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जेलेंस्की का बड़ा ऐलान: अजरबैजान में पुतिन से मिलने को तैयार, रूस-यूक्रेन शांति वार्ता पर टिकी दुनिया की नजर

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जेलेंस्की का बड़ा ऐलान: अजरबैजान में पुतिन से मिलने को तैयार, रूस-यूक्रेन शांति वार्ता पर टिकी दुनिया की नजर

सारांश

यूक्रेन के राष्ट्रपति जेलेंस्की ने अजरबैजान दौरे पर पुतिन से बाकू में मिलने की तैयारी जताई। अमेरिकी मध्यस्थता ठप होने के बाद यह नई कूटनीतिक पहल है। अलीयेव से ऊर्जा सुरक्षा व तीन पक्षीय वार्ता पर चर्चा हुई, लेकिन क्रेमलिन अब भी अड़ियल रुख पर कायम है।

मुख्य बातें

राष्ट्रपति जेलेंस्की ने 25 अप्रैल 2025 को बाकू, अजरबैजान में पुतिन से मिलने की तैयारी का ऐलान किया।
यह दक्षिण कॉकेशस की जेलेंस्की की पहली यात्रा है, जो फरवरी 2022 के बाद से अब तक नहीं हुई थी।
अमेरिकी मध्यस्थता ईरान के साथ तनाव के कारण फिलहाल ठप है, जिससे नए मध्यस्थ की जरूरत महसूस हो रही है।
जेलेंस्की ने तुर्किए और स्विट्जरलैंड के बाद अजरबैजान को तीसरे संभावित वार्ता स्थल के रूप में प्रस्तावित किया।
क्रेमलिन अब भी रूस के बाहर किसी स्थान पर वार्ता से इनकार कर रहा है और सैन्य अभियान जारी है।
अजरबैजान के राष्ट्रपति अलीयेव ने यूक्रेन की क्षेत्रीय अखंडता के समर्थन और द्विपक्षीय सहयोग की पुनः पुष्टि की।

बाकू/नई दिल्ली, 25 अप्रैल (राष्ट्र प्रेस)। यूक्रेन के राष्ट्रपति वोलोडिमीर जेलेंस्की ने अजरबैजान की राजधानी बाकू में एक अहम बयान देते हुए कहा कि वे रूसी राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन से अजरबैजान की धरती पर मिलने के लिए पूरी तरह तैयार हैं। यह दक्षिण कॉकेशस की उनकी पहली यात्रा है, जो रूस-यूक्रेन युद्ध के बीच कूटनीतिक दृष्टि से अत्यंत महत्वपूर्ण मानी जा रही है। 25 अप्रैल 2025 को जेलेंस्की ने अजरबैजान के राष्ट्रपति इल्हाम अलीयेव से मुलाकात कर ऊर्जा सुरक्षा और युद्ध विराम की संभावनाओं पर विस्तृत बातचीत की।

जेलेंस्की का बाकू में बड़ा कूटनीतिक दांव

राष्ट्रपति जेलेंस्की ने स्पष्ट शब्दों में कहा, "यूक्रेन के लिए यह बेहद जरूरी है कि रूस इस गलत युद्ध को समाप्त करने की इच्छाशक्ति दिखाए। बाकू मॉस्को के बड़े पैमाने पर जारी युद्ध को खत्म करने की कूटनीतिक प्रक्रिया में मध्यस्थ की भूमिका निभा सकता है।"

उन्होंने यह भी बताया कि कीव पहले ही तुर्किए और स्विट्जरलैंड में इस प्रकार की तीन तरफा वार्ता में भाग ले चुका है। जेलेंस्की ने कहा, "हमने अजरबैजान के राष्ट्रपति को स्पष्ट कर दिया है कि हम तीन पक्षीय बातचीत के लिए तैयार हैं — बशर्ते रूस भी कूटनीति की राह पर आए।"

अमेरिकी मध्यस्थता ठप, नई राह की तलाश

पिछले कई हफ्तों से अमेरिका की अगुवाई में रूस और यूक्रेन के बीच सुलह की कोशिशें चल रही थीं, लेकिन ईरान के साथ अमेरिकी तनाव बढ़ने के बाद यह वार्ता प्रक्रिया व्यावहारिक रूप से ठप हो गई है। ऐसे में जेलेंस्की का अजरबैजान दौरा एक वैकल्पिक कूटनीतिक मंच की तलाश के रूप में देखा जा रहा है।

गौरतलब है कि अजरबैजान न तो नाटो का सदस्य है और न ही रूस का खुला समर्थक — यही तटस्थता उसे एक विश्वसनीय मध्यस्थ बनाती है। बाकू के रूस और यूक्रेन दोनों से व्यापारिक और ऊर्जा संबंध हैं, जो उसे इस भूमिका के लिए स्वाभाविक रूप से उपयुक्त बनाते हैं।

क्रेमलिन की अड़ियल नीति और जमीनी हकीकत

हालांकि क्रेमलिन ने अब तक रूसी सीमा के बाहर किसी भी स्थान पर यूक्रेन के साथ वार्ता से साफ इनकार किया है। रूस यूक्रेन के विभिन्न शहरों पर बमबारी और सैन्य अभियान जारी रखे हुए है और अपनी मांगों — जिनमें यूक्रेन की नाटो सदस्यता का स्थायी त्याग और कुछ क्षेत्रों पर रूसी नियंत्रण की स्वीकृति शामिल है — से पीछे हटने को तैयार नहीं है।

यह विरोधाभास उल्लेखनीय है: एक तरफ मॉस्को शांति वार्ता में रुचि दिखाने का कोई संकेत नहीं दे रहा, दूसरी तरफ जेलेंस्की एक के बाद एक नई मध्यस्थ राजधानियों का दरवाजा खटखटा रहे हैं। यह यूक्रेन की उस कूटनीतिक रणनीति का हिस्सा है जिसमें अंतरराष्ट्रीय समुदाय को यह संदेश दिया जाए कि युद्ध जारी रहने की जिम्मेदारी रूस की है।

अलीयेव का रुख और अजरबैजान का भू-राजनीतिक महत्व

अजरबैजान के राष्ट्रपति इल्हाम अलीयेव ने इस बैठक में दोनों देशों की क्षेत्रीय अखंडता के प्रति अपने समर्थन को दोहराया। उन्होंने कहा, "हमने विचारों का गहन आदान-प्रदान किया। दोनों देशों के बीच सहयोग की आज पुनः पुष्टि हुई है।"

ऊर्जा के मोर्चे पर भी यह बैठक महत्वपूर्ण रही। अजरबैजान यूरोप को प्राकृतिक गैस की आपूर्ति करने वाला एक प्रमुख देश है और यूक्रेन उसे ऊर्जा सुरक्षा का एक विश्वसनीय साझेदार मानता है। रूसी ऊर्जा पर यूरोप की निर्भरता कम करने में बाकू की भूमिका पहले से ही बढ़ रही है।

ऐतिहासिक संदर्भ और आगे की राह

यह उल्लेखनीय है कि फरवरी 2022 में रूस के यूक्रेन पर पूर्ण आक्रमण के बाद से यह जेलेंस्की की दक्षिण कॉकेशस की पहली यात्रा है — यानी तीन साल से अधिक समय बाद। इससे पहले तुर्किए और स्विट्जरलैंड में हुई बातचीत के नतीजे सीमित रहे, लेकिन कूटनीतिक प्रयास थमे नहीं हैं।

आने वाले हफ्तों में यह देखना महत्वपूर्ण होगा कि क्या मॉस्को बाकू को वार्ता स्थल के रूप में स्वीकार करता है। यदि अजरबैजान इस भूमिका में सफल होता है, तो यह न केवल रूस-यूक्रेन युद्ध की दिशा बदल सकता है बल्कि दक्षिण कॉकेशस को वैश्विक कूटनीति के केंद्र में स्थापित कर सकता है।

संपादकीय दृष्टिकोण

बल्कि यूक्रेन की उस सोची-समझी रणनीति का हिस्सा है जिसमें वे दुनिया को यह दिखाना चाहते हैं कि शांति की इच्छा कीव में है, मॉस्को में नहीं। अमेरिकी मध्यस्थता के ठप होने के बाद तटस्थ देशों — तुर्किए, स्विट्जरलैंड और अब अजरबैजान — का दरवाजा खटखटाना यह बताता है कि यूक्रेन कूटनीतिक मोर्चे पर थका नहीं है। विडंबना यह है कि जिस रूस ने युद्ध शुरू किया, वही बातचीत की शर्तें तय कर रहा है — और यह असंतुलन ही इस संघर्ष का सबसे बड़ा अनसुलझा सवाल है। अजरबैजान यदि वास्तव में मध्यस्थ बनता है, तो यह दक्षिण कॉकेशस के भू-राजनीतिक महत्व को नई ऊंचाई देगा।
RashtraPress
29 अक्टूबर 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

जेलेंस्की ने अजरबैजान में पुतिन से मिलने की बात क्यों कही?
जेलेंस्की ने अजरबैजान को एक तटस्थ मध्यस्थ के रूप में देखते हुए वहां पुतिन से मिलने की तैयारी जताई। उनका मानना है कि बाकू रूस-यूक्रेन युद्ध समाप्त करने की कूटनीतिक प्रक्रिया में महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकता है।
क्या रूस अजरबैजान में बातचीत के लिए तैयार है?
अभी तक क्रेमलिन ने रूस के बाहर किसी भी स्थान पर यूक्रेन के साथ वार्ता से इनकार किया है। रूस अपनी मांगों पर अड़ा हुआ है और सैन्य अभियान जारी रखे हुए है।
जेलेंस्की और अलीयेव के बीच किन मुद्दों पर बातचीत हुई?
दोनों नेताओं ने ऊर्जा सुरक्षा, क्षेत्रीय अखंडता और रूस-यूक्रेन युद्ध में अजरबैजान की संभावित मध्यस्थ भूमिका पर चर्चा की। अलीयेव ने यूक्रेन की क्षेत्रीय अखंडता के प्रति अपने समर्थन को दोहराया।
अमेरिका की मध्यस्थता क्यों रुकी हुई है?
ईरान के साथ अमेरिकी तनाव बढ़ने के कारण वाशिंगटन की कूटनीतिक प्राथमिकताएं बदल गई हैं, जिससे रूस-यूक्रेन शांति वार्ता में अमेरिकी भूमिका फिलहाल सीमित हो गई है।
यह यूक्रेन के लिए कितना अहम दौरा है?
यह फरवरी 2022 में रूस के पूर्ण आक्रमण के बाद से जेलेंस्की की दक्षिण कॉकेशस की पहली यात्रा है। यह दौरा नई कूटनीतिक संभावनाओं और वैकल्पिक मध्यस्थता मंचों की तलाश के लिहाज से बेहद महत्वपूर्ण माना जा रहा है।
राष्ट्र प्रेस
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