क्या अखिलेश ने एसआईआर पर सवाल उठाए? वोटर लिस्ट से लेकर बूथ तक सतर्क रहने का दिया निर्देश
सारांश
Key Takeaways
- अखिलेश यादव ने एसआईआर प्रक्रिया पर सवाल उठाए हैं।
- भाजपा पर भ्रष्टाचार के आरोप लगाए गए हैं।
- मतदाता सूची के पुनरीक्षण की आवश्यकता पर जोर दिया गया है।
- कार्यकर्ताओं को बूथ स्तर पर सतर्क रहने की सलाह दी गई है।
- चुनाव आयोग की विश्वसनीयता पर सवाल उठाए गए हैं।
लखनऊ, २ जनवरी (राष्ट्र प्रेस)। समाजवादी पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष अखिलेश यादव ने एक बार फिर प्रदेश में चल रही एसआईएआर प्रक्रिया पर गंभीर प्रश्न उठाए हैं। उन्होंने कार्यकर्ताओं से बूथ स्तर पर संगठन को और मजबूती प्रदान करने का आह्वान किया। उनका कहना था कि वोटर लिस्ट से लेकर बूथ तक सतर्क रहना अत्यंत आवश्यक है।
सपा मुखिया अखिलेश यादव ने आज विभिन्न जिलों से आए कार्यकर्ताओं से मुलाकात की। इस दौरान उन्होंने मतदाता सूची के विशेष सघन पुनरीक्षण (एसआईआर) पर कड़ी निगरानी रखने के निर्देश दिए। उन्होंने कहा कि जिन नागरिकों के नाम मतदाता सूची में शामिल नहीं हो पाए हैं, उन्हें अनिवार्य रूप से जोड़ा जाना चाहिए।
उन्होंने सभी कार्यकर्ताओं से सतर्क रहने का आग्रह किया। मुख्यमंत्री द्वारा ‘चार करोड़ वोट कटने’ के बयान पर अखिलेश यादव ने कहा कि इस समय अधिकारियों को बेईमानी का संकेत दिया गया था। उन्होंने कहा कि वर्तमान में सामने आ रहे आंकड़ों और डेटा के बाद चुनाव आयोग और प्रशासन को अपनी विश्वसनीयता साबित करनी होगी।
उन्होंने आशा व्यक्त की कि चुनाव आयोग, मैपिंग ऐप और आयोग की तकनीकी सहायता प्रदान करने वाली कंपनियाँ निष्पक्षता से कार्य करेंगी। यदि राज्य निर्वाचन आयोग और केंद्रीय निर्वाचन आयोग के मतदाता आंकड़ों में कोई अंतर सामने आता है, तो एसआईआर की प्रक्रिया का औचित्य समाप्त हो जाएगा।
भाजपा पर तीखा प्रहार करते हुए अखिलेश यादव ने कहा कि भाजपा एक बेईमान पार्टी है जो हर स्तर पर भ्रष्टाचार और अनैतिकता को बढ़ावा देती है। मतदाता सूची के एसआईआर पर कड़ी नजर रखी जाए। अखिलेश यादव ने भाजपा को भ्रष्टाचार में लिप्त पार्टी बताते हुए कहा कि यह हर स्तर पर लोकतांत्रिक प्रक्रियाओं को कमजोर कर रही है।
उन्होंने पार्टी कार्यकर्ताओं और पीडीए प्रहरियों से मतदाता सूची और एसआईआर पर चौकसी बनाए रखने की अपील की। उनका कहना था कि भाजपा सरकार से किसान, नौजवान और महिलाएं सभी वर्ग परेशान हैं। किसानों को समय पर खाद-बीज नहीं मिल रहा, फसलों का उचित मूल्य नहीं है, जबकि युवाओं के लिए रोजगार के अवसर लगातार घटते जा रहे हैं। झूठे वादों से जनता त्रस्त है और अब समाजवादी पार्टी की ओर आशा भरी नजरों से देख रही है।