पश्चिमी कनाडा में 'बाल्ड रेंज' जंगल की आग का कहर, 20,000 से अधिक लोग बेघर
सारांश
मुख्य बातें
ब्रिटिश कोलंबिया के ओकानागन क्षेत्र में बाल्ड रेंज जंगल की आग ने 9 अगस्त की रात विकराल रूप धारण कर लिया, जिसके चलते 20,000 से अधिक लोगों को आनन-फानन में अपने घर खाली करने पड़े। आग ओकानागन झील के किनारे बसे शहरों की ओर तेज़ी से बढ़ रही है और घरों तथा इमारतों को स्वाहा करती जा रही है।
मुख्य घटनाक्रम
आग की सूचना सबसे पहले शुक्रवार शाम मिली थी, लेकिन कुछ ही घंटों में यह लगभग 50 वर्ग किलोमीटर (19 वर्ग मील) के दायरे में फैल गई। समरलैंड की पूरी कम्युनिटी — जहाँ लगभग 12,000 लोग रहते हैं — को इलाका खाली करने का आदेश दिया गया। इसके साथ ही पीचलैंड और उसके आसपास के करीब 8,000 लोगों को भी निकाला गया। फॉल्डर की छोटी कम्युनिटी भी इस आग की चपेट में है, और आग समरलैंड तक लगभग 15 किलोमीटर (9 मील) के रास्ते तक फैल चुकी है।
अधिकारियों की प्रतिक्रिया
ओकानागन-सिमिलकामीन क्षेत्रीय जिले के आपातकालीन अधिकारी एरिक थॉम्पसन ने इसे इस क्षेत्र की सबसे तेज़ी से फैलने वाली जंगल की आगों में से एक बताया। स्थिति इतनी गंभीर हो गई कि थॉम्पसन को स्वयं इमरजेंसी ऑपरेशन सेंटर छोड़कर अपने परिवार को सुरक्षित निकालना पड़ा। शनिवार सुबह अपनी गाड़ी से पोस्ट किए गए एक वीडियो में उन्होंने कहा, 'मुझे ईओसी छोड़कर अपने परिवार को इस इलाके से रेस्क्यू करने के लिए आना पड़ा। हम दक्षिण की ओर जा रहे हैं।' अधिकारियों को अभी तक यह पता नहीं चल पाया है कि इस आग में कितने घरों को नुकसान पहुँचा है।
आम जनता पर असर
सोशल मीडिया पर साझा किए गए वीडियो में कई घर जलते हुए दिख रहे हैं, जबकि लोग दोनों ओर से उठती आग की लपटों के बीच से भागते नज़र आए। एक घर की मालिक केरी गोल्ड और उनके पति माइक एल्सिंगा पास के पहाड़ों से आग की लपटें फैलते देख रात करीब 12:30 बजे घर छोड़कर भाग गए। गोल्ड ने कहा, 'यह डरावना है। यह तेज़ी से बढ़ रहा है।'
व्यापक संदर्भ
यह ऐसे समय में आया है जब कनाडा हाल के वर्षों में लगातार भीषण जंगल की आग के मौसम का सामना कर रहा है। गौरतलब है कि इन आगों की वजह से बड़े पैमाने पर लोगों को विस्थापित होना पड़ा है और कनाडा तथा अमेरिका के बड़े हिस्सों में बार-बार धुआँ छाया रहा है। जलवायु परिवर्तन को इन बढ़ते खतरनाक दावानल मौसमों का एक प्रमुख कारण माना जा रहा है।
क्या होगा आगे
आपातकालीन दल आग पर काबू पाने के प्रयासों में जुटे हैं, लेकिन तेज़ हवाओं और शुष्क मौसम के कारण चुनौती बनी हुई है। प्रभावित निवासियों को तब तक घर वापस न लौटने की सलाह दी गई है जब तक अधिकारी इलाके को सुरक्षित घोषित नहीं कर देते।