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क्या हरसिद्धि विधानसभा सीट पर जदयू निभाएगी 'किंगमेकर' की भूमिका?

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क्या हरसिद्धि विधानसभा सीट पर जदयू निभाएगी 'किंगमेकर' की भूमिका?

सारांश

हरसिद्धि विधानसभा क्षेत्र में खड़ा मुकाबला, जहाँ जदयू किंगमेकर की भूमिका निभा सकती है। क्या भाजपा और राजद के बीच की प्रतिस्पर्धा इस बार नया मोड़ लेगी? जानें इस महत्वपूर्ण सीट के बारे में और क्या हो सकता है 2025 में।

मुख्य बातें

हरसिद्धि विधानसभा क्षेत्र का गठन 1951 में हुआ।
यह सीट अनुसूचित जाति के लिए आरक्षित है।
भाजपा और राजद के बीच प्रतिस्पर्धा है।
2025 का चुनाव इस क्षेत्र में महत्वपूर्ण होगा।
मतदाता संख्या 2024 तक बढ़कर 2.78 लाख हो जाएगी।

पटना, 28 अगस्त (राष्ट्र प्रेस)। बिहार के पूर्वी चंपारण जिले का हरसिद्धि विधानसभा क्षेत्र सियासी हलकों में चर्चा का केंद्र बना हुआ है। हरसिद्धि और तुरकौलिया प्रखंडों से मिलकर बनी सीट का गठन 1951 में हुआ था और अब तक यहां 17 बार विधानसभा चुनाव हो चुके हैं।

वर्ष 2008 में परिसीमन आयोग की सिफारिश के बाद यह सीट सामान्य वर्ग से बदलकर अनुसूचित जाति (एससी) के लिए आरक्षित कर दी गई, जिसके बाद से यहां तीन बार चुनाव हो चुके हैं। इन चुनावों में भाजपा और राजद आमने-सामने रहे।

शुरुआती दशकों में कांग्रेस का बोलबाला रहा। पहले दस चुनावों में से आठ पर कांग्रेस ने कब्जा जमाया। 1967 में वाम दल और 1977 में जनता पार्टी ने कांग्रेस की इस बढ़त को तोड़ा। 1990 के दशक में जनता दल और 2000 में समता पार्टी ने जीत दर्ज की। 2005 के दोनों विधानसभा चुनावों (फरवरी और अक्टूबर) में लोक जनशक्ति पार्टी सफल रही।

इस क्षेत्र की राजनीति में मोहम्मद हिदायतुल्लाह खान का नाम विशेष महत्व रखता है। उन्होंने कांग्रेस के टिकट पर चार बार (1972, 1980, 1985 और 1990) जीत दर्ज कर मंत्री और विधानसभा अध्यक्ष के रूप में अपनी पहचान बनाई।

हाल के वर्षों में भाजपा के कृष्णानंदन पासवान ने मजबूती दिखाई। उन्होंने 2010 और 2020 में जीत हासिल की, जबकि 2015 में राजद उम्मीदवार राजेंद्र कुमार से हार गए थे। इन नतीजों ने जदयू की ‘किंगमेकर’ वाली भूमिका भी उजागर की, क्योंकि 2010 और 2020 में वह भाजपा के साथ थी, वहीं 2015 में राजद गठबंधन के साथ। दिलचस्प यह भी है कि आरक्षित सीट बनने के बाद राजद ने हर बार नया उम्मीदवार उतारा है।

हाल ही में हुए लोकसभा चुनाव में भाजपा के वरिष्ठ नेता राधा मोहन सिंह पूर्वी चंपारण से सातवीं बार सांसद तो बने, लेकिन हरसिद्धि विधानसभा खंड में उन्हें विकासशील इंसान पार्टी (वीआईपी) के राजेश कुशवाहा से पीछे रहना पड़ा। यह परिणाम राजद गठबंधन के लिए उत्साहजनक माना जा रहा है और 2025 में उन्हें नई ऊर्जा दे सकता है।

2020 के विधानसभा चुनाव में हरसिद्धि में 2.67 लाख मतदाता पंजीकृत थे, जिनमें 43,000 से अधिक अनुसूचित जाति और करीब 50,000 मुस्लिम मतदाता शामिल थे। पूरी तरह ग्रामीण इस क्षेत्र में 2020 का मतदान प्रतिशत 63.56 प्रतिशत रहा, जो अब तक का सबसे कम आंकड़ा था। 2024 तक मतदाताओं की संख्या बढ़कर 2.78 लाख हो गई।

भाजपा पिछले कुछ वर्षों में यहां अपनी जड़ें गहरी कर चुकी है, लेकिन लोकसभा चुनाव के नतीजों ने यह स्पष्ट कर दिया है कि मुकाबला अब एकतरफा नहीं रहा। राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि 2025 का विधानसभा चुनाव हरसिद्धि में कड़ा और दिलचस्प संघर्ष लेकर आएगा।

संपादकीय दृष्टिकोण

यह स्पष्ट है कि यह क्षेत्र 2025 के चुनावों के लिए महत्वपूर्ण साबित हो सकता है। विभिन्न दलों की रणनीतियाँ और मतदाता की प्राथमिकताएँ इसे और भी दिलचस्प बना देती हैं। इस प्रकार, हरसिद्धि की राजनीति पर नजर रखना आवश्यक होगा।
RashtraPress
26 जून 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

हरसिद्धि विधानसभा क्षेत्र कब बना?
हरसिद्धि विधानसभा क्षेत्र का गठन 1951 में हुआ था।
इस सीट पर अब तक कितनी बार चुनाव हो चुके हैं?
यहां अब तक 17 बार विधानसभा चुनाव हो चुके हैं।
हरसिद्धि विधानसभा क्षेत्र की राजनीति में कौन प्रमुख नेता हैं?
मोहम्मद हिदायतुल्लाह खान और कृष्णानंदन पासवान प्रमुख नेता हैं।
2020 के विधानसभा चुनाव में कितने मतदाता थे?
2020 में हरसिद्धि में 2.67 लाख मतदाता पंजीकृत थे।
राजद ने हर बार क्यों नया उम्मीदवार उतारा है?
आरक्षित सीट बनने के बाद राजद ने हर बार नया उम्मीदवार उतारा है।
राष्ट्र प्रेस
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