9 सितंबर 2026
LIVE
Get it on Google Play Download on the App Store

कमर दर्द और गर्दन की अकड़न से राहत दिलाएंगे ये 11 योगासन, रोज़ाना अभ्यास से रीढ़ रहेगी मज़बूत

शेयर करें:
ऑडियो वॉइस लोड हो रही है…
कमर दर्द और गर्दन की अकड़न से राहत दिलाएंगे ये 11 योगासन, रोज़ाना अभ्यास से रीढ़ रहेगी मज़बूत

सारांश

दफ्तर में घंटों बैठने से कमर और गर्दन की तकलीफ आम हो गई है। ताड़ासन से लेकर अर्ध हलासन तक — ये 11 योगासन रीढ़ को लचीला और मज़बूत बनाते हैं। आयुष मंत्रालय भी अर्ध चक्रासन को स्पाइन स्वास्थ्य के लिए प्रभावकारी मानता है।

मुख्य बातें

गलत पोस्चर और गतिहीन जीवनशैली के कारण कम उम्र में कमर दर्द और गर्दन की अकड़न तेज़ी से बढ़ रही है।
आयुष मंत्रालय के अनुसार अर्ध चक्रासन रीढ़ के लचीलेपन और फेफड़ों की कार्यप्रणाली के लिए अत्यधिक प्रभावी है।
मार्जारीआसन में रीढ़ को आगे-पीछे लहर की तरह हिलाने से पूरा स्पाइन लचीला और मज़बूत बनता है।
अर्ध हलासन में पैरों को 90 डिग्री पर उठाने से लंबर क्षेत्र को स्थिरता मिलती है।
गंभीर स्पाइन समस्या होने पर प्रशिक्षित योग प्रशिक्षक या चिकित्सक की देखरेख में अभ्यास करने की सलाह दी जाती है।
कुल 11 योगासन — ताड़ासन, ऊर्ध्व हस्तोत्तानासन, अर्ध चक्रासन, त्रिकोणासन, मार्जारीआसन, वक्रासन, अर्ध उष्ट्रासन, शशकासन, भुजंगासन, सेतुबंधासन और अर्ध हलासन — रीढ़ स्वास्थ्य के लिए प्रभावकारी बताए गए हैं।

गलत मुद्रा में घंटों कंप्यूटर के सामने बैठे रहने और शारीरिक गतिविधियों की कमी के चलते आज कम उम्र में ही कमर दर्द, गर्दन की अकड़न और स्पाइन से जुड़ी तकलीफें तेज़ी से बढ़ रही हैं। विशेषज्ञों के अनुसार, योग रीढ़ को स्वस्थ, लचीला और मज़बूत बनाए रखने का सबसे सुलभ और प्राकृतिक उपाय है। नियमित योगाभ्यास से न केवल रीढ़ की हड्डी मज़बूत होती है, बल्कि शरीर का पोस्चर भी सुधरता है और दर्द से स्थायी राहत मिलती है।

आधुनिक जीवनशैली और रीढ़ पर बढ़ता बोझ

आज की भागदौड़ भरी दिनचर्या में दफ्तर में लगातार बैठकर काम करना एक सामान्य बात बन गई है। इस गतिहीन जीवनशैली का सबसे बड़ा शिकार हमारी रीढ़ की हड्डी होती है। गलत पोस्चर, लंबे समय तक एक ही स्थिति में बैठे रहना और व्यायाम की कमी मिलकर स्पाइन को कमज़ोर बना देते हैं। यह ऐसे समय में और भी चिंताजनक है जब युवा पीढ़ी में भी पीठ और गर्दन की समस्याएं आम होती जा रही हैं।

रीढ़ के लिए प्रभावकारी योगासन

ताड़ासन — योग की मूलभूत मुद्राओं में से एक, यह आसन पूरे शरीर को हल्का खिंचाव देकर पोस्चर को बेहतर बनाता है। यह रीढ़ की हड्डी को सीधा और मज़बूत रखता है, कंधों व गर्दन की जकड़न घटाता है और शरीर के संतुलन को बढ़ाता है।

ऊर्ध्व हस्तोत्तानासन — खड़े होकर किया जाने वाला यह आसन रीढ़ को स्वस्थ, लचीला और मज़बूत बनाता है। साइड में झुकने से पसलियों की मांसपेशियाँ खुलती हैं, जिससे फेफड़ों को ऑक्सीजन ग्रहण करने के लिए अधिक स्थान मिलता है।

अर्ध चक्रासनआयुष मंत्रालय के अनुसार, यह हाफ व्हील पोज़ एक उत्कृष्ट बैकबेंडिंग आसन है जो रीढ़ के लचीलेपन और फेफड़ों की कार्यप्रणाली में सुधार के लिए अत्यधिक प्रभावी है। इस आसन में शरीर पीछे की ओर झुकता है, जिससे रीढ़ पर सकारात्मक दबाव पड़ता है।

त्रिकोणासन — रीढ़ के लचीलेपन और मज़बूती के लिए यह आसन बेहद कारगर माना जाता है। यह रीढ़ को दोनों दिशाओं में उत्तम खिंचाव देता है, जिससे पीठ का दर्द कम होता है और शारीरिक मुद्रा में सुधार आता है।

मार्जारीआसन — विशेषज्ञों के अनुसार, रोज़ाना कुछ मिनट इस 'बिल्ली की मुद्रा' वाले आसन का अभ्यास करने से पीठ दर्द में उल्लेखनीय राहत मिल सकती है। इसमें रीढ़ की हड्डी को आगे-पीछे लहर की तरह हिलाया जाता है, जिससे पूरा स्पाइन लचीला और मज़बूत बनता है।

वक्रासन — रीढ़ और कमर के लिए उपयोगी माना जाने वाला यह आसन नियमित अभ्यास से रीढ़ में लचीलापन बढ़ाने में सहायक है। लंबे समय तक बैठकर काम करने वाले लोगों के लिए यह शरीर को स्ट्रेच करने का एक बेहतरीन तरीका है।

अर्ध उष्ट्रासन — दफ्तर में लगातार झुककर बैठने से रीढ़ में जो कड़ापन आ जाता है, यह आसन उसे दूर करता है। रीढ़ को पीछे की ओर मोड़कर यह उसके स्वाभाविक लचीलेपन को पुनः स्थापित करता है और कंधे झुकने की समस्या से भी राहत दिलाता है।

शशकासन — इस आसन के दौरान रीढ़ पर खिंचाव पड़ता है और लचीलापन बढ़ता है। नियमित अभ्यास से पीठ की समस्याओं में आराम मिलता है और पेट के निचले हिस्से में रक्त प्रवाह भी बेहतर होता है।

भुजंगासन — यह आसन पीठ के निचले हिस्से और रीढ़ के साथ चलने वाली मांसपेशियों को सक्रिय और मज़बूत बनाता है। इससे रीढ़ की हड्डी के आसपास की तंत्रिकाओं और रक्त वाहिकाओं में रक्त का प्रवाह बेहतर होता है।

सेतुबंधासन — ब्रिज पोज़ के नाम से भी जाना जाने वाला यह आसन रीढ़ को मज़बूत, लचीला और तनावमुक्त बनाने में मदद करता है। कूल्हों को ऊपर उठाने पर पीठ और रीढ़ की निचली मांसपेशियों पर दबाव पड़ता है, जिससे वे मज़बूत होती हैं।

अर्ध हलासन — पीठ के बल लेटकर पैरों को 90 डिग्री के कोण पर ऊपर उठाने वाला यह आसन रीढ़ के निचले हिस्से यानी लंबर क्षेत्र को स्थिरता और मज़बूती प्रदान करता है।

विशेषज्ञों की सलाह

योग विशेषज्ञों का कहना है कि इन आसनों का अभ्यास धीरे-धीरे और सही तकनीक के साथ शुरू करना चाहिए। यदि किसी को पहले से कोई गंभीर स्पाइन की समस्या हो, तो किसी प्रशिक्षित योग प्रशिक्षक या चिकित्सक की देखरेख में ही अभ्यास करने की सलाह दी जाती है।

आम जनता पर असर

गौरतलब है कि भारत में कार्यालय कर्मचारियों और युवाओं में स्पाइन से जुड़ी बीमारियाँ तेज़ी से बढ़ रही हैं। इन सरल योगासनों को दिनचर्या में शामिल करके न केवल दर्द से राहत पाई जा सकती है, बल्कि दीर्घकालिक स्वास्थ्य लाभ भी हासिल किए जा सकते हैं। नियमित योगाभ्यास को एक निवारक स्वास्थ्य उपाय के रूप में अपनाना इस बढ़ती समस्या का सबसे व्यावहारिक समाधान है।

संपादकीय दृष्टिकोण

लेकिन मुख्यधारा की स्वास्थ्य चर्चा अक्सर दवाओं और सर्जरी पर केंद्रित रहती है। योग जैसे निवारक उपायों को पर्याप्त संस्थागत समर्थन नहीं मिलता, जबकि आयुष मंत्रालय जैसी सरकारी संस्थाएं इन्हें प्रमाणित करती हैं। असली ज़रूरत यह है कि कार्यस्थलों पर 'वेलनेस ब्रेक' को नीतिगत रूप से अनिवार्य किया जाए — केवल जागरूकता अभियानों से काम नहीं चलेगा।
RashtraPress
9 सितंबर 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

कमर दर्द और गर्दन की अकड़न के लिए कौन से योगासन सबसे प्रभावी हैं?
मार्जारीआसन, भुजंगासन, सेतुबंधासन और त्रिकोणासन कमर दर्द और गर्दन की अकड़न के लिए विशेष रूप से प्रभावकारी माने जाते हैं। ये आसन रीढ़ की हड्डी को खिंचाव देते हैं, मांसपेशियों को मज़बूत करते हैं और रक्त प्रवाह बेहतर करते हैं।
क्या ये योगासन रोज़ाना करना सुरक्षित है?
सामान्य स्वास्थ्य वाले लोगों के लिए इन आसनों का रोज़ाना अभ्यास सुरक्षित माना जाता है, बशर्ते सही तकनीक अपनाई जाए। हालाँकि, यदि किसी को गंभीर स्पाइन की समस्या है, तो किसी प्रशिक्षित योग प्रशिक्षक या चिकित्सक की देखरेख में अभ्यास करने की सलाह दी जाती है।
आयुष मंत्रालय ने रीढ़ के लिए कौन सा आसन अनुशंसित किया है?
आयुष मंत्रालय के अनुसार अर्ध चक्रासन (हाफ व्हील पोज़) रीढ़ की हड्डी के लचीलेपन और फेफड़ों की कार्यप्रणाली में सुधार के लिए अत्यधिक प्रभावी है। यह बैकबेंडिंग आसन रीढ़ पर सकारात्मक दबाव डालकर उसके लचीलेपन को बढ़ाता है।
दफ्तर में काम करने वाले लोगों के लिए कौन सा योगासन सबसे उपयुक्त है?
लंबे समय तक बैठकर काम करने वाले लोगों के लिए वक्रासन, अर्ध उष्ट्रासन और मार्जारीआसन विशेष रूप से उपयुक्त माने जाते हैं। ये आसन रीढ़ की कड़ापन दूर करते हैं, कंधे झुकने की समस्या से राहत देते हैं और शरीर की मुद्रा सुधारते हैं।
शशकासन और सेतुबंधासन में क्या अंतर है?
शशकासन में रीढ़ पर आगे की ओर खिंचाव पड़ता है और पेट के निचले हिस्से में रक्त प्रवाह बेहतर होता है, जबकि सेतुबंधासन (ब्रिज पोज़) में कूल्हों को ऊपर उठाकर पीठ और रीढ़ की निचली मांसपेशियों को मज़बूत किया जाता है। दोनों आसन रीढ़ को लचीला और तनावमुक्त बनाने में सहायक हैं।
राष्ट्र प्रेस
सिलसिला

जुड़े बिंदु

इस ख़बर के पीछे की कड़ियाँ — सबसे नई पहले।

8 बिंदु
  1. नवीनतम 1 सप्ताह पहले
  2. 3 महीने पहले
  3. 4 महीने पहले
  4. 4 महीने पहले
  5. 4 महीने पहले
  6. 10 महीने पहले
  7. 10 महीने पहले
  8. 1 साल पहले