9 अक्टूबर 2026
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राम मंदिर दर्शन न करने पर BJP का पलटवार: अखिलेश पर तुष्टीकरण और सनातन अपमान के आरोप

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राम मंदिर दर्शन न करने पर BJP का पलटवार: अखिलेश पर तुष्टीकरण और सनातन अपमान के आरोप

सारांश

अयोध्या दौरे पर राम मंदिर दर्शन न करने पर BJP ने अखिलेश यादव को घेरा — तुष्टीकरण से लेकर सनातन अपमान तक के आरोप लगाए। लेकिन NDA सहयोगी JDU ने साफ कहा: धर्मस्थलों को आपस में टकराना लोकतंत्र के लिए खतरनाक है।

मुख्य बातें

अखिलेश यादव ने अयोध्या दौरे के दौरान राम मंदिर के दर्शन नहीं किए और योगी आदित्यनाथ को वहाँ से चुनाव लड़ने की चुनौती दी।
उपमुख्यमंत्री ब्रजेश पाठक ने अखिलेश पर 'तुष्टीकरण की राजनीति' और 'मुस्लिम वोट बैंक' को प्राथमिकता देने का आरोप लगाया।
मंत्री दयाशंकर सिंह ने अखिलेश पर 'सनातन का अपमान' करने का आरोप लगाते हुए उनके पिता पर राम भक्तों पर गोली चलवाने का संदर्भ दिया।
ओम प्रकाश राजभर ने कहा कि अखिलेश ने मुस्लिम वोटरों को खुश करने के लिए मंदिर दर्शन से परहेज किया।
JDU महासचिव श्याम रजक ने NDA से अलग सुर में कहा कि धर्मस्थलों को आपस में खड़ा करना लोकतंत्र के लिए 'नुकसानदेह' है।

समाजवादी पार्टी (सपा) के अध्यक्ष अखिलेश यादव द्वारा अयोध्या दौरे के दौरान राम मंदिर के दर्शन न करने और मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ को अयोध्या से चुनाव लड़ने की चुनौती देने पर भारतीय जनता पार्टी (BJP) के कई वरिष्ठ नेताओं ने 9 अक्टूबर 2026 को तीखा पलटवार किया है। BJP नेताओं ने अखिलेश पर तुष्टीकरण की राजनीति और सनातन धर्म के अपमान का आरोप लगाया है।

उपमुख्यमंत्री और मंत्रियों की प्रतिक्रिया

उत्तर प्रदेश के उपमुख्यमंत्री ब्रजेश पाठक ने कहा, 'अखिलेश यादव सिर्फ तुष्टीकरण की राजनीति करते हैं। वे भले ही पीला कपड़ा पहन लें और माथे पर तिलक लगा लें, लेकिन इनको सिर्फ तुष्टीकरण और मुस्लिम वोट बैंक से मतलब है। समाजवादी पार्टी के लोग कभी भी सनातन संस्कृति को स्वीकार नहीं करते हैं।' उन्होंने अखिलेश के अयोध्या दौरे को महज राजनीतिक प्रदर्शन करार दिया।

उत्तर प्रदेश सरकार में मंत्री नरेंद्र कश्यप ने कहा कि पाँच बार लोकसभा सांसद रह चुके और लगातार दूसरी बार प्रदेश की बागडोर संभालने वाले मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ पर टिप्पणी करना अखिलेश यादव के 'अहंकार' को उजागर करता है। उन्होंने कहा कि इसी 'अहंकार' ने समाजवादी पार्टी को 'गर्त में पहुंचाया है।'

विधायक और अन्य नेताओं के बयान

BJP विधायक रजनी तिवारी ने कहा कि जब तक अखिलेश यादव को 'ईश्वर का आशीर्वाद नहीं मिलता,' वे राम मंदिर के दर्शन नहीं कर पाएंगे। मंत्री दयाशंकर सिंह ने आरोप लगाया कि अखिलेश 'सनातन का अपमान कर रहे हैं।' उन्होंने यह भी कहा कि 'इनके पिता ने भी राम भक्तों पर गोली चलवाई' और अब इन्होंने भी अयोध्या जाकर सनातन का अपमान किया।

मंत्री जयवीर सिंह ने अखिलेश की चुनौती को 'हताशा और निराशा की बौखलाहट' बताया, यह कहते हुए कि विपक्ष की यह प्रतिक्रिया उनकी घबराहट को दर्शाती है।

ओम प्रकाश राजभर का आरोप

ओम प्रकाश राजभर ने आरोप लगाया कि अखिलेश यादव ने मुस्लिम वोटरों को खुश करने के लिए जानबूझकर राम मंदिर में दर्शन नहीं किए। यह आरोप राजनीतिक दृष्टि से महत्वपूर्ण है, क्योंकि राजभर उत्तर प्रदेश में पिछड़े वर्गों के एक प्रभावशाली नेता माने जाते हैं।

जेडीयू की अलग राय

वहीं, जनता दल (यूनाइटेड) [JDU] के महासचिव श्याम रजक ने इस पूरे विवाद से दूरी बनाते हुए कहा, 'मुझे उनकी सोच से कोई लेना-देना नहीं है। मैं सभी धर्मों में विश्वास करता हूं। मेरे लिए दरगाह उतनी ही पवित्र है जितना राम मंदिर, चर्च, गुरुद्वारा, बौद्ध मठ या जैन मंदिर। इन पवित्र स्थलों को एक-दूसरे के खिलाफ खड़ा करना लोकतंत्र के लिए नुकसानदेह है और इससे समाज में कड़वाहट बढ़ेगी।' रजक की यह टिप्पणी NDA के भीतर भी एक अलग सुर की ओर संकेत करती है।

राजनीतिक पृष्ठभूमि

यह ऐसे समय में आया है जब उत्तर प्रदेश में आगामी चुनावों की तैयारियाँ शुरू हो चुकी हैं और सपा तथा BJP दोनों ही अपने-अपने आधार को मजबूत करने में जुटे हैं। गौरतलब है कि अयोध्या में राम मंदिर निर्माण के बाद से यह स्थल एक बड़ा राजनीतिक प्रतीक बन चुका है, और विपक्षी नेताओं का वहाँ जाना या न जाना, दोनों ही विवाद का विषय बन जाते हैं। आलोचकों का कहना है कि BJP इस मुद्दे का इस्तेमाल चुनावी ध्रुवीकरण के लिए कर रही है, जबकि पार्टी इसे धार्मिक भावनाओं की रक्षा का प्रश्न बताती है।

संपादकीय दृष्टिकोण

बल्कि उत्तर प्रदेश के चुनावी माहौल में धार्मिक प्रतीकों के राजनीतिकरण का उदाहरण है। BJP की पूरी प्रतिक्रिया एक समन्वित संदेश की तरह आई — एकाधिक मंत्रियों और विधायकों ने एक ही दिन एक ही भाषा में अखिलेश को घेरा — जो सुझाता है कि यह सहज प्रतिक्रिया कम और सुनियोजित रणनीति अधिक है। दूसरी ओर, JDU के श्याम रजक की टिप्पणी NDA के भीतर एक असुविधाजनक सच सामने रखती है: धर्मस्थलों को राजनीतिक हथियार बनाना दीर्घकाल में किसी के लिए भी लाभकारी नहीं। मुख्यधारा की कवरेज इस आंतरिक दरार को प्रायः नज़रअंदाज़ कर देती है।
RashtraPress
9 अक्टूबर 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

अखिलेश यादव ने अयोध्या में राम मंदिर के दर्शन क्यों नहीं किए?
अखिलेश यादव के दर्शन न करने के कारण उन्होंने सार्वजनिक रूप से स्पष्ट नहीं किए हैं। BJP नेताओं का आरोप है कि उन्होंने मुस्लिम वोट बैंक को ध्यान में रखकर यह कदम उठाया, जबकि सपा की ओर से इस दावे का खंडन अभी सामने नहीं आया है।
अखिलेश यादव ने योगी आदित्यनाथ को क्या चुनौती दी?
अखिलेश यादव ने मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ को अयोध्या सीट से चुनाव लड़ने की चुनौती दी। इस पर BJP मंत्री नरेंद्र कश्यप ने इसे अखिलेश का 'अहंकार' बताया और कहा कि इसी अहंकार ने सपा को 'गर्त में पहुंचाया है।'
BJP नेताओं ने अखिलेश यादव पर क्या-क्या आरोप लगाए?
BJP नेताओं ने अखिलेश यादव पर तुष्टीकरण की राजनीति, सनातन धर्म का अपमान और मुस्लिम वोट बैंक को प्राथमिकता देने के आरोप लगाए। उपमुख्यमंत्री ब्रजेश पाठक, मंत्री दयाशंकर सिंह, जयवीर सिंह और विधायक रजनी तिवारी सहित कई नेताओं ने एक ही दिन ये बयान दिए।
JDU ने इस विवाद पर क्या रुख अपनाया?
JDU महासचिव श्याम रजक ने BJP के सुर से अलग रुख अपनाते हुए कहा कि वे सभी धर्मों में विश्वास रखते हैं और दरगाह, राम मंदिर, चर्च, गुरुद्वारा सभी उनके लिए समान रूप से पवित्र हैं। उन्होंने धर्मस्थलों को एक-दूसरे के खिलाफ खड़ा करने को 'लोकतंत्र के लिए नुकसानदेह' बताया।
यह विवाद उत्तर प्रदेश की राजनीति में क्यों महत्वपूर्ण है?
अयोध्या में राम मंदिर निर्माण के बाद से यह स्थल उत्तर प्रदेश की राजनीति में एक प्रमुख प्रतीक बन गया है। आगामी चुनावों की पृष्ठभूमि में BJP और सपा दोनों के लिए अयोध्या के प्रति उनका रुख एक निर्णायक चुनावी मुद्दा बनता जा रहा है।
राष्ट्र प्रेस
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