पुरुलिया में माओवादियों के छोड़े गए कैंप से हथियार बरामद, बंगाल-झारखंड पुलिस का संयुक्त अभियान तेज़
सारांश
मुख्य बातें
पश्चिम बंगाल पुलिस ने 13 अक्टूबर 2026 को पुरुलिया जिले के दुआर्सिनी इलाके में माओवादियों के एक परित्यक्त कैंप से भारी मात्रा में हथियार और गोला-बारूद बरामद किया। झारखंड सीमा के निकट बंदवान पुलिस स्टेशन के अंतर्गत चलाई गई यह छापेमारी हाल ही में आत्मसमर्पण करने वाले माओवादी कैडरों से मिली सूचना के आधार पर की गई।
कैसे हुई कार्रवाई
पुरुलिया के पुलिस अधीक्षक कुमार सनी राज ने बताया कि हाल ही में मदन, रवि और मीरा जैसे वरिष्ठ माओवादी नेताओं के आत्मसमर्पण के बाद पुलिस ने गहन पूछताछ की। उन्होंने कहा, 'संगठन के कई सदस्यों ने हथियार डाल दिए हैं। सरेंडर करने वाले माओवादियों से मिली जानकारी के आधार पर दुआर्सिनी में एक घर पर छापेमारी की गई, जहाँ हथियारों और गोला-बारूद से भरा एक बैग बरामद हुआ।'
यह कार्रवाई ऐसे समय में हुई है जब पश्चिम बंगाल पुलिस और झारखंड पुलिस ने माओवाद-विरोधी अभियानों में समन्वय उल्लेखनीय रूप से बढ़ाया है। राज के अनुसार, दोनों राज्यों की पुलिस मिलकर लगातार अभियान चला रही है।
अगस्त-सितंबर में भी मिली थी सफलता
अधिकारियों के अनुसार इस वर्ष अगस्त और सितंबर में पश्चिम बंगाल पुलिस की स्पेशल टास्क फोर्स (STF), बांकुरा जिला पुलिस और झारखंड पुलिस ने संयुक्त छापेमारी और तलाशी अभियान चलाए, जिनमें बड़ी सफलता मिली। गौरतलब है कि लगातार सुरक्षा दबाव के कारण इस पूरे इलाके में माओवादी आंदोलन पहले के मुकाबले कमज़ोर हुआ है। पिछले वर्ष जनवरी में झारखंड पुलिस के एक बड़े अभियान में 15 माओवादी मारे गए थे।
छिपे हथियारों की आशंका
परित्यक्त कैंप से हथियारों की बरामदगी ने सुरक्षा एजेंसियों की चिंता बढ़ा दी है। राज्य पुलिस के एक अधिकारी ने बताया, 'पुलिस को यह भी शक है कि माओवादियों ने कुछ और गुप्त ठिकानों पर हथियार छिपा रखे हैं। आने वाले दिनों में भी ऐसे अभियान जारी रहेंगे।' यह इस क्षेत्र में माओवादी नेटवर्क के अवशेषों की ओर इशारा करता है, भले ही संगठन के शीर्ष नेतृत्व पर शिकंजा कस रहा हो।
वरिष्ठ नेता असीम मंडल की गिरफ्तारी
इससे पहले पिछले महीने कोलकाता पुलिस की STF ने भारतीय कम्युनिस्ट पार्टी (माओवादी) के वरिष्ठ नेता असीम मंडल उर्फ आकाश, तिमिर और मनोज को गिरफ्तार किया था। मंडल पश्चिम बंगाल, झारखंड और ओडिशा में सक्रिय सर्वाधिक वांछित माओवादी नेताओं में शामिल था।
उसे पूर्वी मिदनापुर जिले के पटाशपुर में भोर में चलाए गए अभियान के दौरान दबोचा गया। उसकी गिरफ्तारी से जुड़ी सूचना के लिए कुल ₹2.20 करोड़ का इनाम घोषित था — झारखंड सरकार ने ₹1 करोड़ और ओडिशा सरकार ने ₹1.20 करोड़ रखे थे।
आगे क्या
सुरक्षा एजेंसियाँ आने वाले दिनों में पुरुलिया और आसपास के जिलों में तलाशी अभियान जारी रखने की योजना बना रही हैं। पश्चिम बंगाल और झारखंड पुलिस के बीच बढ़ता समन्वय इस बात का संकेत है कि माओवाद-विरोधी रणनीति अब अंतर-राज्यीय सहयोग पर अधिक निर्भर हो रही है।