क्या सुप्रीम कोर्ट ने मुकुल रॉय की विधायकी को लेकर कलकत्ता हाईकोर्ट के आदेश पर अंतरिम रोक लगाई?

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क्या सुप्रीम कोर्ट ने मुकुल रॉय की विधायकी को लेकर कलकत्ता हाईकोर्ट के आदेश पर अंतरिम रोक लगाई?

सारांश

सुप्रीम कोर्ट ने मुकुल रॉय की विधायकी के मामले में कलकत्ता हाईकोर्ट के आदेश पर रोक लगाई है। क्या यह फैसला राजनीतिक गतिरोध को और बढ़ाएगा? जानिए इस महत्वपूर्ण मामले के सभी पहलुओं के बारे में।

Key Takeaways

  • सुप्रीम कोर्ट का निर्णय महत्वपूर्ण राजनीतिक परिणाम ला सकता है।
  • मुकुल रॉय की विधायकी पर रोक से राजनीतिक हलचल बढ़ सकती है।
  • दलबदल के मुद्दे पर न्यायपालिका की भूमिका पर सवाल उठ सकते हैं।

नई दिल्ली, 16 जनवरी (राष्ट्र प्रेस)। सुप्रीम कोर्ट ने शुक्रवार को पश्चिम बंगाल के टीएमसी नेता मुकुल रॉय को पश्चिम बंगाल विधानसभा की सदस्यता से अयोग्य घोषित करने के कलकत्ता हाईकोर्ट के आदेश पर रोक लगा दी है।

मुख्य न्यायाधीश सूर्यकांत और जस्टिस जॉयमाल्या बागची की पीठ ने यह अंतरिम आदेश मुकुल रॉय के पुत्र शुभ्रांशु रॉय द्वारा दायर याचिका पर नोटिस जारी करते हुए दिया। कोर्ट ने निर्देश दिया कि हाईकोर्ट के फैसले के प्रभाव को अगली सुनवाई तक स्थगित रखा जाएगा।

मुकुल रॉय ने 2021 के विधानसभा चुनाव में कृष्णानगर नॉर्थ सीट से भाजपा के टिकट पर जीत दर्ज की थी, लेकिन चुनाव के बाद वे तृणमूल कांग्रेस (टीएमसी) में शामिल हो गए। इसके आधार पर भाजपा के नेता प्रतिपक्ष सुवेंदु अधिकारी और विधायक अंबिका रॉय ने मुकुल रॉय के खिलाफ दलबदल याचिकाएं दाखिल की थीं। हालांकि विधानसभा अध्यक्ष ने इन याचिकाओं को खारिज कर दिया था, जिसके बाद सुवेंदु अधिकारी ने कलकत्ता हाईकोर्ट का रुख किया। हाईकोर्ट ने अध्यक्ष के फैसले को पलटते हुए मुकुल रॉय को अयोग्य घोषित कर दिया था।

टीएमसी नेता मुकुल रॉय के बेटे शुभ्रांशु की याचिका पर सुप्रीम कोर्ट ने सुवेंदु अधिकारी, अंबिका रॉय और विधानसभा सचिवालय को नोटिस जारी किया है, जिन्हें चार हफ्ते में जवाब देना है।

मुकुल रॉय की ओर से एडवोकेट प्रीतिका द्विवेदी ने दलील दी कि हाईकोर्ट ने सीमित न्यायिक समीक्षा की सीमा का उल्लंघन करते हुए सीधे विधायक को अयोग्य घोषित कर दिया, जो उसके अधिकार क्षेत्र से बाहर है। उन्होंने यह भी बताया कि मुकुल रॉय की तबीयत खराब होने के कारण उनके बेटे ने याचिका दायर की है।

कोलकाता हाईकोर्ट ने 13 नवंबर को मुकुल रॉय का विधायक पद रद्द कर दिया था। हाईकोर्ट ने विधानसभा स्पीकर द्वारा उन्हें लोक लेखा समिति (पीएसी) का अध्यक्ष बनाने के फैसले को भी खारिज कर दिया था।

जस्टिस देबांगसु बसाक और जस्टिस शब्बर रशीदी की बेंच ने विपक्ष के नेता सुवेंदु अधिकारी की याचिका पर सुनवाई करते हुए यह फैसला सुनाया था। कोर्ट ने कहा, "दलबदल की तारीख से ही अयोग्यता लागू होती है। संवैधानिक पदाधिकारियों को समय पर फैसला लेना चाहिए, वरना लोकतंत्र खतरे में पड़ जाता।"

Point of View

बल्कि यह संवैधानिक प्रक्रियाओं की भी परीक्षा है। सुप्रीम कोर्ट का यह फैसला न्यायपालिका की स्वतंत्रता और विधायिका के बीच संतुलन को बनाए रखने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम है।
NationPress
16/01/2026

Frequently Asked Questions

सुप्रीम कोर्ट ने किस मामले में रोक लगाई है?
सुप्रीम कोर्ट ने मुकुल रॉय की विधायकी को लेकर कलकत्ता हाईकोर्ट के आदेश पर रोक लगाई है।
मुकुल रॉय किस पार्टी के नेता हैं?
मुकुल रॉय तृणमूल कांग्रेस (टीएमसी) के नेता हैं।
सुप्रीम कोर्ट का अगला कदम क्या होगा?
सुप्रीम कोर्ट ने हाईकोर्ट के फैसले को अगली सुनवाई तक स्थगित रखा है।
मुकुल रॉय की विधायकी को लेकर क्या आरोप हैं?
उन पर दलबदल का आरोप है, क्योंकि उन्होंने भाजपा से टीएमसी में शामिल होने का निर्णय लिया।
क्या कोर्ट ने किसी और को नोटिस भेजा है?
हां, कोर्ट ने सुवेंदु अधिकारी, अंबिका रॉय और विधानसभा सचिवालय को नोटिस जारी किया है।
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