गुजरात फैक्ट्री विवाद: 'आप' विधायक चैतर वसावा पर मारपीट के आरोप, भाजपा सांसद बोले — 'फिर भेजेंगे जेल'

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गुजरात फैक्ट्री विवाद: 'आप' विधायक चैतर वसावा पर मारपीट के आरोप, भाजपा सांसद बोले — 'फिर भेजेंगे जेल'

सारांश

गुजरात के भरूच जिले में केमिकल फैक्ट्री आग हादसे में दो मजदूरों की मौत के बाद 'आप' विधायक चैतर वसावा पर पीड़ित परिवार से मारपीट का आरोप लगा है। भाजपा सांसद धवल पटेल ने जमानत शर्त उल्लंघन का हवाला देते हुए विधायक को जेल भेजने की चेतावनी दी है।

Key Takeaways

  • 23 अप्रैल को झगड़िया जीआईडीसी की केमिकल फैक्ट्री में आग लगने से १६ मजदूर घायल हुए और दो की मौत हो गई।
  • आप विधायक चैतर वसावा पर आरोप है कि उन्होंने मृतक राकेश वसावा के चचेरे भाई रोशन वसावा के साथ मारपीट की।
  • भाजपा सांसद धवल पटेल ने दावा किया कि विधायक ने अदालत की जमानत शर्तों का उल्लंघन किया है।
  • फैक्ट्री कंपनी ने मृतकों के परिवारों को ₹15 लाख मुआवजे की पेशकश की, लेकिन घायल मजदूरों के लिए कोई सहायता नहीं।
  • विधायक ने आरोप खारिज करते हुए कहा कि वे पीड़ितों के बुलावे पर न्याय दिलाने गए थे।

गांधीनगर, 27 अप्रैल। गुजरात के भरूच जिले में झगड़िया जीआईडीसी औद्योगिक क्षेत्र की एक केमिकल फैक्ट्री में हुए हादसे के बाद अब राजनीतिक विवाद गहरा गया है। आम आदमी पार्टी (आप) के विधायक चैतर वसावा पर आरोप है कि उन्होंने एक आदिवासी पीड़ित परिवार के सदस्य के साथ मारपीट की। भाजपा सांसद धवल पटेल ने यह आरोप लगाते हुए कहा कि विधायक अदालत की शर्तों पर जमानत पर हैं और उन्होंने उन शर्तों का उल्लंघन किया है।

मुख्य घटनाक्रम: फैक्ट्री हादसे से शुरू हुआ विवाद

यह पूरा मामला 23 अप्रैल को झगड़िया जीआईडीसी स्थित एक केमिकल फैक्ट्री में लगी भीषण आग से शुरू हुआ, जिसमें १६ मजदूर घायल हुए थे। बाद में उपचार के दौरान दो मजदूरों की मौत हो गई, जिनमें राकेश वसावा भी शामिल थे। कुछ मजदूर 80 प्रतिशत तक जल चुके हैं और अभी भी गंभीर हालत में बताए जा रहे हैं।

हादसे के अगले दिन राकेश वसावा के चचेरे भाई रोशन वसावा मुआवजे की बातचीत के लिए फैक्ट्री पहुंचे। इसी बीच विधायक चैतर वसावा अपने समर्थकों और कुछ घायल मजदूरों के परिजनों के साथ मौके पर आ गए और अधिक मुआवजे की मांग करने लगे।

वायरल वीडियो और हाथापाई का आरोप

सोशल मीडिया पर वायरल एक वीडियो में फैक्ट्री गेट के पास विधायक चैतर वसावा और रोशन वसावा के बीच तीखी बहस होती दिखती है, जो कथित तौर पर हाथापाई में बदल गई। उल्लेखनीय है कि इस दौरान पुलिस अधिकारी भी मौके पर मौजूद थे, लेकिन झगड़े को रोकने के लिए अन्य लोगों को बीच-बचाव करना पड़ा।

रोशन वसावा ने आरोप लगाया, ''चैतर वसावा यहां लोगों को भड़काने आए थे। वे हमारी मदद के लिए नहीं, बल्कि पैसे निकालने आए थे। मैं किसी राजनीतिक पार्टी से जुड़ा नहीं हूं — मैं सिर्फ अपने परिवार के लिए यहां आया था।'' उन्होंने यह भी स्पष्ट किया कि पुलिस ने उन पर किसी तरह का दबाव नहीं डाला।

भाजपा सांसद की कड़ी प्रतिक्रिया

भाजपा सांसद धवल पटेल ने कहा कि विधायक चैतर वसावा के खिलाफ पहले से कई गंभीर आपराधिक मामले दर्ज हैं और वे शर्तों के साथ जमानत पर बाहर हैं। उन्होंने कहा, ''उन्होंने अदालत की शर्तों का उल्लंघन किया है और हम उन्हें फिर से जेल भेजने की पूरी कोशिश करेंगे।''

पटेल ने यह भी आरोप लगाया कि सरकार और पुलिस पहले से ही मुआवजे को लेकर बातचीत कर रही थी, तभी विधायक ने हस्तक्षेप किया और जोर दिया कि मध्यस्थता केवल उन्हीं के जरिए होनी चाहिए। आलोचकों का कहना है कि यह राजनीतिक हस्तक्षेप पीड़ित परिवारों के हित में नहीं था।

विधायक का पक्ष: 'न्याय दिलाने गया था'

विधायक चैतर वसावा ने सभी आरोपों को सिरे से खारिज करते हुए कहा कि वे पीड़ित परिवारों के बुलाने पर वहां गए थे। उनका कहना था कि फैक्ट्री प्रबंधन पीड़ित परिवारों से बातचीत करने से इनकार कर रहा था। उन्होंने बताया कि कंपनी ने मृतकों के परिजनों को ₹15 लाख मुआवजे की पेशकश की है, लेकिन घायल मजदूरों के लिए कोई सहायता नहीं दी गई।

विधायक ने कहा कि विवाद उनकी वजह से नहीं, बल्कि ''कुछ बाहरी लोगों के कारण'' हुआ जिनका पीड़ित परिवारों से कोई संबंध नहीं था और जिन्होंने जानबूझकर बहस शुरू की।

आम जनता और मजदूरों पर असर

यह घटना ऐसे समय में आई है जब गुजरात के औद्योगिक क्षेत्रों में मजदूर सुरक्षा को लेकर पहले से सवाल उठते रहे हैं। गौरतलब है कि झगड़िया जीआईडीसी जैसे इलाकों में काम करने वाले अधिकांश मजदूर आदिवासी समुदाय से हैं, जो पहले से ही आर्थिक रूप से कमजोर हैं। राजनीतिक हस्तक्षेप से उनके उचित मुआवजे की प्रक्रिया प्रभावित हो सकती है।

अब सभी की नजरें इस बात पर हैं कि पुलिस विधायक की जमानत शर्तों के उल्लंघन के मामले में क्या कदम उठाती है और पीड़ित परिवारों को न्याय कब और कैसे मिलेगा।

Point of View

तो हाथापाई क्यों नहीं रोकी गई? मुख्यधारा की कवरेज सिर्फ 'विधायक बनाम सांसद' की लड़ाई दिखा रही है, लेकिन असली मुद्दा है — 80 प्रतिशत जले मजदूरों का मुआवजा और फैक्ट्री की जवाबदेही। राजनीतिक दल चाहे जो भी दावा करें, पीड़ित परिवारों को न्याय दिलाने की जिम्मेदारी सरकार और प्रशासन की है, न कि किसी विधायक की व्यक्तिगत 'मध्यस्थता' की।
NationPress
29/04/2026

Frequently Asked Questions

गुजरात फैक्ट्री हादसे में क्या हुआ था?
23 अप्रैल को भरूच जिले के झगड़िया जीआईडीसी में एक केमिकल फैक्ट्री में आग लगी, जिसमें १६ मजदूर घायल हुए और बाद में दो की मौत हो गई। कुछ मजदूर 80 प्रतिशत तक जल गए थे।
'आप' विधायक चैतर वसावा पर क्या आरोप है?
कथित तौर पर विधायक चैतर वसावा ने फैक्ट्री गेट पर मृतक मजदूर के परिजन रोशन वसावा के साथ मारपीट की। यह वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल हुआ है।
भाजपा सांसद धवल पटेल ने क्या कहा?
धवल पटेल ने कहा कि विधायक चैतर वसावा पहले से कई आपराधिक मामलों में जमानत पर हैं और उन्होंने अदालत की शर्तों का उल्लंघन किया है। उन्होंने विधायक को फिर से जेल भेजने की चेतावनी दी।
पीड़ित मजदूर परिवारों को कितना मुआवजा मिला?
फैक्ट्री कंपनी ने मृतकों के परिवारों को ₹15 लाख मुआवजे की पेशकश की है। हालांकि, घायल मजदूरों के लिए अभी तक कोई मुआवजा या सहायता नहीं दी गई है।
विधायक चैतर वसावा ने अपने बचाव में क्या कहा?
विधायक ने कहा कि वे पीड़ित परिवारों के बुलाने पर न्याय दिलाने गए थे और फैक्ट्री प्रबंधन परिवारों से बात नहीं कर रहा था। उन्होंने दावा किया कि विवाद बाहरी लोगों ने शुरू किया।
Nation Press