माओवादी नेता असीम मंडल 15 साल बाद गिरफ्तार, पूर्वी मेदिनीपुर से पकड़ा; CM ने STF को दी बधाई
सारांश
मुख्य बातें
कोलकाता पुलिस की स्पेशल टास्क फोर्स (STF) ने 17 सितंबर 2026 को पूर्वी मेदिनीपुर जिले के पटाशपुर क्षेत्र से वांछित माओवादी नेता असीम मंडल उर्फ आकाश, उर्फ तिमिर, उर्फ मनोज को गिरफ्तार किया। मंडल सीपीआई (माओवादी) की केंद्रीय समिति का सदस्य और पश्चिम बंगाल राज्य समिति-I का सचिव बताया जाता है, जो पिछले 15 से अधिक वर्षों से पश्चिम बंगाल, झारखंड और ओडिशा के जंगल क्षेत्रों में सुरक्षा एजेंसियों से बचता रहा था।
गिरफ्तारी का विवरण और बरामदगी
पुलिस सूत्रों के अनुसार, असीम मंडल को पटाशपुर के ललाट क्षेत्र से हिरासत में लिया गया। गिरफ्तारी के बाद उसके पास से दो बैग बरामद किए गए, जिनमें माओवादी साहित्य, किताबें, पुस्तिकाएँ और इलेक्ट्रॉनिक संचार उपकरण मिले हैं। जाँच अधिकारियों ने बताया कि असीम मंडल की पत्नी पटाशपुर क्षेत्र की रहने वाली है और कथित तौर पर सीपीआई (माओवादी) की कार्यकर्ता है। उसे वर्ष 2010 में कोलकाता पुलिस STF ने गिरफ्तार किया था और वह फिलहाल न्यायिक हिरासत में है।
मुख्यमंत्री की प्रतिक्रिया और कड़ी चेतावनी
पश्चिम बंगाल के मुख्यमंत्री सुवेंदु अधिकारी ने गुरुवार को सोशल मीडिया पर जारी एक बयान में STF के अधिकारियों और जवानों की सराहना की। उन्होंने कहा, 'मैं कोलकाता पुलिस STF के अधिकारियों और जवानों की प्रशंसा करता हूँ, जिन्होंने सीपीआई (माओवादी) के केंद्रीय समिति सदस्य और पश्चिम बंगाल राज्य समिति-I के सचिव असीम मंडल उर्फ आकाश को पूर्वी मेदिनीपुर के ललाट, पटाशपुर क्षेत्र से गिरफ्तार किया।'
मुख्यमंत्री ने यह भी स्पष्ट किया कि पश्चिम बंगाल सरकार राज्य में 'लाल आतंक' के नेटवर्क को फिर से खड़ा करने या उसका विस्तार करने की किसी भी कोशिश को बर्दाश्त नहीं करेगी। उन्होंने कहा, 'किसी भी उग्रवादी विचारधारा को राज्य के लोगों की सुरक्षा और विकास के लिए खतरा बनने नहीं दिया जाएगा। ऐसे किसी भी प्रयास के खिलाफ कानून के तहत सख्त कार्रवाई की जाएगी।'
असीम मंडल की पृष्ठभूमि और आपराधिक इतिहास
पश्चिम मेदिनीपुर जिले के चंद्रकोणा थाना क्षेत्र के फुलचक गाँव के रहने वाले असीम मंडल के बारे में बताया जाता है कि वह 1980 के दशक में छात्र जीवन के दौरान वामपंथी उग्रवादी गतिविधियों से जुड़ा था। बाद में वह पीपुल्स वॉर ग्रुप में शामिल हो गया और पश्चिम बंगाल के सारेंगा और गोयालतोर क्षेत्रों के साथ-साथ झारखंड के पूर्वी सिंहभूम जिले के गुराबांदा क्षेत्र में सक्रिय रहा।
सुरक्षा एजेंसियों के रिकॉर्ड के अनुसार, उसके खिलाफ झारखंड, ओडिशा और पश्चिम बंगाल में करीब 55 गंभीर आपराधिक मामले दर्ज हैं, जिनमें से कई सुरक्षा बलों पर हमलों और मुठभेड़ों से जुड़े हैं। गौरतलब है कि असीम मंडल ने पश्चिम बंगाल के जंगलमहल क्षेत्र में हुए लालगढ़ आंदोलन में भी महत्वपूर्ण भूमिका निभाई थी।
वर्ष 2010 में उसे पार्टी की पश्चिम बंगाल राज्य समिति का सचिव बनाया गया था। पुलिस सूत्रों के मुताबिक, वर्ष 2011 में वरिष्ठ माओवादी नेता किशनजी के मारे जाने के बाद असीम मंडल अधिकांश समय भूमिगत रहकर काम करता रहा।
इनाम और व्यापक सुरक्षा संदर्भ
असीम मंडल की गिरफ्तारी में सहायक सूचना देने वाले के लिए पहले ₹2.20 करोड़ के इनाम की घोषणा की गई थी। पुलिस अधिकारियों का मानना है कि यह गिरफ्तारी पश्चिम बंगाल, झारखंड और ओडिशा के आदिवासी एवं जंगल इलाकों में सक्रिय वामपंथी उग्रवादी नेटवर्क को कमज़ोर करने की दिशा में एक बड़ी सफलता है। यह ऐसे समय में आई है जब केंद्र और राज्य सरकारें माओवाद-प्रभावित क्षेत्रों में समन्वित अभियान तेज़ कर रही हैं।
आगे की जाँच और संभावित खुलासे
बरामद इलेक्ट्रॉनिक संचार उपकरणों और माओवादी साहित्य की जाँच से नेटवर्क के अन्य सदस्यों और संपर्क सूत्रों का पता चलने की संभावना जताई जा रही है। जाँच एजेंसियाँ अब मंडल से पूछताछ के आधार पर बंगाल-झारखंड-ओडिशा क्षेत्रीय समिति के संचालन ढाँचे को उजागर करने का प्रयास करेंगी।