क्या 3 जनवरी 2026 का पंचांग विशेष है? शनिवार को भद्रा का साया नहीं रहेगा?
सारांश
Key Takeaways
- 3 जनवरी 2026 का दिन धार्मिक दृष्टि से महत्वपूर्ण है।
- पौष पूर्णिमा पर स्नान का विशेष महत्व है।
- इस दिन भद्रा का साया नहीं रहेगा।
- शुभ मुहूर्त का समय जानें।
- पूर्व दिशा की यात्रा से बचें।
नई दिल्ली, 2 जनवरी (राष्ट्र प्रेस)। 3 जनवरी 2026, शनिवार का दिन धार्मिक दृष्टि से अत्यधिक महत्वपूर्ण है। इस दिन शुक्ल पक्ष की पूर्णिमा तिथि है। पौष–माघ की यह पूर्णिमा शाकम्भरी पूर्णिमा के नाम से भी जानी जाती है। यह दिन मासिक पर्वों के संदर्भ में विशेष माना जाता है।
इस दिन स्नान का अत्यधिक महत्व है। पौष माघ की पूर्णिमा पर पवित्र नदी में स्नान करने से पापों और कष्टों की मुक्ति होती है और पितृ पक्ष को भी शांति मिलती है। शनिवार के दिन पौष माघ पूर्णिमा का समय दोपहर 3 बजकर 32 मिनट तक रहेगा, उसके बाद प्रतिपदा लग जाएगी। इस दिन भद्रा का साया नहीं रहेगा। आइए जानते हैं कि शनिवार, 3 जनवरी को शुभ और अशुभ मुहूर्त कब तक रहेंगे।
शुभ मुहूर्त की बात करें तो अभिजित मुहूर्त दोपहर 12 बजकर 5 मिनट से लेकर 12 बजकर 46 मिनट तक रहेगा। गोधूलि मुहूर्त शाम 5 बजकर 34 मिनट से लेकर 6 बजकर 2 मिनट तक रहेगा। अमृत काल मुहूर्त सुबह 8 बजकर 33 मिनट से लेकर 9 बजकर 58 मिनट तक रहेगा। विजय मुहूर्त दोपहर 2 बजकर 9 मिनट से लेकर 2 बजकर 51 मिनट तक रहेगा। ब्रह्म मुहूर्त सुबह 5 बजकर 25 मिनट से लेकर 6 बजकर 20 मिनट तक रहेगा।
अशुभ मुहूर्त की चर्चा करें तो इस दिन भद्रा का साया नहीं रहेगा, जबकि राहुकाल सुबह 9 बजकर 50 मिनट से लेकर 11 बजकर 8 मिनट तक रहेगा। गुलिक काल सुबह 7 बजकर 14 मिनट से लेकर 8 बजकर 32 मिनट तक रहेगा, वहीं यमगण्ड काल दोपहर 1 बजकर 43 मिनट से लेकर 3 बजकर 1 मिनट तक रहेगा। दुर्मुहूर्त सुबह 7 बजकर 14 मिनट से लेकर 7 बजकर 56 मिनट तक रहेगा। आडल योग शाम 5 बजकर 27 मिनट से लेकर 4 जनवरी की सुबह 7 बजकर 15 मिनट तक रहेगा।
शनिवार को सूर्योदय सुबह 7 बजकर 14 मिनट पर होगा, जबकि सूर्यास्त शाम 5 बजकर 37 मिनट पर होगा। चन्द्रोदय की बात करें तो वह शाम 5 बजकर 28 मिनट पर होगा और अगले दिन यानी 4 जनवरी तक रहेगा। शनिवार के दिन दिशाशूल पूर्व दिशा में रहेगा, इसलिए पूर्व दिशा की यात्रा से बचें।