क्या <b>राहुल गांधी</b> के आरोपों पर <b>अनिल बलूनी</b> का यह पलटवार सही है?
सारांश
Key Takeaways
- अनिल बलूनी ने राहुल गांधी के दावों का खंडन किया।
- राहुल गांधी ने विदेशी नेताओं से मुलाकातों की बात की।
- दोनों पक्षों के तर्क महत्वपूर्ण हैं।
नई दिल्ली, 4 दिसंबर (राष्ट्र प्रेस)। भाजपा के सांसद अनिल बलूनी ने गुरुवार को लोकसभा में कांग्रेस सांसद राहुल गांधी के उस बयान का जवाब दिया, जिसमें उन्होंने कहा था कि सरकार विदेशी नेताओं को विपक्ष के नेताओं से मिलने नहीं देती।
अनिल बलूनी ने कहा कि राहुल गांधी ने पिछले एक-डेढ़ साल में ही कम से कम पांच विदेशी मेहमानों और राष्ट्राध्यक्षों से मुलाकात की है। इसके साथ ही उन्होंने राहुल गांधी की विदेशी मेहमानों के साथ मुलाकात की कई तस्वीरें भी साझा की।
कांग्रेस सांसद राहुल गांधी ने यह आरोप उस समय लगाया जब रूस के राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन दो दिवसीय भारत दौरे पर आए हैं।
भाजपा सांसद अनिल बलूनी ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर लिखा, "राहुल गांधी जी, इतना सफेद झूठ तो मत बोलिए। पिछले एक-डेढ़ साल में आपने कम से कम पांच विदेशी मेहमानों से मुलाकात की है। ये तस्वीरें झूठी तो नहीं हो सकती राहुल गांधी जी।"
उन्होंने एक्स पोस्ट में राहुल गांधी के दावे को गलत बताते हुए कहा, "बांग्लादेश की पूर्व प्रधानमंत्री शेख हसीना: 10 जून, 2024, मलेशिया के प्रधानमंत्री अनवर इब्राहिम: 21 अगस्त, 2024, मॉरिशस के प्रधानमंत्री नवीनचंद्र रामगुलाम: 16 सितंबर, 2025, न्यूज़ीलैंड के प्रधानमंत्री क्रिस्टोफर लक्सन: 8 मार्च, 2025, वियतनाम के पीएम से भी 1 अगस्त, 2024 को मुलाकात की।"
उन्होंने आगे कहा, "इन तथ्यों से स्पष्ट है कि राहुल गांधी जी, आप केवल झूठ बोल रहे हैं। जब आप विदेशी धरती पर जाते हैं, तो हमेशा भारत, भारत के लोकतंत्र और भारत के संविधान को बदनाम करते हैं।"
इसके साथ अनिल बलूनी ने बताया, "किसी विजिट के दौरान, विदेश मंत्रालय आने वाले गणमान्य अतिथि के लिए सरकारी अधिकारियों और संस्थाओं के साथ बैठक आयोजित करता है। सरकार के बाहर मीटिंग आयोजित करना विजिटिंग डेलिगेशन पर निर्भर करता है। राहुल गांधी ने पहले भी कई विदेशी मेहमानों से मुलाकातें की हैं।"
इससे पहले राहुल गांधी ने संसद परिसर में मीडिया से बातचीत करते हुए कहा था कि बाहर से आने वाले डेलिगेशन के साथ एलओपी की मीटिंग होती है, यह परंपरा है। लेकिन, केंद्र सरकार बाहर से आने वाले डेलिगेट्स से कहती है कि वे एलओपी से न मिलें। यह हर बार किया जा रहा है। हिंदुस्तान का प्रतिनिधित्व केवल सरकार नहीं, बल्कि विपक्ष भी करता है, फिर भी सरकार नहीं चाहती कि विपक्ष बाहर के लोगों से मिले।