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अमित शाह का राहुल गांधी पर तंज: 'बंगाल में TMC आलोचना बहुत देर से हुई'

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अमित शाह का राहुल गांधी पर तंज: 'बंगाल में TMC आलोचना बहुत देर से हुई'

सारांश

गृह मंत्री अमित शाह ने राहुल गांधी की TMC आलोचना को 'देर से हुआ एहसास' बताया। राहुल ने कहा—ममता की नीतियों ने बंगाल में भाजपा को जगह दी। 2026 विधानसभा चुनाव से पहले बंगाल की राजनीति एक बार फिर गरमाई।

मुख्य बातें

अमित शाह ने राहुल गांधी की TMC आलोचना को 'बहुत देर से हुआ एहसास' बताया।
राहुल गांधी ने 23 अप्रैल को 106 सेकंड के वीडियो में कहा— ममता बनर्जी की नीतियों ने बंगाल में भाजपा को मौका दिया।
कांग्रेस ने 2011 में TMC के साथ मिलकर बंगाल में लेफ्ट फ्रंट के 34 साल के शासन को समाप्त किया था।
2021 के विधानसभा चुनाव में कांग्रेस और वाम मोर्चा एक भी सीट नहीं जीत पाए।
2024 के लोकसभा चुनाव में कांग्रेस 42 में से केवल मालदा की एक सीट जीत पाई।
अधीर रंजन चौधरी की जगह सुभंकर सरकार ने प्रदेश कांग्रेस की कमान संभाली, 2026 के चुनाव से पहले पार्टी नई रणनीति पर काम कर रही है।

नई दिल्ली, 24 अप्रैल (राष्ट्र प्रेस)। केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने शुक्रवार, 24 अप्रैल को लोकसभा में नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी की पश्चिम बंगाल में तृणमूल कांग्रेस (TMC) सरकार पर की गई आलोचना को 'बहुत देर से हुआ एहसास' करार दिया। राहुल गांधी ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म 'एक्स' पर एक 106 सेकंड का वीडियो संदेश पोस्ट कर मुख्यमंत्री ममता बनर्जी की नीतियों को बंगाल में भाजपा के उभार का जिम्मेदार ठहराया था, जिस पर शाह ने तीखी प्रतिक्रिया दी।

राहुल गांधी का वीडियो और उनका आरोप

गुरुवार, 23 अप्रैल को पोस्ट किए गए वीडियो में राहुल गांधी ने कहा, "अगर मुख्यमंत्री ममता बनर्जी ने एक साफ-सुथरी सरकार चलाई होती और बंगाल का ध्रुवीकरण न किया होता, तो भाजपा को मौका नहीं मिलता।" इस वीडियो में उन्होंने भाजपा की नीतियों की भी आलोचना की और पश्चिम बंगाल के मतदाताओं से कांग्रेस को समर्थन देने का आग्रह किया।

राहुल का यह बयान उल्लेखनीय इसलिए है क्योंकि कांग्रेस और TMC कभी घनिष्ठ सहयोगी रहे हैं। 2011 में लेफ्ट फ्रंट के 34 साल के शासन को समाप्त करने में कांग्रेस ने TMC का साथ दिया था।

अमित शाह की प्रतिक्रिया और राजनीतिक संदर्भ

गृह मंत्री अमित शाह ने कोलकाता में मीडिया से बात करते हुए कहा, "इस बात का एहसास बहुत देर से हुआ है।" शाह का इशारा साफ था—जब कांग्रेस TMC के साथ गठबंधन में थी, तब उसने बंगाल में जो राजनीतिक वातावरण बनाया, उसी का परिणाम आज सामने है।

राजनीतिक विश्लेषकों के अनुसार, कांग्रेस की यह आत्म-आलोचना 2026 के पश्चिम बंगाल विधानसभा चुनावों से पहले अपनी जमीन मजबूत करने की रणनीति का हिस्सा हो सकती है। लेकिन सवाल यह है कि जिस TMC को वे आज दोष दे रहे हैं, उसी के साथ दशकों तक कंधे से कंधा मिलाकर चलने के बाद यह बयान कितना विश्वसनीय है।

बंगाल में कांग्रेस-TMC संबंधों का उतार-चढ़ाव

पश्चिम बंगाल में कांग्रेस और TMC के रिश्तों का इतिहास जटिल रहा है। 2009 के लोकसभा चुनाव में जब लेफ्ट फ्रंट ने यूपीए सरकार से समर्थन वापस लिया, तब TMC ने कांग्रेस के साथ गठबंधन किया। यह जोड़ी 2011 के विधानसभा चुनाव में सफल रही और वाम मोर्चे का लंबा शासन समाप्त हुआ।

हालांकि, 2013 में दोनों पार्टियां अलग हो गईं। इसके बाद कांग्रेस ने वाम मोर्चे के साथ हाथ मिलाया और 2016 तथा 2021 के विधानसभा चुनाव मिलकर लड़े, लेकिन दोनों बार TMC को सत्ता से हटाने में नाकाम रहे। 2021 में तो हालत यह हुई कि कांग्रेस और वाम मोर्चा एक भी सीट नहीं जीत सके।

अधीर रंजन चौधरी की विदाई और नेतृत्व परिवर्तन

2024 के लोकसभा चुनाव में कांग्रेस पश्चिम बंगाल की 42 में से केवल मालदा की एक सीट जीत पाई। बहरामपुर से 1999 से 2019 के बीच लगातार पांच बार सांसद रहे अधीर रंजन चौधरी यह सीट हार गए और उन्होंने प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष पद से इस्तीफा दे दिया।

चौधरी की जगह सुभंकर सरकार को प्रदेश कांग्रेस की कमान सौंपी गई, जिन्हें अपेक्षाकृत नरम रुख वाला नेता माना जाता है। उनके नेतृत्व में कांग्रेस ने CPI(M) के साथ गठबंधन से दूरी बनाई, जिससे विपक्षी वोटों का बिखराव हुआ और परोक्ष रूप से भाजपाTMC दोनों को फायदा मिला।

विश्लेषण: किसे फायदा, किसे नुकसान?

राहुल गांधी का यह बयान एक बड़े राजनीतिक विरोधाभास को उजागर करता है। कांग्रेस ने जब TMC के साथ मिलकर बंगाल में वाम मोर्चे को हराया, तब उसने राज्य में एक ऐसे राजनीतिक शून्य को जन्म दिया जिसे बाद में भाजपा ने भरा। आलोचक मानते हैं कि यह 'देर से हुआ एहसास' चुनावी मजबूरी से उपजा है, न कि वास्तविक आत्मचिंतन से।

2026 के विधानसभा चुनावों से पहले पश्चिम बंगाल में सभी दलों की रणनीति स्पष्ट होती जा रही है। TMC, भाजपा और कांग्रेस—तीनों अपनी-अपनी जमीन मजबूत करने में जुटे हैं। आने वाले महीनों में यह राजनीतिक बयानबाजी और तेज होने की संभावना है।

संपादकीय दृष्टिकोण

लेकिन इसमें एक बड़ा विरोधाभास छिपा है—कांग्रेस ने ही 2011 में TMC को सत्ता दिलाई और उस गठबंधन ने बंगाल में जो राजनीतिक शून्य बनाया, उसी में भाजपा पली-बढ़ी। अमित शाह का 'देर से एहसास' वाला तंज इसीलिए राजनीतिक रूप से धारदार है। असली सवाल यह है कि 2026 से पहले कांग्रेस बंगाल में अपनी खोई जमीन कैसे वापस पाएगी, जब उसके पास न मजबूत नेता है, न स्पष्ट गठबंधन रणनीति। यह बयानबाजी जमीनी राजनीति का विकल्प नहीं बन सकती।
RashtraPress
26 जून 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

अमित शाह ने राहुल गांधी के बंगाल वाले बयान पर क्या कहा?
अमित शाह ने राहुल गांधी की TMC आलोचना को 'बहुत देर से हुआ एहसास' बताया। उन्होंने कहा कि कांग्रेस को यह समझ अब आई है, जबकि वे खुद TMC के साथ मिलकर बंगाल में सत्ता में आए थे।
राहुल गांधी ने पश्चिम बंगाल पर क्या बयान दिया?
राहुल गांधी ने 23 अप्रैल को एक 106 सेकंड के वीडियो में कहा कि अगर ममता बनर्जी ने साफ सरकार चलाई होती और बंगाल का ध्रुवीकरण न किया होता, तो भाजपा को राज्य में पैर पसारने का मौका नहीं मिलता।
पश्चिम बंगाल में कांग्रेस और TMC के संबंध कैसे रहे हैं?
2009 और 2011 में कांग्रेस और TMC ने मिलकर चुनाव लड़े और लेफ्ट फ्रंट का 34 साल का शासन समाप्त किया। 2013 में दोनों अलग हो गए और तब से संबंध उतार-चढ़ाव भरे रहे हैं।
2024 के लोकसभा चुनाव में बंगाल में कांग्रेस का प्रदर्शन कैसा रहा?
2024 के लोकसभा चुनाव में कांग्रेस पश्चिम बंगाल की 42 सीटों में से केवल मालदा की एक सीट जीत पाई। अधीर रंजन चौधरी बहरामपुर से हार गए और उन्होंने प्रदेश अध्यक्ष पद से इस्तीफा दे दिया।
2026 के बंगाल चुनाव में कांग्रेस की रणनीति क्या होगी?
2026 के विधानसभा चुनाव से पहले कांग्रेस ने CPI(M) से दूरी बनाई है और नए नेतृत्व में अपनी अलग पहचान बनाने की कोशिश कर रही है। राहुल गांधी के ताजा बयान को इसी रणनीति का हिस्सा माना जा रहा है।
राष्ट्र प्रेस
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