23 अक्टूबर 2026
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माओवादी दंपती मंगल-मालती ने कोलकाता पुलिस आयुक्त के सामने किया आत्मसमर्पण, AK-47 भी सौंपी

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माओवादी दंपती मंगल-मालती ने कोलकाता पुलिस आयुक्त के सामने किया आत्मसमर्पण, AK-47 भी सौंपी

सारांश

पश्चिम बंगाल और झारखंड में मोस्ट-वांटेड माओवादी दंपती मंगल और मालती ने कोलकाता पुलिस आयुक्त के सामने AK-47 सहित आत्मसमर्पण किया। सारंडा में सुरक्षा बलों के बढ़ते दबाव को उन्होंने अपने फैसले की मुख्य वजह बताया। दोनों पर कुल ₹7 लाख का इनाम था।

मुख्य बातें

माओवादी दंपती मंगल और मालती ने 23 अक्टूबर 2026 को लालबाजार, कोलकाता पुलिस मुख्यालय में आत्मसमर्पण किया।
आत्मसमर्पण के दौरान एक AK-47 और एक इंसास राइफल पुलिस को सौंपी गई।
मंगल पर ₹5 लाख और मालती पर ₹2 लाख का इनाम घोषित था।
मंगल दिवंगत माओवादी नेता कोटेश्वर राव उर्फ किशनजी का करीबी माना जाता था, जो नवंबर 2011 में मुठभेड़ में मारा गया था।
सुरक्षा बलों के दबाव से झारखंड के सारंडा वन क्षेत्र में माओवादी गतिविधियाँ कमज़ोर पड़ी हैं।
इससे पहले माओवादी नेता पुष्पा भी कुछ महीने पहले कोलकाता में आत्मसमर्पण कर चुकी हैं।

पश्चिम बंगाल और झारखंड में मोस्ट-वांटेड माओवादी दंपती मंगल और मालती ने शुक्रवार, 23 अक्टूबर 2026 को लालबाजार स्थित कोलकाता पुलिस मुख्यालय में पुलिस आयुक्त अजय के. नंद के सामने आत्मसमर्पण कर दिया। आत्मसमर्पण के दौरान इस दंपती ने पुलिस को एक AK-47 और एक इंसास राइफल भी सौंपी।

कौन हैं मंगल और मालती

पुलिस के अनुसार, दोनों मूलतः पश्चिम बंगाल के निवासी हैं। मंगल पश्चिम मेदिनीपुर के सालबोनी का रहने वाला है, जबकि मालती झारग्राम जिले के गोपीबल्लभपुर की है। मंगल सबसे पहले झारखंड के दलमा क्षेत्र में माओवादी गतिविधियों से जुड़ा और बाद में सारंडा इलाके में सक्रिय रहा। मालती बाद में इस आंदोलन से जुड़ी और उसकी भूमिका भी मुख्यतः झारखंड तक सीमित रही।

पुलिस आयुक्त अजय के. नंद ने मीडिया को बताया कि मंगल 2010 के आसपास माओवादी आंदोलन से जुड़ा था और 2011-12 के बाद झारखंड चला गया था। वह दिवंगत माओवादी नेता कोटेश्वर राव उर्फ किशनजी का करीबी माना जाता था, जो नवंबर 2011 में एक पुलिस मुठभेड़ में मारा गया था।

इनामी माओवादियों का समर्पण

अधिकारियों ने मंगल पर ₹5 लाख और मालती पर ₹2 लाख का इनाम घोषित किया हुआ था। हालाँकि उनकी गतिविधियाँ मुख्यतः झारखंड में थीं, वे दोनों राज्यों की सुरक्षा एजेंसियों की सूची में शामिल थे।

आत्मसमर्पण के अपने फैसले के बारे में मंगल ने कहा, 'हम दोनों ने हिंसा का रास्ता छोड़कर समाज की मुख्यधारा में लौटने का फैसला किया है। इसीलिए हम यहाँ आए और आत्मसमर्पण कर दिया।' उसने यह भी स्वीकार किया कि उसे एहसास हो गया था कि सशस्त्र संघर्ष से सामाजिक बदलाव नहीं लाया जा सकता।

सुरक्षा बलों का बढ़ता दबाव

पुलिस के मुताबिक, सुरक्षा बलों के लगातार दबाव के कारण माओवादियों ने इस साल की शुरुआत में झारखंड के सारंडा वन क्षेत्र को छोड़ना शुरू कर दिया था। गौरतलब है कि सुरक्षा बलों की सूची में पश्चिम बंगाल के लगभग 13 माओवादी थे, जिन्हें समय-समय पर गिरफ्तार किया गया।

यह ऐसे समय में आया है जब झारखंड में हाल ही में तीन माओवादियों को गिरफ्तार किया गया था। इससे कुछ महीने पहले एक अन्य वांछित माओवादी नेता पुष्पा ने भी कोलकाता में आत्मसमर्पण किया था। मंगल और मालती का आत्मसमर्पण इस क्रम में नवीनतम और उल्लेखनीय कड़ी है।

आगे की राह

दंपती के आत्मसमर्पण के बाद पुलिस ने उनसे पूछताछ शुरू कर दी है। उनके खिलाफ दर्ज मामलों और कानूनी प्रक्रिया के बारे में अधिकारियों की ओर से आधिकारिक जानकारी आना अभी बाकी है। विशेषज्ञों का मानना है कि इस तरह के आत्मसमर्पण माओवादी नेटवर्क को कमज़ोर करने की दिशा में एक सकारात्मक संकेत हैं।

संपादकीय दृष्टिकोण

और आत्मसमर्पण की यह श्रृंखला — पुष्पा, फिर मंगल-मालती — संकेत देती है कि वैचारिक प्रतिबद्धता के साथ-साथ व्यावहारिक संभावना भी खत्म होती जा रही है। असली सवाल यह है कि क्या सरकार के पास इन समर्पित माओवादियों के पुनर्वास के लिए पर्याप्त और विश्वसनीय तंत्र है — क्योंकि बिना उसके, समर्पण की राह दूसरों के लिए आकर्षक नहीं बनेगी।
RashtraPress
23 अक्टूबर 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

माओवादी दंपती मंगल और मालती ने कहाँ आत्मसमर्पण किया?
मंगल और मालती ने 23 अक्टूबर 2026 को लालबाजार स्थित कोलकाता पुलिस मुख्यालय में पुलिस आयुक्त अजय के. नंद के सामने आत्मसमर्पण किया। इस दौरान उन्होंने एक AK-47 और एक इंसास राइफल भी सौंपी।
मंगल और मालती पर कितना इनाम था?
अधिकारियों ने मंगल पर ₹5 लाख और मालती पर ₹2 लाख का इनाम घोषित किया हुआ था, यानी दोनों पर कुल ₹7 लाख का इनाम था। दोनों पश्चिम बंगाल और झारखंड में वांछित थे।
मंगल का किशनजी से क्या संबंध था?
कोलकाता पुलिस आयुक्त के अनुसार, मंगल दिवंगत माओवादी नेता कोटेश्वर राव उर्फ किशनजी का करीबी माना जाता था। किशनजी नवंबर 2011 में एक पुलिस मुठभेड़ में मारा गया था।
माओवादियों ने सारंडा वन क्षेत्र क्यों छोड़ा?
पुलिस के मुताबिक, सुरक्षा बलों के लगातार दबाव के कारण माओवादियों ने इस साल की शुरुआत में झारखंड के सारंडा वन क्षेत्र को छोड़ना शुरू किया। वहाँ उनके लिए गतिविधियाँ जारी रखना कठिन हो गया था।
मंगल ने आत्मसमर्पण का फैसला क्यों किया?
मंगल ने खुद बताया कि उसे एहसास हो गया था कि सशस्त्र संघर्ष से सामाजिक बदलाव नहीं लाया जा सकता। उसने कहा कि दोनों ने हिंसा छोड़कर समाज की मुख्यधारा में लौटने का फैसला किया।
राष्ट्र प्रेस
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