के परिवार से संपर्क में है और पार्थिव शरीर को जल्द भारत भेजने में हर संभव सहायता करेगा।

गौरतलब है कि दूतावास के आँकड़ों के अनुसार, सऊदी अरब में करीब 27.4 लाख भारतीय निवास करते हैं, जो विदेशों में रहने वाले सबसे बड़े भारतीय समुदायों में से एक है।

भारत और अमेरिका की प्रतिक्रिया

विदेश मंत्री एस. जयशंकर ने भारतीय नागरिक की मौत पर गहरा दुख जताया और एक्स पर लिखा कि भारतीय दूतावास प्रभावित परिवार को हर संभव सहायता देगा। विदेश मंत्रालय ने शनिवार देर रात जारी बयान में कहा, "नागरिकों और नागरिक ढाँचे पर लगातार हो रहे हमले पूरी तरह अस्वीकार्य हैं और इन्हें तुरंत बंद होना चाहिए।"

अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने शनिवार को इस हमले को 'बेहद दुखद घटना' बताया और कहा कि वे सऊदी क्राउन प्रिंस मोहम्मद बिन सलमान से बातचीत करेंगे। हालाँकि रविवार शाम तक दोनों नेताओं के बीच हुई किसी बातचीत का आधिकारिक विवरण जारी नहीं किया गया था।

क्या होगा आगे

ईरान समर्थित हूती आंदोलन, जो उत्तरी यमन के बड़े हिस्से पर नियंत्रण रखता है, के हमले तेज होते जा रहे हैं। मर्फी ने चेतावनी दी कि जमीनी हालात तेज़ी से बिगड़ रहे हैं और यह संघर्ष नियंत्रण से बाहर होने के संकेत दे रहा है। क्षेत्रीय कूटनीति और अमेरिकी नीति के बीच की यह खींचतान आने वाले हफ्तों में और पैनी हो सकती है।

संपादकीय दृष्टिकोण

तो डेमोक्रेटिक सांसदों की यह असहमति नीति को कितना प्रभावित कर पाएगी। भारत के लिए यह संकट और भी पेचीदा है — 27.4 लाख भारतीय सऊदी अरब में हैं और हूती हमले बढ़ते जा रहे हैं, लेकिन भारत की आधिकारिक प्रतिक्रिया अब तक केवल निंदा तक सीमित रही है। जब तक क्षेत्रीय कूटनीति ठोस नतीजे नहीं देती, प्रवासी भारतीयों की सुरक्षा पर बड़ा सवाल बना रहेगा।
RashtraPress
12 अक्टूबर 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

रियाद एयरपोर्ट हमले में कितने भारतीय प्रभावित हुए?
हूती विद्रोहियों के रियाद एयरपोर्ट हमले में 11 भारतीय नागरिक घायल हुए, जिनमें से एक की रविवार को मौत हो गई। तीन भारतीय ICU में हैं और उनकी हालत स्थिर बताई गई है, जबकि बाकी को अस्पताल से छुट्टी दे दी गई है।
क्रिस मर्फी ने यमन में अमेरिकी सैन्य कार्रवाई का विरोध क्यों किया?
सीनेटर मर्फी का कहना है कि अमेरिकी सैन्य हस्तक्षेप से ईरान और हूती विद्रोहियों के साथ टकराव और बढ़ेगा, जिससे क्षेत्र में तैनात अमेरिकी सैनिकों की जान को और खतरा होगा। उनके अनुसार युद्ध को राजनयिक तरीके से समाप्त करना ही सबसे सुरक्षित विकल्प है।
भारत सरकार की इस हमले पर क्या प्रतिक्रिया रही?
विदेश मंत्री एस. जयशंकर ने भारतीय नागरिक की मौत पर दुख जताया और कहा कि दूतावास परिवार को हर संभव सहायता देगा। विदेश मंत्रालय ने नागरिकों और नागरिक ढाँचे पर हमलों को 'पूरी तरह अस्वीकार्य' करार देते हुए उन्हें तुरंत बंद करने की माँग की।
अमेरिकी राष्ट्रपति ट्रंप ने रियाद हमले पर क्या कहा?
राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने शनिवार को इस हमले को 'बेहद दुखद घटना' बताया और कहा कि वे सऊदी क्राउन प्रिंस मोहम्मद बिन सलमान से बात करेंगे। रविवार शाम तक दोनों नेताओं के बीच हुई किसी बातचीत का आधिकारिक विवरण सामने नहीं आया था।
सऊदी अरब में कितने भारतीय रहते हैं और उनकी सुरक्षा को क्या खतरा है?
भारतीय दूतावास के आँकड़ों के अनुसार सऊदी अरब में करीब 27.4 लाख भारतीय निवास करते हैं, जो विदेशों में रहने वाले सबसे बड़े भारतीय समुदायों में से एक है। हूती हमलों के तेज होने से इस समुदाय की सुरक्षा को लेकर चिंताएँ बढ़ती जा रही हैं।
राष्ट्र प्रेस
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