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UNHRC में कश्मीर की आवाज़: अनिका नजीर बोलीं — अनुच्छेद 370 हटने के बाद युवा पीढ़ी में सकारात्मक बदलाव

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UNHRC में कश्मीर की आवाज़: अनिका नजीर बोलीं — अनुच्छेद 370 हटने के बाद युवा पीढ़ी में सकारात्मक बदलाव

सारांश

श्रीनगर की कम्युनिटी डेवलपमेंट प्रोफेशनल अनिका नजीर ने UNHRC के वैश्विक मंच पर कश्मीर को भू-राजनीतिक विवाद से परे रखते हुए शांति, विकास और महिला सशक्तिकरण की कहानी सुनाई — और कहा कि अनुच्छेद 370 के बाद की नई पीढ़ी सकारात्मक बदलाव को खुले दिल से अपना रही है।

मुख्य बातें

अनिका नजीर ने संयुक्त राष्ट्र मानवाधिकार परिषद (UNHRC) में कश्मीर की संस्कृति, शांति, महिला सशक्तिकरण और युवाओं के अवसरों पर अपनी बात रखी।
UNHRC में सिविल सोसाइटी प्रतिनिधियों को बोलने के लिए केवल 90 सेकंड का समय मिलता है।
अनिका के अनुसार अनुच्छेद 370 हटने के बाद खालीपन और खतरे के अहसास में कमी आई है; 'जेन-ज़ी' और आने वाली पीढ़ियाँ सकारात्मक प्रतिक्रिया दे रही हैं।
उन्होंने वैश्विक मंचों पर कश्मीर को सिर्फ भू-राजनीतिक नजरिए से न देखे जाने की अपील की और कहा — 'शांति संभव है।' महिला सशक्तिकरण पर जोर देते हुए उन्होंने कहा कि NEET सहित राष्ट्रीय प्रतियोगी परीक्षाओं में कश्मीरी महिलाओं की भागीदारी और सफलता दर बढ़ी है।
अनिका ने माना कि दो-तीन पीढ़ियाँ संघर्ष के दौर से प्रभावित हुईं, और अब विकास को हल्के में न लेते हुए युवाओं को निरंतर अवसर दिए जाने चाहिए।

कम्युनिटी डेवलपमेंट प्रोफेशनल अनिका नजीर ने संयुक्त राष्ट्र मानवाधिकार परिषद (UNHRC) के मंच से कश्मीर की सांस्कृतिक विरासत, महिला सशक्तिकरण, शांति और युवाओं के लिए उभरते अवसरों पर अपनी बात रखी। श्रीनगर में पली-बढ़ी और वहीं कार्यरत अनिका ने बताया कि अनुच्छेद 370 हटने के बाद घाटी के युवाओं में माहौल के प्रति एक स्पष्ट सकारात्मक प्रतिक्रिया देखी जा रही है।

UNHRC के मंच पर 90 सेकंड की अहमियत

अनिका नजीर ने बताया कि UNHRC में सिविल सोसाइटी और युवा प्रतिनिधियों को बोलने के लिए केवल 90 सेकंड का समय मिलता है। उन्होंने कहा, 'उन 90 सेकंड में अपने विचार रखने होते हैं और जिस मुद्दे को आप उठाना चाहते हैं, उसका संक्षिप्त विवरण देना होता है। इसलिए, ये 90 सेकंड यह तय करने में बहुत महत्वपूर्ण होते हैं कि आपको कौन-कौन सी बातें सामने रखनी हैं।' उन्होंने वैश्विक मंच पर कश्मीर को महज भू-राजनीतिक विवाद तक सीमित न रखे जाने की अपील करते हुए कहा कि 'शांति संभव है।'

युवा पीढ़ी में बदलाव की लहर

अनुच्छेद 370 के निरसन के बाद हुए बदलावों पर अनिका ने कहा कि पहले जो खालीपन और खतरे का अहसास था, उसमें अब काफी कमी आई है। उनके अनुसार, 'जेन-ज़ी', 'जेन अल्फा' और आने वाली पीढ़ियाँ इस माहौल पर बहुत सकारात्मक प्रतिक्रिया दे रही हैं क्योंकि इन युवाओं ने संघर्ष का दौर प्रत्यक्ष रूप से नहीं देखा। उन्होंने कहा, 'अब सकारात्मक बदलाव को सब पसंद कर रहे हैं।'

वैश्विक मंच पर कश्मीर की छवि और विकास की वास्तविकता

ग्लोबल मंचों पर कश्मीर को 'विवादित' क्षेत्र बताए जाने के सवाल पर अनिका नजीर ने कहा कि घाटी की तरक्की उन लोगों के लिए एक कड़वी सच्चाई है जो इस इलाके को मुख्यतः अस्थिरता के नजरिए से देखते आए हैं। उनके अनुसार, जो लोग यहाँ अस्थिरता बनाए रखना चाहते थे, उनके लिए यह देखना कि यहाँ के लोग लगातार आगे बढ़ रहे हैं — एक बड़ी हार है। उन्होंने यह भी रेखांकित किया कि जम्मू-कश्मीर से महान सूफी संतों और लेखकों की परंपरा रही है, और यह इतिहास किसी संघर्ष के दशकों से नहीं मिटता।

महिला सशक्तिकरण और न्याय व्यवस्था

महिलाओं की सुरक्षा और सशक्तिकरण पर अनिका ने स्पष्ट किया कि संविधान में महिलाओं की सुरक्षा के लिए पर्याप्त कानून पहले से मौजूद हैं, किंतु उनका सही क्रियान्वयन अधिक ज़रूरी है। उन्होंने कहा कि न्याय व्यवस्था इतनी संवेदनशील और तेज़ होनी चाहिए कि कोई महिला न्यायपालिका के पास जाने से सिर्फ इसलिए न डरे कि उसका मामला सालों तक खिंचता रहेगा। साथ ही उन्होंने बताया कि NEET, हायर सेकेंडरी और अन्य प्रतियोगी परीक्षाओं में कश्मीरी महिलाओं की भागीदारी और सफलता दर में उल्लेखनीय वृद्धि हुई है।

विकास एक सतत प्रक्रिया — अवसरों की जरूरत

अनिका नजीर ने इस बात पर जोर दिया कि विकास एक बार में नहीं, बल्कि निरंतर चलने वाली दीर्घकालिक प्रक्रिया है। उन्होंने माना कि दो से तीन पीढ़ियाँ संघर्ष के उस दौर से गुज़री हैं जिसका सदमा लगभग हर घर तक पहुँचा। ऐसे में युवाओं और सभी पीढ़ियों को जहाँ भी और जब भी संभव हो, अवसर दिए जाने चाहिए। उनके मुताबिक, कश्मीर में एक बड़े केंद्र के रूप में विकसित होने की जबरदस्त क्षमता है, और वे मानती हैं कि घाटी इससे भी आगे जा सकती है।

संपादकीय दृष्टिकोण

न कि किसी बाहरी आख्यान के माध्यम से। हालाँकि, यह ध्यान रखना जरूरी है कि उनके अनुभव और दृष्टिकोण उनके अपने हैं और कश्मीर के भीतर मौजूद विविध आवाज़ों का एक हिस्सा भर हैं। जब वे कहती हैं कि 'सकारात्मक बदलाव को सब पसंद कर रहे हैं,' तो यह एक व्यक्तिगत अवलोकन है जिसे व्यापक सामाजिक सर्वेक्षण के रूप में नहीं पढ़ा जाना चाहिए। असली परीक्षा यह है कि क्या महिला उद्यमिता, प्रतियोगी परीक्षाओं में सफलता और बढ़ते अवसरों का यह रुझान घाटी के हर हिस्से — शहर और दूरदराज के इलाकों — तक समान रूप से पहुँच रहा है।
RashtraPress
1 अक्टूबर 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

अनिका नजीर ने UNHRC में कश्मीर के बारे में क्या कहा?
अनिका नजीर ने UNHRC में कश्मीर की सांस्कृतिक विरासत, महिला सशक्तिकरण, शांति और युवाओं के लिए अवसरों पर बात रखी। उन्होंने वैश्विक मंच पर अपील की कि कश्मीर को केवल भू-राजनीतिक विवाद तक सीमित न रखा जाए और कहा कि 'शांति संभव है।'
अनुच्छेद 370 हटने के बाद कश्मीर में क्या बदलाव आया है?
अनिका नजीर के अनुसार अनुच्छेद 370 हटने के बाद खालीपन और खतरे के अहसास में काफी कमी आई है। 'जेन-ज़ी' और आने वाली नई पीढ़ियाँ जिन्होंने संघर्ष का दौर प्रत्यक्ष नहीं देखा, वे इस माहौल पर सकारात्मक प्रतिक्रिया दे रही हैं।
UNHRC में सिविल सोसाइटी प्रतिनिधियों को बोलने का कितना समय मिलता है?
UNHRC में सिविल सोसाइटी और युवा प्रतिनिधियों को बोलने के लिए केवल 90 सेकंड का समय दिया जाता है। इन 90 सेकंड में प्रतिनिधि को अपने विचार और उठाए जाने वाले मुद्दे का संक्षिप्त विवरण देना होता है।
कश्मीर में महिला सशक्तिकरण की स्थिति कैसी है?
अनिका नजीर के अनुसार कश्मीरी महिलाएँ अब उद्यमिता और स्टार्टअप इकोसिस्टम में सक्रिय भागीदारी कर रही हैं। NEET, हायर सेकेंडरी और अन्य राष्ट्रीय प्रतियोगी परीक्षाओं में भी महिलाओं की भागीदारी और सफलता दर में उल्लेखनीय वृद्धि हुई है।
अनिका नजीर के अनुसार कश्मीर के विकास की क्षमता कितनी है?
अनिका नजीर का मानना है कि कश्मीर में एक बड़े केंद्र के रूप में विकसित होने की जबरदस्त क्षमता है, ठीक वैसे जैसे दुनिया भर के अन्य क्षेत्र विकसित हुए हैं। वे यह भी मानती हैं कि घाटी इससे भी आगे जाने और लगातार विकास करते रहने की स्थिति में है।
राष्ट्र प्रेस
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