जाम्बिया राष्ट्रपति चुनाव 2025: हिचिलेमा के सामने दिवंगत लुंगु की विरासत की चुनौती, 88 लाख मतदाता डाल रहे वोट
सारांश
मुख्य बातें
जाम्बिया में 13 अगस्त 2025 को राष्ट्रपति चुनाव के लिए मतदान जारी है, जिसमें करीब 88 लाख पंजीकृत मतदाता अपने मताधिकार का प्रयोग कर रहे हैं। मौजूदा राष्ट्रपति हाकाइंडे हिचिलेमा दूसरी बार सत्ता में बने रहने की कोशिश कर रहे हैं, लेकिन उनके रास्ते में सबसे बड़ी बाधा एक जीवित प्रतिद्वंद्वी नहीं, बल्कि 2025 में निधन हो चुके पूर्व राष्ट्रपति एडगर लुंगु की अमिट राजनीतिक विरासत है।
लुंगु की छाया में चुनाव
लुंगु का निधन भले ही हो चुका हो, किंतु उनकी राजनीतिक उपस्थिति इस चुनाव में स्पष्ट रूप से महसूस की जा रही है। विपक्षी नेता ब्रायन मुंडुबिले, जो टोंसे अलायंस और लुंगु के समर्थकों के साथ मिलकर चुनाव लड़ रहे हैं, ने सत्ता में आने पर लुंगु के अवशेषों को वापस लाकर उन्हें सम्मानजनक तरीके से दफनाने का वादा किया है।
लुंगु के निधन के बाद उनके अंतिम संस्कार और पार्थिव शरीर को लेकर भी विवाद उठा था — लुंगु के परिवार ने सरकारी नियंत्रण से बाहर अंतिम संस्कार की माँग की थी। यह विवाद हिचिलेमा और लुंगु के बीच वर्षों पुराने कटु राजनीतिक टकराव की परिणति माना जा रहा है।
सरकार की उपलब्धियाँ बनाम जनता की तकलीफें
हिचिलेमा प्रशासन का दावा है कि उसने महंगाई को घटाकर करीब 6.5 प्रतिशत पर लाया, मुफ्त शिक्षा को आगे बढ़ाया और विदेशी निवेश आकर्षित करने में सफलता हासिल की। उनके समर्थक इन आर्थिक उपलब्धियों को चुनावी प्रचार का केंद्रीय मुद्दा बना रहे हैं।
हालाँकि, ज़मीनी हकीकत अलग तस्वीर पेश करती है। खाद्य असुरक्षा, आय में धीमी वृद्धि और जीवन-यापन की ऊँची लागत ने आम मतदाताओं के बीच गहरा असंतोष पैदा किया है। आलोचकों का कहना है कि सरकारी आँकड़े और नागरिकों का रोज़मर्रा का अनुभव एक-दूसरे से मेल नहीं खाते।
युवा मतदाता और चुनावी रणनीति
हिचिलेमा का चुनाव अभियान युवाओं को लुभाने पर केंद्रित है। छात्र आवास भत्ते जैसे कदमों को प्रमुखता से उठाया जा रहा है। जाम्बिया की युवा आबादी इस चुनाव में निर्णायक भूमिका निभा सकती है, क्योंकि पंजीकृत मतदाताओं में युवाओं की संख्या उल्लेखनीय है।
स्थानीय मीडिया हाउस न्यूज डिगर्स के अनुसार, यह चुनाव केवल हिचिलेमा सरकार के कार्यकाल का लेखा-जोखा नहीं, बल्कि लुंगु की राजनीतिक विरासत और उनके समर्थकों के संगठित प्रभाव की भी परीक्षा है।
विपक्ष के आरोप और सरकार का पक्ष
विपक्षी दलों ने हिचिलेमा प्रशासन पर पुलिस के हस्तक्षेप और राजनीतिक गिरफ्तारियों के ज़रिए विरोधियों पर दबाव बनाने के गंभीर आरोप लगाए हैं। सरकार ने इन आरोपों को सिरे से खारिज करते हुए अपने कार्यकाल में मीडिया की स्वतंत्रता में सुधार का दावा किया है।
आगे क्या होगा
मतगणना के बाद जाम्बिया की राजनीतिक दिशा तय होगी। यदि हिचिलेमा दोबारा जीतते हैं, तो उन्हें जनता के आर्थिक असंतोष को दूर करने की चुनौती का सामना करना होगा। वहीं, यदि विपक्ष सफल रहा, तो लुंगु की विरासत को केंद्र में रखकर बनी नई सरकार जाम्बिया की राजनीति में एक नया अध्याय शुरू करेगी।