जैश-ए-मोहम्मद संदिग्ध हमीम मंडल की सहयोगी अर्पिता सरकार झारखंड से गिरफ्तार, 'हनी-ट्रैप' एंगल की जांच
सारांश
मुख्य बातें
पश्चिम बंगाल पुलिस की स्पेशल टास्क फोर्स (एसटीएफ) ने 1 अगस्त 2026 को झारखंड के साहिबगंज जिले से अर्पिता सरकार को गिरफ्तार किया। अर्पिता पर आरोप है कि वह प्रतिबंधित आतंकी संगठन जैश-ए-मोहम्मद (JeM) से कथित तौर पर जुड़े संदिग्ध हमीम मंडल की करीबी सहयोगी है। इस गिरफ्तारी के साथ ही एसटीएफ एक बड़े कथित आतंकी नेटवर्क की परतें खोलने में जुटी है।
गिरफ्तारी कैसे हुई
जांच एजेंसी के सूत्रों के अनुसार, हमीम मंडल को शुक्रवार को पूर्वी बर्दवान जिले के बर्दवान शहर स्थित एक हाउसिंग कॉम्प्लेक्स के फ्लैट से गिरफ्तार किया गया था। उससे की गई पूछताछ के दौरान अर्पिता सरकार का नाम सामने आया, जिसके बाद एसटीएफ की एक टीम ने साहिबगंज में स्थानीय पुलिस की सहायता से छापेमारी कर उसे शुक्रवार रात गिरफ्तार किया।
आपत्तिजनक दस्तावेज और सुरक्षा चिंताएँ
हमीम मंडल के फ्लैट की तलाशी के दौरान एसटीएफ को कथित तौर पर पश्चिम बंगाल विधानसभा में नेता प्रतिपक्ष सुवेंदु अधिकारी के शेड्यूल और गतिविधियों से संबंधित आपत्तिजनक दस्तावेज मिले। इससे जांचकर्ताओं को संदेह हुआ कि अधिकारी एक संभावित निशाना हो सकते थे। अधिकारियों ने बताया कि केंद्रीय खुफिया इनपुट के आधार पर केंद्र सरकार समय-समय पर सुवेंदु अधिकारी की सुरक्षा व्यवस्था की समीक्षा करती रही है और उसे मजबूत करती रही है, क्योंकि इनपुट में चरमपंथी संगठनों से संभावित खतरों का संकेत मिला था।
पुलवामा कनेक्शन का दावा
एसटीएफ सूत्रों ने दावा किया कि हमीम मंडल के कश्मीर में सज्जाद भट समूह से सीधे संबंध थे। सज्जाद भट की पहचान 2019 के पुलवामा आतंकी हमले के मुख्य आरोपियों में से एक के रूप में हुई थी। जांच टीम को संदेह है कि हमीम मंडल इस समूह से करीबी तौर पर जुड़ा हुआ था, हालांकि इसकी स्वतंत्र पुष्टि अभी बाकी है।
हनी-ट्रैप एंगल की जांच
सूत्रों के अनुसार, अर्पिता सरकार की गिरफ्तारी के बाद एसटीएफ इस कथित नेटवर्क के संचालन में 'हनी-ट्रैपिंग' के पहलू की भी जांच कर रही है। एक निचली अदालत ने हमीम मंडल को 14 दिन की एसटीएफ हिरासत में भेज दिया है। अर्पिता सरकार को शनिवार को कोलकाता की अदालत में पेश किए जाने की संभावना है, जहाँ अभियोजन पक्ष आगे की पूछताछ के लिए उसकी पुलिस हिरासत की माँग करेगा।
आगे क्या होगा
यह मामला ऐसे समय में सामने आया है जब पश्चिम बंगाल में सुरक्षा एजेंसियाँ कट्टरपंथी नेटवर्क की निगरानी को लेकर पहले से सतर्क हैं। एसटीएफ की जांच अब इस कथित नेटवर्क की व्यापकता और उसके अन्य संभावित सदस्यों की पहचान पर केंद्रित है। आने वाले दिनों में और गिरफ्तारियाँ हो सकती हैं।