अनिरुद्धाचार्य महाराज को दिल्ली उच्च न्यायालय से मिली राहत, सोशल मीडिया सामग्री हटाई जाएगी
सारांश
Key Takeaways
- दिल्ली उच्च न्यायालय ने अनिरुद्धाचार्य महाराज को राहत दी।
- सोशल मीडिया पर उनके वीडियो का गलत उपयोग हो रहा था।
- गूगल ने अदालत में एआई-जनरेटेड कंटेंट हटाने की बात की।
- अगली सुनवाई 23 सितंबर को निर्धारित की गई है।
- आलोचना को केवल असहमति के रूप में देखा जाना चाहिए।
नई दिल्ली, 30 मार्च (राष्ट्र प्रेस)। बॉलीवुड सितारों के बाद अब प्रसिद्ध कथावाचक अनिरुद्धाचार्य महाराज ने अपनी व्यक्तिगत अधिकारों को लेकर अदालत का सहारा लिया है।
दिल्ली उच्च न्यायालय ने सुनवाई के दौरान सभी संबंधित वीडियो/लिंक्स को यूट्यूब से हटाने का आदेश दिया है।
अनिरुद्धाचार्य का प्रतिनिधित्व कर रहे वकील ने बताया कि इंटरनेट और सोशल मीडिया पर उनके नाम और वीडियो का गलत उपयोग किया जा रहा है। कई स्थानों पर उनके वीडियो या एआई द्वारा बनाये गए कंटेंट को इस तरह प्रस्तुत किया जा रहा है जैसे वे स्वयं बोल रहे हों। वकील ने कहा कि सोशल मीडिया पर फैली जानकारी के कारण लोग उन्हें गंभीरता से नहीं लेंगे।
गूगल ने अदालत को बताया कि यदि कोई वीडियो या कंटेंट एआई-जनरेटेड या गलत तरीके से निर्मित है, तो उसे हटाया जा सकता है। गूगल ने कहा कि जिन लिंक पर अनिरुद्धाचार्य ने शिकायत की है, उनमें से कुछ फैन पेज के वीडियो भी हैं, जिनमें उनके पुराने बयान शामिल हैं, जो महिलाओं या विज्ञान से संबंधित टिप्पणियों के कारण विवादास्पद बने हैं। हालांकि, अदालत ने अनिरुद्धाचार्य को राहत देते हुए सामग्री को हटाने का आदेश दे दिया है।
अदालत ने यह भी सवाल उठाया कि इस मामले के लिए वृंदावन का होने के बावजूद दिल्ली उच्च न्यायालय का रुख क्यों किया गया। उन्होंने कहा कि देश में और भी अदालतें हैं। अगर वे आदेश पारित करेंगी, तो क्या गूगल उसे मानने से मना करेगा? कलकत्ता से लेकर इलाहाबाद और लखनऊ की अदालतें इस मामले में आदेश नहीं दे सकतीं? दिल्ली को लेकर इतना प्यार क्यों है?
जस्टिस तुषार राव गेड़ेला ने अनिरुद्धाचार्य महाराज से कहा कि आप तो धार्मिक गुरु हैं और आपको आलोचना, प्रशंसा या पहचान जैसी बातों से प्रभावित नहीं होना चाहिए। आपको इन सब से ऊपर होना चाहिए। अदालत ने आदि शंकराचार्य का उदाहरण देते हुए कहा कि उन्होंने कभी आलोचना करने वालों के खिलाफ मानहानि का मुकदमा नहीं किया है। जब तक कोई बात वास्तव में मानहानिकारक न हो, तब तक केवल असहमति को गलत नहीं माना जा सकता। अब मामले की अगली सुनवाई 23 सितंबर को होगी।