एयर इंडिया फ्लाइट AI-2030 का हाईजैक अलर्ट निकला फर्जी, जयपुर में ढाई घंटे की जांच के बाद दिल्ली रवाना
सारांश
मुख्य बातें
एयर इंडिया की फ्रैंकफर्ट-दिल्ली फ्लाइट AI-2030 को 14 अक्टूबर 2026 को हाईजैक अलर्ट मिलने के बाद जयपुर अंतरराष्ट्रीय हवाईअड्डे पर आपातकालीन रूप से उतारा गया, लेकिन करीब ढाई घंटे की गहन सुरक्षा जांच में विमान में कोई संदिग्ध वस्तु या व्यक्ति नहीं पाया गया। हवाईअड्डा अधिकारियों के अनुसार, जांच पूरी होने के बाद सभी यात्रियों को दोबारा विमान में सवार कराया गया और फ्लाइट को नई दिल्ली के लिए रवाना करने की अनुमति दे दी गई।
घटनाक्रम: कैसे मिला हाईजैक अलर्ट
यह उड़ान 13 अक्टूबर की रात 9:45 बजे फ्रैंकफर्ट से रवाना हुई थी और 14 अक्टूबर को सुबह 10:40 बजे दिल्ली पहुँचने वाली थी। हालाँकि, उड़ान के दौरान अहमदाबाद एयर ट्रैफिक कंट्रोल (ATC) को विमान से कथित तौर पर हाईजैक अलर्ट प्राप्त हुआ। अहमदाबाद ATC ने यह सूचना तत्काल जयपुर ATC को दी, जिसके बाद विमान को मार्ग बदलकर जयपुर की ओर मोड़ा गया और सुबह करीब 9:45 बजे आपातकालीन लैंडिंग कराई गई।
प्रारंभिक रिपोर्टों के अनुसार, विमान में लगभग 300 यात्री सवार थे। लैंडिंग के तुरंत बाद एहतियात के तौर पर सभी यात्रियों को विमान से उतार लिया गया।
सुरक्षा एजेंसियों की कार्रवाई
विमान को हवाईअड्डे की एक आइसोलेशन बे में ले जाया गया, जहाँ केंद्रीय औद्योगिक सुरक्षा बल (CISF) की टीम समेत विभिन्न सुरक्षा एजेंसियों ने विस्तृत जाँच की। एंटी-टेररिज्म स्क्वॉड (ATS) सहित कई एजेंसियों के कर्मी हवाईअड्डे पर तैनात रहे। रिपोर्टों के अनुसार, नई दिल्ली में राष्ट्रीय सुरक्षा गार्ड (NSG) की एक टीम को भी अलर्ट पर रखा गया था, हालाँकि उसे जयपुर भेजे जाने की कोई आधिकारिक पुष्टि नहीं हुई।
अधिकारियों के अनुसार, करीब ढाई घंटे चली जांच में विमान में कोई संदिग्ध वस्तु नहीं मिली और स्थिति को सुरक्षित घोषित किया गया।
अलर्ट के कारण की जांच जारी
सुरक्षा एजेंसियों ने यह पता लगाने के लिए पायलट से पूछताछ की कि हाईजैक अलर्ट कैसे सक्रिय हुआ। प्रारंभिक रिपोर्टों में संभावना जताई गई थी कि पायलट द्वारा गलती से निर्धारित अलर्ट बटन दब जाने के कारण यह संकेत गया, जबकि एक अन्य शुरुआती जानकारी में किसी तकनीकी या सिस्टम खराबी की आशंका भी व्यक्त की गई। सूत्रों के अनुसार, पूछताछ के दौरान पायलट ने गलती से बटन दबाने से इनकार किया। खबर लिखे जाने तक अलर्ट के वास्तविक कारण को लेकर कोई आधिकारिक बयान जारी नहीं किया गया था।
गौरतलब है कि अलर्ट की सटीक परिस्थितियों की जाँच अभी जारी है।
कोड 7500 क्या है
कोड 7500 एक अंतरराष्ट्रीय स्तर पर मान्यता प्राप्त ट्रांसपोंडर कोड है, जिसका उपयोग पायलट विमान में अवैध हस्तक्षेप या हाईजैक जैसी स्थिति की सूचना देने के लिए करते हैं। जैसे ही ATC को यह कोड प्राप्त होता है, उड़ान दल, ATC और सभी संबंधित सुरक्षा एजेंसियों के बीच तत्काल सुरक्षा प्रतिक्रिया की प्रक्रिया अनिवार्य रूप से शुरू हो जाती है। भले ही बाद में अलर्ट के गलती से सक्रिय होने या तकनीकी खराबी का संदेह हो, प्रोटोकॉल के तहत स्थिति का पूर्ण आकलन होने तक सुरक्षा एजेंसियाँ एहतियाती प्रक्रिया का पालन करती हैं।
आगे की स्थिति
सुरक्षा जाँच पूरी होने के बाद यात्रियों को दोबारा विमान में सवार कराया गया और फ्लाइट AI-2030 को नई दिल्ली रवाना होने की अनुमति दी गई। जयपुर हवाईअड्डे पर घटना के बाद सुरक्षा व्यवस्था और कड़ी कर दी गई है। अलर्ट के वास्तविक कारण का खुलासा जाँच पूरी होने पर ही संभव होगा।