क्या आचार्य प्रशांत का पटना दौरा लाखों लोगों को प्रभावित कर सकता है?

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क्या आचार्य प्रशांत का पटना दौरा लाखों लोगों को प्रभावित कर सकता है?

सारांश

पटना में आचार्य प्रशांत का संवाद अद्वितीय रहा। लगभग पांच हजार श्रोताओं ने उनकी बातों को सुना और पुस्तक हस्ताक्षर के लिए लंबी कतारें लगीं। युवा पीढ़ी को आत्मनिर्भरता की ओर प्रेरित करने के साथ-साथ उन्होंने समाज में व्याप्त अंधविश्वास पर भी चर्चा की।

Key Takeaways

  • आचार्य प्रशांत ने युवा पीढ़ी को आत्मनिर्भर बनने की प्रेरणा दी।
  • उन्होंने समाज में व्याप्त अंधविश्वास की आलोचना की।
  • कार्यक्रम में पाँच हजार से अधिक लोग शामिल हुए।

पटना, 16 जनवरी (राष्ट्र प्रेस)। 16 जनवरी को गांधी मैदान के समीप स्थित ऐतिहासिक बापू सभागार में आचार्य प्रशांत का पहला पटना संवाद अद्वितीय रहा। यह कार्यक्रम निर्धारित समय से कहीं अधिक चला और लगभग चार घंटे बाद समाप्त हुआ। कड़ाके की ठंड के बावजूद देर रात तक लगभग पाँच हज़ार श्रोता अपनी जगह पर बैठे रहे। सत्र समाप्त होने के बाद पुस्तक हस्ताक्षर के लिए किलोमीटर लंबी कतार लगी, जो आधी रात के बाद तक जारी रही। हज़ारों श्रोताओं ने उनकी 'ट्रूथ विदाउट अपोलॉजी' व अन्य पुस्तकों पर हस्ताक्षर लिए।

यह आचार्य प्रशांत का पटना में पहला सार्वजनिक कार्यक्रम था। बिहार के विभिन्न जिलों के अलावा झारखंड, उत्तर प्रदेश और नेपाल से भी श्रोता पहुंचे थे। पाँच हज़ार की क्षमता वाला सभागार खचाखच भरा हुआ था। आयोजकों ने बताया कि हाल के समय में इस प्रकार का स्वागत उन्होंने शायद ही कभी देखा है।

आचार्य प्रशांत आईआईटी दिल्ली और आईआईएम अहमदाबाद के पूर्व छात्र हैं, सिविल सेवा परीक्षा उत्तीर्ण कर चुके हैं, और 160 से अधिक पुस्तकों के लेखक हैं। वे प्रशांतअद्वैत फाउंडेशन के संस्थापक हैं। गीता, उपनिषद, बौद्ध ग्रंथों व अन्य भारतीय व पश्चिमी ग्रंथों पर उनके शिक्षण कार्यक्रम में वर्तमान में डेढ़ लाख से अधिक प्रतिभागी जुड़े हुए हैं।

2025 में आईआईटी दिल्ली एलुमनाई एसोसिएशन ने उन्हें "आउटस्टैंडिंग कॉन्ट्रिब्यूशन फॉर नेशनल डेवलपमेंट" (ओसीएनडी) पुरस्कार से सम्मानित किया था।

सत्र के दौरान आचार्य प्रशांत ने वेदांत और स्त्रीवर्ग के संबंध पर विस्तार से बात की। उन्होंने वेदांत को स्त्री का मित्र बताते हुए कहा कि जो दर्शन देह भाव से मुक्त करता हो, वही स्त्री को वास्तविक स्वतंत्रता दे सकता है। उनके अनुसार महिलाओं की दुर्दशा का मूल कारण अशिक्षा और धार्मिक अंधविश्वास हैं। उन्होंने मंदिर प्रवेश आंदोलनों और स्वतंत्रता संग्राम का उल्लेख करते हुए सनातन धर्म के मूल अर्थ पर बात की। उनके अनुसार धर्म के नाम पर स्त्री के साथ जो भेदभाव हुआ, वह धर्म का नहीं, उसके विकृत रूप का दोष है।

अपने संबोधन में आचार्य प्रशांत ने पूर्वांचल से अपने जुड़ाव का उल्लेख करते हुए स्वयं को जितना उत्तर प्रदेश का, उतना ही बिहार का बताया। उन्होंने पुस्तकालयों और कैफे में पढ़ते-लिखते युवाओं को बदलते बिहार का संकेत बताया। युवाओं से उनका आग्रह था कि वे केवल सरकारी नौकरियों की दौड़ तक सीमित न रहें और आत्मनिर्भरता की ओर बढ़ें। उन्होंने कहा कि दूसरों पर निर्भरता मनुष्य की सबसे बड़ी कमजोरी है, चाहे वह विचारों के स्तर पर हो या निर्णयों में।

सत्र के बाद राष्ट्र प्रेस सहित राष्ट्रीय और क्षेत्रीय मीडिया संस्थानों ने आचार्य प्रशांत से बातचीत की। इस दौरान उन्होंने भारतीय संविधान पर अपने विचार रखे। उनका कहना था कि संविधान में निहित मूल्य, जैसे स्वतंत्रता, समानता, बंधुत्व और न्याय, वेदांत की शिक्षाओं से मेल खाते हैं। उन्होंने कहा कि इन मूल्यों को बाहर से आयात करने की आवश्यकता नहीं, आवश्यकता इन्हें समझने और जीवन में उतारने की है।

अगले दिन 17 जनवरी को आचार्य प्रशांत आईआईटी पटना परिसर पहुंचे। यह गत कुछ महीनों का उनका आठवां आईआईटी संबोधन था। हाल ही में वे आईआईटी दिल्ली, गोवा, हैदराबाद, खड़गपुर, मद्रास, मुंबई और भुवनेश्वर में बोल चुके हैं। अगले एक माह में पाँच अन्य आईआईटी कैंपस में भी उनका संभाषण आयोजित है।

सत्र की शुरुआत कठोपनिषद के एक श्लोक से हुई। आचार्य प्रशांत ने कहा कि धर्म के तथाकथित ठेकेदारों ने शास्त्रों की त्रुटिपूर्ण व्याख्या से समाज को भ्रमित किया है। उनके अनुसार भगवद्गीता कोई पूजा-पाठ की पुस्तक नहीं, बल्कि सही जीवन जीने का व्यावहारिक विज्ञान है। प्रश्नोत्तर सत्र में एक छात्र ने जलवायु परिवर्तन और उपभोग की प्रवृत्ति पर सवाल उठाया। एक अन्य छात्र ने शारीरिक आकर्षण और विद्यार्थी जीवन में आत्मनियंत्रण पर खुलकर प्रश्न रखा। आचार्य प्रशांत ने इन प्रश्नों का उत्तर सीधे तरीके से दिया। यह सत्र भी पुस्तक हस्ताक्षर के साथ समाप्त हुआ, जिसमें उपस्थित छात्रों व अन्य ने उत्साह के साथ भाग लिया।

बापू सभागार में आम श्रोता और आईआईटी पटना में तकनीकी छात्र, दो भिन्न दर्शक वर्गों के साथ लगातार दो दिन के इन कार्यक्रमों में उल्लेखनीय उपस्थिति दर्ज की गई। आचार्य प्रशांत अब 18 जनवरी को आईआईटी दिल्ली में छात्रों को संबोधित करेंगे।

Point of View

NationPress
18/01/2026

Frequently Asked Questions

आचार्य प्रशांत का पटना दौरा कब हुआ?
आचार्य प्रशांत का पटना दौरा 16 जनवरी को हुआ।
कितने लोग इस कार्यक्रम में शामिल हुए?
इस कार्यक्रम में लगभग पाँच हजार लोग शामिल हुए।
आचार्य प्रशांत ने किस विषय पर चर्चा की?
उन्होंने वेदांत, स्त्रीवर्ग और आत्मनिर्भरता पर चर्चा की।
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