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पुरुलिया में माओवादियों के छोड़े गए कैंप से हथियार बरामद, बंगाल-झारखंड पुलिस का संयुक्त अभियान तेज़

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पुरुलिया में माओवादियों के छोड़े गए कैंप से हथियार बरामद, बंगाल-झारखंड पुलिस का संयुक्त अभियान तेज़

सारांश

पुरुलिया के दुआर्सिनी में माओवादियों के छोड़े गए कैंप से हथियार-गोला-बारूद की बरामदगी और वरिष्ठ नेता असीम मंडल की गिरफ्तारी — बंगाल-झारखंड की संयुक्त रणनीति कारगर हो रही है, पर पुलिस की नज़र अब उन छिपे शस्त्रागारों पर है जो अभी भी बरामद नहीं हुए।

मुख्य बातें

पश्चिम बंगाल पुलिस ने पुरुलिया के दुआर्सिनी में माओवादियों के छोड़े गए कैंप से भारी मात्रा में हथियार और गोला-बारूद बरामद किए।
छापेमारी मदन, रवि और मीरा जैसे वरिष्ठ माओवादी नेताओं के आत्मसमर्पण के बाद पूछताछ में मिली सूचना के आधार पर हुई।
पुलिस को संदेह है कि माओवादियों ने इलाके में अन्य गुप्त ठिकानों पर भी हथियार छिपाए हो सकते हैं।
कोलकाता पुलिस STF ने पिछले महीने वांछित माओवादी नेता असीम मंडल उर्फ आकाश को पूर्वी मिदनापुर से गिरफ्तार किया; उन पर ₹2.20 करोड़ का इनाम था।
इस वर्ष अगस्त-सितंबर में STF, बांकुरा पुलिस और झारखंड पुलिस के संयुक्त अभियानों में भी सफलता मिली थी।
पिछले वर्ष जनवरी में झारखंड पुलिस अभियान में 15 माओवादी मारे गए थे।

पश्चिम बंगाल पुलिस ने 13 अक्टूबर 2026 को पुरुलिया जिले के दुआर्सिनी इलाके में माओवादियों के एक परित्यक्त कैंप से भारी मात्रा में हथियार और गोला-बारूद बरामद किया। झारखंड सीमा के निकट बंदवान पुलिस स्टेशन के अंतर्गत चलाई गई यह छापेमारी हाल ही में आत्मसमर्पण करने वाले माओवादी कैडरों से मिली सूचना के आधार पर की गई।

कैसे हुई कार्रवाई

पुरुलिया के पुलिस अधीक्षक कुमार सनी राज ने बताया कि हाल ही में मदन, रवि और मीरा जैसे वरिष्ठ माओवादी नेताओं के आत्मसमर्पण के बाद पुलिस ने गहन पूछताछ की। उन्होंने कहा, 'संगठन के कई सदस्यों ने हथियार डाल दिए हैं। सरेंडर करने वाले माओवादियों से मिली जानकारी के आधार पर दुआर्सिनी में एक घर पर छापेमारी की गई, जहाँ हथियारों और गोला-बारूद से भरा एक बैग बरामद हुआ।'

यह कार्रवाई ऐसे समय में हुई है जब पश्चिम बंगाल पुलिस और झारखंड पुलिस ने माओवाद-विरोधी अभियानों में समन्वय उल्लेखनीय रूप से बढ़ाया है। राज के अनुसार, दोनों राज्यों की पुलिस मिलकर लगातार अभियान चला रही है।

अगस्त-सितंबर में भी मिली थी सफलता

अधिकारियों के अनुसार इस वर्ष अगस्त और सितंबर में पश्चिम बंगाल पुलिस की स्पेशल टास्क फोर्स (STF), बांकुरा जिला पुलिस और झारखंड पुलिस ने संयुक्त छापेमारी और तलाशी अभियान चलाए, जिनमें बड़ी सफलता मिली। गौरतलब है कि लगातार सुरक्षा दबाव के कारण इस पूरे इलाके में माओवादी आंदोलन पहले के मुकाबले कमज़ोर हुआ है। पिछले वर्ष जनवरी में झारखंड पुलिस के एक बड़े अभियान में 15 माओवादी मारे गए थे।

छिपे हथियारों की आशंका

परित्यक्त कैंप से हथियारों की बरामदगी ने सुरक्षा एजेंसियों की चिंता बढ़ा दी है। राज्य पुलिस के एक अधिकारी ने बताया, 'पुलिस को यह भी शक है कि माओवादियों ने कुछ और गुप्त ठिकानों पर हथियार छिपा रखे हैं। आने वाले दिनों में भी ऐसे अभियान जारी रहेंगे।' यह इस क्षेत्र में माओवादी नेटवर्क के अवशेषों की ओर इशारा करता है, भले ही संगठन के शीर्ष नेतृत्व पर शिकंजा कस रहा हो।

वरिष्ठ नेता असीम मंडल की गिरफ्तारी

इससे पहले पिछले महीने कोलकाता पुलिस की STF ने भारतीय कम्युनिस्ट पार्टी (माओवादी) के वरिष्ठ नेता असीम मंडल उर्फ आकाश, तिमिर और मनोज को गिरफ्तार किया था। मंडल पश्चिम बंगाल, झारखंड और ओडिशा में सक्रिय सर्वाधिक वांछित माओवादी नेताओं में शामिल था।

उसे पूर्वी मिदनापुर जिले के पटाशपुर में भोर में चलाए गए अभियान के दौरान दबोचा गया। उसकी गिरफ्तारी से जुड़ी सूचना के लिए कुल ₹2.20 करोड़ का इनाम घोषित था — झारखंड सरकार ने ₹1 करोड़ और ओडिशा सरकार ने ₹1.20 करोड़ रखे थे।

आगे क्या

सुरक्षा एजेंसियाँ आने वाले दिनों में पुरुलिया और आसपास के जिलों में तलाशी अभियान जारी रखने की योजना बना रही हैं। पश्चिम बंगाल और झारखंड पुलिस के बीच बढ़ता समन्वय इस बात का संकेत है कि माओवाद-विरोधी रणनीति अब अंतर-राज्यीय सहयोग पर अधिक निर्भर हो रही है।

संपादकीय दृष्टिकोण

बल्कि अंतर-राज्यीय माओवाद-विरोधी रणनीति की बदलती तस्वीर का प्रतिबिंब है। मदन, रवि और मीरा जैसे नेताओं का आत्मसमर्पण और असीम मंडल की गिरफ्तारी बताती है कि संगठन के भीतर विघटन की प्रक्रिया तेज़ हो रही है। लेकिन छिपे हथियारों की आशंका यह भी रेखांकित करती है कि माओवादी नेटवर्क ने पीछे हटते हुए भी भविष्य की संभावनाएँ सुरक्षित रखने की कोशिश की है। असली परीक्षा यह होगी कि सुरक्षा एजेंसियाँ इन गुप्त शस्त्रागारों को खोजने से पहले कोई अप्रिय घटना होती है या नहीं।
RashtraPress
13 अक्टूबर 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

पुरुलिया में माओवादी कैंप पर छापेमारी क्यों की गई?
हाल ही में आत्मसमर्पण करने वाले माओवादी नेताओं मदन, रवि और मीरा से पूछताछ में मिली सूचना के आधार पर बंदवान पुलिस स्टेशन के तहत दुआर्सिनी इलाके में छापेमारी की गई। वहाँ एक परित्यक्त घर से हथियारों और गोला-बारूद से भरा बैग बरामद हुआ।
असीम मंडल कौन है और उसे कहाँ से गिरफ्तार किया गया?
असीम मंडल उर्फ आकाश, तिमिर और मनोज भारतीय कम्युनिस्ट पार्टी (माओवादी) का वरिष्ठ नेता था, जो पश्चिम बंगाल, झारखंड और ओडिशा में सक्रिय था। उसे कोलकाता पुलिस STF ने पूर्वी मिदनापुर जिले के पटाशपुर से गिरफ्तार किया; उस पर कुल ₹2.20 करोड़ का इनाम घोषित था।
क्या इलाके में और हथियार छिपे हो सकते हैं?
पुलिस अधिकारियों के अनुसार परित्यक्त कैंप से हुई बरामदगी के बाद यह आशंका है कि माओवादियों ने कुछ अन्य गुप्त ठिकानों पर भी हथियार छिपाए हो सकते हैं। आने वाले दिनों में पुरुलिया और आसपास के इलाकों में तलाशी अभियान जारी रहेंगे।
बंगाल और झारखंड पुलिस माओवाद-विरोधी अभियानों में कैसे सहयोग कर रही हैं?
दोनों राज्यों की पुलिस ने इस वर्ष अगस्त और सितंबर में संयुक्त छापेमारी और तलाशी अभियान चलाए, जिनमें बड़ी सफलता मिली। पुरुलिया के पुलिस अधीक्षक कुमार सनी राज ने पुष्टि की है कि माओवाद-विरोधी अभियान में अंतर-राज्यीय समन्वय लगातार बढ़ाया जा रहा है।
इस इलाके में माओवादी आंदोलन की मौजूदा स्थिति क्या है?
लगातार सुरक्षा अभियानों के कारण पुरुलिया और आसपास के जिलों में माओवादी आंदोलन पहले की तुलना में कमज़ोर हुआ है। पिछले वर्ष जनवरी में झारखंड पुलिस के एक अभियान में 15 माओवादी मारे गए थे, और इस वर्ष कई वरिष्ठ नेताओं ने आत्मसमर्पण किया है।
राष्ट्र प्रेस
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