माओवादी दंपती मंगल-मालती ने कोलकाता पुलिस आयुक्त के सामने किया आत्मसमर्पण, AK-47 भी सौंपी
सारांश
मुख्य बातें
पश्चिम बंगाल और झारखंड में मोस्ट-वांटेड माओवादी दंपती मंगल और मालती ने शुक्रवार, 23 अक्टूबर 2026 को लालबाजार स्थित कोलकाता पुलिस मुख्यालय में पुलिस आयुक्त अजय के. नंद के सामने आत्मसमर्पण कर दिया। आत्मसमर्पण के दौरान इस दंपती ने पुलिस को एक AK-47 और एक इंसास राइफल भी सौंपी।
कौन हैं मंगल और मालती
पुलिस के अनुसार, दोनों मूलतः पश्चिम बंगाल के निवासी हैं। मंगल पश्चिम मेदिनीपुर के सालबोनी का रहने वाला है, जबकि मालती झारग्राम जिले के गोपीबल्लभपुर की है। मंगल सबसे पहले झारखंड के दलमा क्षेत्र में माओवादी गतिविधियों से जुड़ा और बाद में सारंडा इलाके में सक्रिय रहा। मालती बाद में इस आंदोलन से जुड़ी और उसकी भूमिका भी मुख्यतः झारखंड तक सीमित रही।
पुलिस आयुक्त अजय के. नंद ने मीडिया को बताया कि मंगल 2010 के आसपास माओवादी आंदोलन से जुड़ा था और 2011-12 के बाद झारखंड चला गया था। वह दिवंगत माओवादी नेता कोटेश्वर राव उर्फ किशनजी का करीबी माना जाता था, जो नवंबर 2011 में एक पुलिस मुठभेड़ में मारा गया था।
इनामी माओवादियों का समर्पण
अधिकारियों ने मंगल पर ₹5 लाख और मालती पर ₹2 लाख का इनाम घोषित किया हुआ था। हालाँकि उनकी गतिविधियाँ मुख्यतः झारखंड में थीं, वे दोनों राज्यों की सुरक्षा एजेंसियों की सूची में शामिल थे।
आत्मसमर्पण के अपने फैसले के बारे में मंगल ने कहा, 'हम दोनों ने हिंसा का रास्ता छोड़कर समाज की मुख्यधारा में लौटने का फैसला किया है। इसीलिए हम यहाँ आए और आत्मसमर्पण कर दिया।' उसने यह भी स्वीकार किया कि उसे एहसास हो गया था कि सशस्त्र संघर्ष से सामाजिक बदलाव नहीं लाया जा सकता।
सुरक्षा बलों का बढ़ता दबाव
पुलिस के मुताबिक, सुरक्षा बलों के लगातार दबाव के कारण माओवादियों ने इस साल की शुरुआत में झारखंड के सारंडा वन क्षेत्र को छोड़ना शुरू कर दिया था। गौरतलब है कि सुरक्षा बलों की सूची में पश्चिम बंगाल के लगभग 13 माओवादी थे, जिन्हें समय-समय पर गिरफ्तार किया गया।
यह ऐसे समय में आया है जब झारखंड में हाल ही में तीन माओवादियों को गिरफ्तार किया गया था। इससे कुछ महीने पहले एक अन्य वांछित माओवादी नेता पुष्पा ने भी कोलकाता में आत्मसमर्पण किया था। मंगल और मालती का आत्मसमर्पण इस क्रम में नवीनतम और उल्लेखनीय कड़ी है।
आगे की राह
दंपती के आत्मसमर्पण के बाद पुलिस ने उनसे पूछताछ शुरू कर दी है। उनके खिलाफ दर्ज मामलों और कानूनी प्रक्रिया के बारे में अधिकारियों की ओर से आधिकारिक जानकारी आना अभी बाकी है। विशेषज्ञों का मानना है कि इस तरह के आत्मसमर्पण माओवादी नेटवर्क को कमज़ोर करने की दिशा में एक सकारात्मक संकेत हैं।