उत्तर प्रशांत महासागर में 6.1 तीव्रता का भूकंप, जापान के उत्तरी-पूर्वी हिस्सों में महसूस हुए झटके
सारांश
मुख्य बातें
उत्तर प्रशांत महासागर में रविवार, 23 अगस्त को शाम 7:14 बजे IST पर 6.1 तीव्रता का भूकंप आया, जिसके झटके जापान के उत्तरी और पूर्वी हिस्सों में व्यापक रूप से महसूस किए गए। प्रारंभिक भूकंपीय आंकड़ों के अनुसार, इसका केंद्र 41.826° उत्तरी अक्षांश और 142.865° पूर्वी देशांतर पर समुद्र की सतह से 50 किलोमीटर की गहराई में था। फिलहाल किसी बड़े जान-माल के नुकसान या सुनामी की चेतावनी जारी नहीं की गई है।
मुख्य घटनाक्रम
जापानी मौसम विज्ञान एजेंसी (JMA) और स्थानीय प्रशासन स्थिति पर लगातार नज़र बनाए हुए हैं तथा प्रभावित क्षेत्रों से जानकारी जुटाई जा रही है। यह भूकंप ऐसे समय आया है जब जापान उसी दिन सुबह इबाराकी प्रांत में आए 5.9 तीव्रता के एक अन्य शक्तिशाली भूकंप के प्रभाव से अभी पूरी तरह उबर भी नहीं पाया था।
सुबह के उस भूकंप में कम से कम 37 लोग घायल हो गए थे। स्थानीय मीडिया के अनुसार, घायलों में टोक्यो, इबाराकी, कानागावा और आसपास के अन्य क्षेत्रों के लोग शामिल हैं।
बुनियादी ढाँचे पर असर
इबाराकी में आए भूकंप के कारण कई इलाकों में पानी की पाइपलाइनें फट गईं, जिससे कुछ सड़कों पर अस्थायी जलभराव हो गया। कांतो क्षेत्र में कई ट्रेन सेवाएँ भी कुछ समय के लिए बाधित रहीं, हालांकि बाद में धीरे-धीरे परिचालन बहाल कर दिया गया।
JMA के मुताबिक, सुबह आए भूकंप की गहराई लगभग 70 किलोमीटर थी और इबाराकी, साइटामा, चिबा तथा टोक्यो के अदाची वार्ड में जापान के सात-स्तरीय भूकंपीय तीव्रता पैमाने पर लोअर-5 दर्ज किया गया — जिस स्तर पर अधिकांश लोग घबरा जाते हैं और अलमारियों पर रखा सामान नीचे गिर सकता है।
परमाणु संयंत्रों की स्थिति सामान्य
अधिकारियों ने स्पष्ट किया है कि इबाराकी स्थित टोकाई नंबर-2 परमाणु ऊर्जा संयंत्र तथा पूर्वोत्तर जापान के फुकुशिमा दाइची और फुकुशिमा दाइनी परमाणु संयंत्रों में किसी प्रकार की असामान्यता दर्ज नहीं की गई है। सभी संयंत्र सामान्य रूप से कार्यरत हैं और विकिरण या किसी अन्य आपात स्थिति की कोई सूचना नहीं है।
सतर्कता की अपील
JMA ने लोगों से अगले एक सप्ताह तक सतर्क रहने की अपील की है। एजेंसी के अनुसार, विशेष रूप से अगले दो से तीन दिनों के दौरान समान तीव्रता के आफ्टरशॉक आने की संभावना बनी हुई है।
जापान और भूकंप: पृष्ठभूमि
गौरतलब है कि जापान दुनिया के सर्वाधिक भूकंप-प्रभावित देशों में शामिल है। देश प्रशांत महासागर के 'रिंग ऑफ फायर' क्षेत्र में स्थित है, जहाँ कई टेक्टोनिक प्लेटों की सक्रियता के कारण भूकंप लगातार आते रहते हैं। इसी कारण जापान ने भूकंप और सुनामी से निपटने के लिए अत्याधुनिक चेतावनी प्रणाली और आपदा प्रबंधन व्यवस्था विकसित की है। एक ही दिन में दो उल्लेखनीय भूकंपों का आना इस बात की याद दिलाता है कि इस क्षेत्र में भूकंपीय सक्रियता किस हद तक सामान्य जनजीवन को प्रभावित कर सकती है।