31 अगस्त 2026
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गौतम अदाणी बोले: खावड़ा, मुंद्रा और विझिंजम जैसे मेगा प्रोजेक्ट बदलते हैं पूरी क्षेत्रीय अर्थव्यवस्था

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गौतम अदाणी बोले: खावड़ा, मुंद्रा और विझिंजम जैसे मेगा प्रोजेक्ट बदलते हैं पूरी क्षेत्रीय अर्थव्यवस्था

सारांश

गौतम अदाणी का संदेश साफ था — बड़े इन्फ्रास्ट्रक्चर प्रोजेक्ट सिर्फ ईंट-पत्थर नहीं होते, वे पूरे इकोसिस्टम की नींव रखते हैं। मुंद्रा का दलदल आज देश का सबसे बड़ा बंदरगाह है, विझिंजम ने 25 साल की उपेक्षा तोड़ी, और खावड़ा भारत की AI अर्थव्यवस्था की ऊर्जा-रीढ़ बन सकता है।

मुख्य बातें

गौतम अदाणी ने 31 अगस्त को केयरएज ग्रुप के वार्षिक समिट में कहा कि बड़े प्रोजेक्ट आसपास की अर्थव्यवस्था में व्यापक बदलाव लाते हैं।
मुंद्रा पोर्ट तीन दशक पहले दलदली इलाका था, आज भारत का सबसे बड़ा बंदरगाह और एक विशाल औद्योगिक इकोसिस्टम का केंद्र है।
विझिंजम पोर्ट को 25 वर्षों तक निवेशकों ने नजरअंदाज किया; भारत को सिंगापुर, दुबई और कोलंबो से ट्रांसशिपमेंट पर निर्भर रहना पड़ता था।
खावड़ा रिन्यूएबल एनर्जी पार्क को अदाणी ने भारत की एआई अर्थव्यवस्था और कंप्यूट इन्फ्रास्ट्रक्चर की ऊर्जा-नींव बताया।
अदाणी ने रेटिंग एजेंसियों से आग्रह किया कि उनके फ्रेमवर्क भारत की बढ़ती इन्फ्रास्ट्रक्चर जटिलता के अनुरूप विकसित हों।

अदाणी ग्रुप के चेयरमैन गौतम अदाणी ने सोमवार, 31 अगस्त को स्पष्ट किया कि खावड़ा रिन्यूएबल एनर्जी पार्क, मुंद्रा पोर्ट और विझिंजम पोर्ट जैसे बड़े इन्फ्रास्ट्रक्चर प्रोजेक्ट महज क्षमता विस्तार तक सीमित नहीं हैं — ये अपने आसपास की पूरी अर्थव्यवस्था को नए सिरे से गढ़ते हैं। केयरएज ग्रुप के वार्षिक समिट में दिए गए संबोधन में उन्होंने रेटिंग फ्रेमवर्क को भारत की बदलती इन्फ्रास्ट्रक्चर महत्वाकांक्षाओं के अनुरूप विकसित करने की जरूरत पर जोर दिया।

भारत का बदला हुआ इन्फ्रास्ट्रक्चर परिदृश्य

गौतम अदाणी ने कहा कि भारत अब एक बिल्कुल अलग दौर में आ गया है। इन्फ्रास्ट्रक्चर का स्वरूप बदल गया है और भारत जो कुछ भी बना रहा है, उसकी जटिलता के साथ-साथ रेटिंग फ्रेमवर्क की जटिलता भी विकसित होनी चाहिए। उन्होंने यह भी कहा कि यदि निर्माण केवल आज की माँग को ध्यान में रखकर किया जाए, तो भारत भविष्य के अवसरों का लाभ उठाने में हमेशा पीछे रह जाएगा।

मुंद्रा पोर्ट: दलदल से देश का सबसे बड़ा बंदरगाह

गुजरात स्थित मुंद्रा पोर्ट आज भारत का सबसे बड़ा बंदरगाह है, लेकिन अदाणी ने याद दिलाया कि तीन दशक पहले पारंपरिक रेटिंग पैमाने पर इसे बिना किसी औद्योगिक इकोसिस्टम वाला दलदली इलाका मानकर नकार दिया जाता था। उनके अनुसार, मुंद्रा ने पोर्ट के आकार से कई गुना बड़ा इकोसिस्टम बनाया है — पोर्ट से रेल, रेल से लॉजिस्टिक्स सेंटर, लॉजिस्टिक्स से पावर प्लांट, पावर से इंडस्ट्रियल जोन और अंततः पूरे भारत के व्यापारियों व उत्पादकों तक की एक जीवंत श्रृंखला।

विझिंजम: दशकों की उपेक्षा के बाद निर्मित रणनीतिक बंदरगाह

केरल में विझिंजम पोर्ट परियोजना को 25 वर्षों तक किसी ने गंभीरता से नहीं लिया, क्योंकि इसे अत्यधिक जोखिम भरा और पूंजी-गहन माना जाता था। अदाणी ने बताया कि भारत दुनिया के सबसे व्यस्त शिपिंग रूट से सिर्फ 10 नॉटिकल मील दूर होने के बावजूद अपना कंटेनर कार्गो नहीं संभाल पाता था और सिंगापुर, दुबई तथा कोलंबो के जरिए ट्रांसशिपमेंट करना पड़ता था। उन्होंने इसे भारतीय व्यापार द्वारा विदेशी बंदरगाहों को दशकों तक चुकाया गया 'संप्रभुता टैक्स' करार दिया।

खावड़ा: रेगिस्तान में भारत की AI अर्थव्यवस्था की नींव

पारंपरिक दृष्टि से खावड़ा रिन्यूएबल एनर्जी पार्क एक कठोर रेगिस्तानी परियोजना लग सकती है, जिसमें निष्पादन जोखिम और अनिश्चित माँग जैसी चुनौतियाँ हैं। लेकिन अदाणी ने इसे एक ऐसे प्लेटफॉर्म के रूप में परिभाषित किया जहाँ एनर्जी, आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस, मैन्युफैक्चरिंग, डिजिटल इन्फ्रास्ट्रक्चर और औद्योगिक क्षमता अभूतपूर्व स्तर पर एकसाथ आते हैं। उनके अनुसार, यह परियोजना भारत के भविष्य के कंप्यूट इन्फ्रास्ट्रक्चर को संचालित करने वाली स्वच्छ ऊर्जा का स्रोत बन सकती है और देश की उभरती एआई अर्थव्यवस्था की बुनियाद साबित हो सकती है।

भारत का बढ़ता आत्मविश्वास और आगे की राह

अदाणी ने कहा कि अतीत में भारत की इन्फ्रास्ट्रक्चर महत्वाकांक्षाएँ सीमित संसाधनों, क्षमता और आत्मविश्वास की वजह से दबी रहीं। आज स्थिति बदल चुकी है — देश की सड़कें, बंदरगाह और हवाई अड्डे अभूतपूर्व गति से विस्तार पा रहे हैं, रिन्यूएबल एनर्जी क्षमता विश्व में सबसे तेज रफ्तार से बढ़ रही है, और डिजिटल इन्फ्रास्ट्रक्चर करोड़ों नागरिकों तक पहुँच रहा है। उन्होंने कहा कि भारत ने न केवल अपनी क्षमता साबित की है, बल्कि उस पर भरोसा करना भी सीख लिया है — और यही भरोसा किसी देश का भविष्य बदलता है।

संपादकीय दृष्टिकोण

लेकिन यह भी उल्लेखनीय है कि इन्हीं परियोजनाओं को लेकर पर्यावरणीय, स्थानीय विस्थापन और श्रम संबंधी सवाल भी उठते रहे हैं। रेटिंग फ्रेमवर्क को विकसित करने की माँग उचित है, परंतु इसका अर्थ जोखिम को कम आँकना नहीं, बल्कि उसे अधिक समग्रता से समझना होना चाहिए।
RashtraPress
31 अगस्त 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

गौतम अदाणी ने केयरएज समिट में क्या कहा?
गौतम अदाणी ने 31 अगस्त को केयरएज ग्रुप के वार्षिक समिट में कहा कि खावड़ा, मुंद्रा और विझिंजम जैसे बड़े इन्फ्रास्ट्रक्चर प्रोजेक्ट केवल क्षमता नहीं बनाते, बल्कि आसपास की पूरी अर्थव्यवस्था को रूपांतरित करते हैं। उन्होंने रेटिंग फ्रेमवर्क को भारत की बदलती जटिलता के अनुरूप विकसित करने की जरूरत पर भी जोर दिया।
मुंद्रा पोर्ट का इकोसिस्टम कैसे विकसित हुआ?
अदाणी के अनुसार, मुंद्रा पोर्ट तीन दशक पहले बिना किसी औद्योगिक इकोसिस्टम वाला दलदली इलाका था। आज यह पोर्ट-रेल-लॉजिस्टिक्स-पावर-इंडस्ट्रियल जोन की एक पूरी श्रृंखला का केंद्र है, जो देशभर के व्यापारियों और उत्पादकों से जुड़ी है।
विझिंजम पोर्ट को 25 साल तक क्यों नजरअंदाज किया गया?
विझिंजम पोर्ट परियोजना को अत्यधिक पूंजी जोखिम और निष्पादन की कठिनाई के कारण 25 वर्षों तक कोई निवेशक तैयार नहीं हुआ। इस दौरान भारत को अपना कंटेनर कार्गो सिंगापुर, दुबई और कोलंबो के जरिए ट्रांसशिप करना पड़ता था, जिसे अदाणी ने 'संप्रभुता टैक्स' कहा।
खावड़ा रिन्यूएबल एनर्जी पार्क भारत की AI अर्थव्यवस्था से कैसे जुड़ा है?
गौतम अदाणी के अनुसार, खावड़ा केवल एक रिन्यूएबल एनर्जी परियोजना नहीं है — यह एनर्जी, आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस, मैन्युफैक्चरिंग और डिजिटल इन्फ्रास्ट्रक्चर का संगम है। यह भारत के भविष्य के कंप्यूट इन्फ्रास्ट्रक्चर को स्वच्छ ऊर्जा देने और देश की AI अर्थव्यवस्था की नींव बनने में सक्षम है।
अदाणी ने रेटिंग एजेंसियों से क्या आग्रह किया?
अदाणी ने कहा कि भारत की इन्फ्रास्ट्रक्चर परियोजनाओं की जटिलता तेजी से बढ़ रही है और पारंपरिक रेटिंग फ्रेमवर्क इस बदलाव के साथ नहीं चल पा रहे। उन्होंने रेटिंग एजेंसियों से आग्रह किया कि वे अपने मूल्यांकन पैमाने को नई वास्तविकता के अनुरूप विकसित करें ताकि दीर्घकालिक इकोसिस्टम मूल्य को उचित महत्व मिल सके।
राष्ट्र प्रेस
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