क्या तृणमूल कांग्रेस या बंगाल की जनता अपनी रीढ़ बेचना नहीं जानती? अभिषेक बनर्जी का दावा
सारांश
Key Takeaways
- केंद्र में बदलाव की आवश्यकता है।
- बंगाल की जनता अपनी रीढ़ नहीं बेचेगी।
- भाजपा के बंगाली संस्कृति में घुलने के प्रयासों की आलोचना।
- सरकारी एजेंसियों का दुरुपयोग।
- बंगाल की मिट्टी का महत्व।
कोलकाता, 18 जनवरी (राष्ट्रीय प्रेस)। तृणमूल कांग्रेस के नेता अभिषेक बनर्जी ने रविवार को भाजपा पर तीखा हमला किया। उन्होंने बताया कि केंद्र में सरकार के परिवर्तन की आवश्यकता है। डायमंड हार्बर से सांसद का यह स्पष्ट संदेश था कि बंगाल को नहीं, बल्कि दिल्ली के 'जमींदारों' को बदलने की जरूरत है।
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने पश्चिम बंगाल सरकार को नए नारे 'परिवर्तन की आवश्यकता है, हमें भाजपा सरकार चाहिए' से निशाना बनाया है।
अभिषेक बनर्जी ने इस बयान का उत्तर देने के लिए 'हथियार' का उपयोग किया।
नादिया जिले के छपरा क्षेत्र में एक रोड शो को संबोधित करते हुए बनर्जी ने कहा कि नरेंद्र मोदी कहते हैं कि बदलाव की आवश्यकता है। असल में, वे बंगाल के लोगों को बदलना चाहते हैं। उन्होंने सोचा कि बंगाल के हक के फंड को रोककर, लोगों को भूखा रखकर और परेशान करके आप उन्हें झुकने पर मजबूर कर देंगे। लेकिन ध्यान रखें, तृणमूल कांग्रेस या बंगाल की जनता अपनी रीढ़ नहीं बेचेगी। हम जमींदारों या दिल्ली के बाहरी लोगों के सामने नहीं झुकेंगे।
इसी बीच, बनर्जी ने भाजपा नेताओं द्वारा बंगाली संस्कृति में घुलने की कोशिशों की कड़ी निंदा की। उन्होंने कहा कि बदलाव की शुरुआत तो आपने खुद की है। जो नेता पहले बंगाल आकर अपने भाषणों की शुरुआत 'जय श्री राम' से करते थे, अब 'जय मां काली' बोल रहे हैं। उन्हें अपने नारे बदलने पड़े। अब देखिए, विधानसभा चुनाव के बाद प्रधानमंत्री मोदी भी बंगाल आकर 'जय बांग्ला' का नारा लगाएंगे। वास्तव में, बंगाल की मिट्टी आपको बदल रही है।
इस बीच, तृणमूल कांग्रेस के नेता ने एक बार फिर केंद्र सरकार द्वारा अपने पार्टी नेताओं के खिलाफ सरकारी एजेंसियों के दुरुपयोग और वंचितता के मामलों पर आवाज उठाई।
उन्होंने आरोप लगाया कि केंद्र सरकार पिछले पांच वर्षों से बंगाल की जनता पर क्रूर अत्याचार कर रही है। ईडी और सीबीआई का उपयोग करके नेताओं को परेशान किया जा रहा है।