अन्ना हजारे का AAP पर बड़ा बयान: 'सही काम होता तो नेता न छोड़ते पार्टी'

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अन्ना हजारे का AAP पर बड़ा बयान: 'सही काम होता तो नेता न छोड़ते पार्टी'

सारांश

अन्ना हजारे ने राघव चड्ढा के AAP छोड़ने पर कहा — सही काम होता तो नेता न जाते। भाजपा नेताओं ने केजरीवाल की कार्यशैली पर सवाल उठाए। AAP में बिखराव का यह पैटर्न 2011 के आंदोलन से जन्मी पार्टी के लिए गहरे सवाल खड़े करता है।

Key Takeaways

  • अन्ना हजारे ने कहा — यदि AAP सही तरीके से काम करती, तो नेता पार्टी नहीं छोड़ते।
  • राज्यसभा सांसद राघव चड्ढा समेत कई AAP सांसदों ने 25 अप्रैल 2025 को पार्टी से इस्तीफा दिया।
  • केंद्रीय मंत्री एसपी सिंह बघेल ने AAP को आजादी के बाद सबसे कम समय में भ्रष्टाचार में लिप्त पार्टी बताया।
  • योगेंद्र यादव, प्रशांत भूषण, शाजिया इल्मी, कुमार विश्वास — AAP से पहले ही अलग हो चुके प्रमुख नाम।
  • भाजपा पंजाब अध्यक्ष अश्विनी शर्मा ने कहा — AAP में आंतरिक लोकतंत्र का अभाव है।
  • UP उपमुख्यमंत्री ब्रजेश पाठक ने इस्तीफा देने वाले सांसदों का स्वागत करते हुए कहा — उन्होंने सही समय पर सही निर्णय लिया।

नई दिल्ली, 25 अप्रैल (राष्ट्र प्रेस)। आम आदमी पार्टी (AAP) के राज्यसभा सांसद राघव चड्ढा समेत कई अन्य सांसदों द्वारा पार्टी से इस्तीफा दिए जाने के बाद著名 सामाजिक कार्यकर्ता अन्ना हजारे ने अपनी तीखी प्रतिक्रिया दी है। उन्होंने स्पष्ट शब्दों में कहा कि यदि पार्टी सही ढंग से अपना काम करती, तो शायद उसके नेता उसे छोड़ने का निर्णय नहीं लेते। यह बयान ऐसे समय में आया है जब AAP के भीतर असंतोष और बिखराव की खबरें लगातार सामने आ रही हैं।

अन्ना हजारे का स्पष्ट संदेश

अन्ना हजारे ने कहा कि लोकतंत्र में किसी भी नेता को यह पूर्ण अधिकार है कि वह अपनी इच्छा और विचारधारा के अनुसार किसी भी राजनीतिक दल में शामिल हो या उससे अलग हो जाए। हालांकि उन्होंने यह भी जोड़ा कि जब कोई नेता अपनी पार्टी छोड़ता है, तो इसके पीछे गहरी आंतरिक समस्याएं और असंतोष होता है।

उनके अनुसार, "अगर पार्टी सही तरीके से काम कर रही होती तो शायद नेता उसे छोड़ने का फैसला नहीं करते।" यह बयान सीधे तौर पर AAP के नेतृत्व और कार्यशैली पर एक गंभीर सवाल खड़ा करता है।

गौरतलब है कि अन्ना हजारे ही वह शख्सियत हैं जिनके 2011 के भ्रष्टाचार विरोधी आंदोलन की कोख से आम आदमी पार्टी का जन्म हुआ था। अरविंद केजरीवाल उस आंदोलन के प्रमुख चेहरे थे। इसलिए हजारे का यह बयान महज एक राजनीतिक टिप्पणी नहीं, बल्कि एक संस्थापक सहयोगी की पीड़ा भी है।

भाजपा नेताओं के तीखे हमले

केंद्रीय राज्य मंत्री एसपी सिंह बघेल ने आरोप लगाया कि आम आदमी पार्टी आजादी के बाद सबसे कम समय में भ्रष्टाचार के मामलों में सर्वाधिक लिप्त रहने वाली पार्टी बन गई है। यह बयान AAP के कई नेताओं पर चल रहे आपराधिक और भ्रष्टाचार के मुकदमों के संदर्भ में आया है।

भाजपा सांसद कमलजीत सहरावत ने कहा कि 2013-14 में स्थापित AAP के कई संस्थापक सदस्य और वरिष्ठ कार्यकर्ता समय-समय पर पार्टी से किनारा करते रहे हैं। उन्होंने अरविंद केजरीवाल की कार्यशैली को असंतोष का मुख्य कारण बताया।

भाजपा नेता आरपी सिंह ने कहा, "चाहे योगेंद्र यादव हों, शाजिया इल्मी हों, प्रशांत भूषण हों या कुमार विश्वास हों — कई बड़े नाम AAP छोड़ चुके हैं। यह साफ करता है कि केजरीवाल के कार्यों से पार्टी के भीतर नाराजगी गहरी है।"

AAP के भीतर बिखराव का पैटर्न

भाजपा पंजाब के कार्यकारी अध्यक्ष अश्विनी शर्मा ने कहा कि AAP जो कभी एक वैकल्पिक राजनीतिक शक्ति बनने का सपना लेकर चली थी, अब अपने मूल उद्देश्यों से भटक गई है। उन्होंने कहा, "पार्टी लोकतंत्र की बात करती है, लेकिन भीतर से आंतरिक लोकतंत्र का नामोनिशान नहीं है।"

यह विरोधाभास उजागर करता है कि जो पार्टी "आम आदमी" के नाम पर बनी, वह आज अपने ही संस्थापकों और करीबी सहयोगियों को बनाए रखने में विफल हो रही है। योगेंद्र यादव, प्रशांत भूषण, कुमार विश्वास जैसे वैचारिक स्तंभों का पार्टी से मोहभंग और अब राघव चड्ढा जैसे युवा चेहरे का अलगाव — यह एक स्पष्ट पैटर्न की ओर इशारा करता है।

उत्तर प्रदेश के उपमुख्यमंत्री का स्वागत

उत्तर प्रदेश के उपमुख्यमंत्री ब्रजेश पाठक ने राघव चड्ढा और अन्य सांसदों के इस निर्णय का स्वागत किया। उन्होंने कहा, "उन्होंने सही समय पर सही निर्णय लिया है। AAP का गठन जिन उद्देश्यों के लिए हुआ था, वह उनकी पूर्ति नहीं कर पाई।"

राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि AAP में यह बिखराव आने वाले विधानसभा और लोकसभा चुनावों पर गहरा असर डाल सकता है। पार्टी की साख और संगठनात्मक ढांचे पर उठ रहे सवाल उसकी चुनावी रणनीति को कमजोर कर सकते हैं।

आने वाले दिनों में यह देखना महत्वपूर्ण होगा कि अरविंद केजरीवाल इस संगठनात्मक संकट से निपटने के लिए क्या कदम उठाते हैं और क्या AAP अपने मूल समर्थकों का विश्वास फिर से जीत पाती है।

Point of View

बल्कि उस व्यक्ति की टिप्पणी है जिसने AAP को वैचारिक आधार दिया था — और यही इसे विशेष रूप से महत्वपूर्ण बनाता है। विडंबना यह है कि जो पार्टी 'आम आदमी' और 'पारदर्शिता' के नारे पर खड़ी हुई, वह आज आंतरिक लोकतंत्र के अभाव के आरोपों से जूझ रही है। योगेंद्र यादव से राघव चड्ढा तक का सफर बताता है कि AAP का संकट वैचारिक है, महज व्यक्तिगत नहीं। मुख्यधारा की मीडिया इसे सिर्फ 'पार्टी टूट' की खबर बना रही है, लेकिन असली सवाल यह है — क्या AAP अपनी स्थापना की मूल भावना से इतनी दूर जा चुकी है कि वापसी संभव नहीं?
NationPress
26/04/2026

Frequently Asked Questions

अन्ना हजारे ने राघव चड्ढा के AAP छोड़ने पर क्या कहा?
अन्ना हजारे ने कहा कि लोकतंत्र में नेता को किसी भी पार्टी में जाने या छोड़ने का अधिकार है। साथ ही उन्होंने यह भी कहा कि अगर पार्टी सही तरीके से काम करती, तो शायद नेता उसे छोड़ने का फैसला नहीं लेते।
राघव चड्ढा ने AAP क्यों छोड़ी?
राघव चड्ढा ने AAP से इस्तीफा दे दिया है, हालांकि आधिकारिक कारण स्पष्ट नहीं किए गए। भाजपा नेताओं और अन्ना हजारे ने इसे पार्टी के भीतर असंतोष और नेतृत्व की कार्यशैली से जोड़ा है।
AAP से पहले कौन-कौन से बड़े नेता पार्टी छोड़ चुके हैं?
AAP से योगेंद्र यादव, प्रशांत भूषण, शाजिया इल्मी और कुमार विश्वास जैसे कई बड़े नाम पहले ही अलग हो चुके हैं। यह सिलसिला पार्टी की स्थापना के कुछ वर्षों बाद से ही शुरू हो गया था।
भाजपा ने AAP नेताओं के इस्तीफे पर क्या कहा?
भाजपा नेताओं ने इसे केजरीवाल के नेतृत्व की विफलता बताया। केंद्रीय मंत्री एसपी सिंह बघेल ने AAP को भ्रष्टाचार में सबसे अधिक लिप्त पार्टी बताया, जबकि UP उपमुख्यमंत्री ब्रजेश पाठक ने इस्तीफा देने वाले सांसदों का स्वागत किया।
क्या AAP में यह बिखराव चुनावों पर असर डालेगा?
राजनीतिक विश्लेषकों के अनुसार AAP में बढ़ता असंतोष और नेताओं का पलायन आगामी विधानसभा और लोकसभा चुनावों में पार्टी की स्थिति को कमजोर कर सकता है। संगठनात्मक संकट पार्टी की चुनावी रणनीति पर सीधा असर डालेगा।
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