क्या 2026 गणतंत्र दिवस परेड में नई परंपरा देखने को मिलेगी?
सारांश
Key Takeaways
- नई परंपरा: दर्शक दीर्घाओं का नाम प्रमुख नदियों पर रखा जाएगा।
- सैन्य प्रदर्शन: लड़ाकू विमानों का बड़ा प्रदर्शन होगा।
- भैरव बटालियन: पहली बार नई बटालियन कर्तव्य पथ पर मार्च करेगी।
नई दिल्ली, 16 जनवरी (राष्ट्र प्रेस)। 2026 की गणतंत्र दिवस परेड में एक नई परंपरा का आगाज़ होने जा रहा है, जिसमें दर्शकों के बैठने के स्थानों को एक विशेष थीम के अनुसार परिवर्तित किया गया है। पहली बार, परेड के मार्ग पर स्थित दर्शक दीर्घाओं को सिर्फ संख्याओं से नहीं, बल्कि देश की प्रमुख नदियों के नाम पर पहचाना जाएगा।
पहले इन स्थानों की पहचान केवल संख्याओं के माध्यम से होती थी। अब इन दीर्घाओं का नाम यमुना, ब्यास, ब्रह्मपुत्र, गंगा, तीस्ता, चंबल, सतलुज, सोन, चिनाब, रावी, वैगई, पेरियार, गंडक, पेन्नार, नर्मदा, घाघरा, गोदावरी, कृष्णा, महानदी, सिंधु, कोसी, झेलम और कावेरी जैसी नदियों पर रखा जाएगा।
ये नदियां देश के विभिन्न क्षेत्रों और राज्यों से होकर गुजरती हैं और स्थानीय जनसंख्या के लिए जीवनरेखा का कार्य करती हैं। सदियों से, ये नदियां हमारी सभ्यता, अर्थव्यवस्था और संस्कृति को आकार देती आई हैं।
इस गणतंत्र दिवस पर, 'ऑपरेशन सिंदूर' में महत्वपूर्ण भूमिका निभाने वाले लड़ाकू विमानों का प्रदर्शन भी होगा। मुख्य आकर्षण में एक विशेष 'सिंदूर' फॉर्मेशन शामिल होगा, जो इस ऑपरेशन की सफलता और संकल्प का प्रतीक होगा। राफेल, सुखोई, जगुआर और मिग-29 जैसे एक दर्जन से अधिक लड़ाकू विमान कर्तव्य पथ पर उड़ान भरेंगे। इसके अलावा, अन्य फॉर्मेशन भी इस भव्य हवाई प्रदर्शन का हिस्सा होंगे।
पहली बार, भारतीय सेना की नई 'भैरव बटालियन' कर्तव्य पथ पर मार्च करेगी और सुप्रीम कमांडर को सलामी देगी। 'ऑपरेशन सिंदूर' की सफलता के बाद, सेना प्रमुख जनरल उपेंद्र द्विवेदी ने कारगिल से इन नई लाइट कमांडो बटालियनों के गठन की घोषणा की थी।
अधिकारियों के अनुसार, पांच भैरव बटालियन पहले से बन चुकी हैं। सेना की योजना है कि अगले छह महीने में कुल 25 ऐसी बटालियन बनाई जाएं। प्रत्येक बटालियन में लगभग 250 बेहतरीन सैनिक होते हैं, जिन्हें तेज, अचानक और प्रभावी ऑपरेशनों के लिए प्रशिक्षित किया जाता है।