जेलेंस्की का बड़ा बयान: मोर्चों पर युद्धविराम को तैयार, पर यूक्रेनी जमीन नहीं छोड़ेंगे
सारांश
मुख्य बातें
यूक्रेन के राष्ट्रपति वोलोदिमिर जेलेंस्की ने 25 अक्टूबर 2026 को स्पष्ट किया कि यूक्रेन युद्ध शीघ्र समाप्त करने के लिए मौजूदा मोर्चों पर सैन्य कार्रवाई रोकने को तैयार है, किंतु देश की एक इंच भूमि भी सौंपने का कोई प्रश्न नहीं उठता। एबीसी न्यूज़ को दिए साक्षात्कार में उन्होंने युद्धविराम की संभावना खुली रखी, लेकिन यूक्रेन के करीब 25 प्रतिशत क्षेत्र को रूस के हवाले करने के किसी भी प्रस्ताव को दृढ़तापूर्वक नकार दिया।
मोर्चे जमाने की शर्त, क्षेत्र नहीं
जेलेंस्की ने कहा कि वे युद्धविराम समझौते तक पहुँचने के इच्छुक हैं, परंतु इसका अर्थ यह कदापि नहीं कि यूक्रेन अपनी संप्रभु भूमि का एक हिस्सा रूस को स्वीकार करे। उनके इस बयान को भू-राजनीतिक हलकों में एक स्पष्ट 'रेड लाइन' के रूप में देखा जा रहा है — मोर्चों पर ठहराव हाँ, क्षेत्रीय समर्पण कदापि नहीं।
यह ऐसे समय में आया है जब अमेरिकी मीडिया रिपोर्टों के अनुसार वॉशिंगटन की ओर से कीव पर शांति वार्ता में कुछ रियायतें देने का दबाव बढ़ रहा है। अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप कई मौकों पर यह कह चुके हैं कि अमेरिका की मध्यस्थता वाली वार्ताओं में प्रगति न होने के लिए कीव भी आंशिक रूप से जिम्मेदार है।
अमेरिकी सैन्य सहायता में भारी कमी की चिंता
जेलेंस्की ने अमेरिका से मिलने वाली सैन्य सहायता में आई गिरावट पर गंभीर चिंता जताई। उन्होंने बताया कि पिछले तीन महीनों में यूक्रेन को अपने पैट्रियट एयर डिफेंस सिस्टम के लिए अमेरिका से केवल 24 इंटरसेप्टर मिसाइलें प्राप्त हुई हैं, जबकि वास्तविक ज़रूरत औसतन प्रतिमाह करीब 350 मिसाइलों की है।
स्थिति की विकटता को रेखांकित करते हुए उन्होंने कहा कि अकेले गुरुवार की रात कीव पर 30 बैलिस्टिक मिसाइलों से हमला किया गया। गौरतलब है कि पैट्रियट प्रणाली यूक्रेन की राजधानी की वायु सुरक्षा की रीढ़ मानी जाती है, और आपूर्ति में इस अंतर को विशेषज्ञ खतरनाक बता रहे हैं।
अबू धाबी में त्रिपक्षीय वार्ता की तैयारी
क्रेमलिन के प्रवक्ता दिमित्री पेस्कोव ने शुक्रवार को पुष्टि की कि रूस, यूक्रेन और अमेरिका के बीच त्रिपक्षीय वार्ता नवंबर के पहले पखवाड़े में संयुक्त अरब अमीरात की राजधानी अबू धाबी में आयोजित होने की योजना है। पेस्कोव के अनुसार, इन बातचीत का मुख्य केंद्र बिंदु किसी संभावित शांति समझौते के बाद दोनों देशों की सुरक्षा व्यवस्था होगी।
'इंटरफैक्स-यूक्रेन' की रिपोर्ट के अनुसार, जेलेंस्की ने भी अबू धाबी में इस त्रिपक्षीय बैठक के लिए यूक्रेन की तत्परता की पुष्टि की है। उन्होंने अमेरिकी थिंक टैंक हडसन इंस्टीट्यूट को ऑनलाइन संबोधित करते हुए कहा कि वार्ता का सटीक समय काफी हद तक रूस के रुख पर निर्भर करेगा।
यूरोपीय भागीदारी की माँग
जेलेंस्की ने इस प्रक्रिया में यूरोपीय देशों के प्रतिनिधियों की भागीदारी को भी अनिवार्य बताया। उनका तर्क है कि यूरोप की सुरक्षा सीधे तौर पर इस संघर्ष के निपटारे से जुड़ी है, इसलिए महाद्वीपीय साझेदारों को वार्ता से अलग नहीं रखा जा सकता।
उन्होंने नेताओं के स्तर पर सीधी वार्ता की आवश्यकता पर भी जोर दिया और कहा कि अब केवल तकनीकी स्तर की बातचीत से काम नहीं चलेगा — स्थायी शांति के लिए शीर्ष नेतृत्व के बीच सीधा संवाद अपरिहार्य है।
आगे की राह
यदि अबू धाबी वार्ता निर्धारित समय पर होती है, तो यह युद्ध के लगभग तीन वर्षों में सबसे महत्वपूर्ण कूटनीतिक प्रयास होगा। हालाँकि विशेषज्ञों का कहना है कि क्षेत्रीय मुद्दों पर यूक्रेन और रूस के बीच की खाई अभी भी बेहद गहरी है, और बिना किसी ठोस ढाँचे के युद्धविराम दीर्घकालिक समाधान की गारंटी नहीं दे सकता।