क्या अगली जनगणना में असम में 'बांग्लादेशी मुस्लिमों' की जनसंख्या 40 प्रतिशत से अधिक हो सकती है: सीएम हिमंत बिस्वा सरमा?

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क्या अगली जनगणना में असम में 'बांग्लादेशी मुस्लिमों' की जनसंख्या 40 प्रतिशत से अधिक हो सकती है: सीएम हिमंत बिस्वा सरमा?

सारांश

असम के सीएम हिमंत बिस्वा सरमा का कहना है कि अगली जनगणना में 'बांग्लादेशी मुसलमानों' की जनसंख्या 40 प्रतिशत पार कर सकती है। यह डेमोग्राफिक बदलाव राज्य की राजनीति और समाज पर गहरा असर डाल सकता है। जानिए इसके पीछे के कारण और आगामी चुनावों पर इसके प्रभाव के बारे में।

मुख्य बातें

डेमोग्राफिक बदलाव असम की राजनीति को प्रभावित कर सकता है।
अगली जनगणना में 'बांग्लादेशी मुसलमानों' की जनसंख्या महत्वपूर्ण होगी।
सीएम सरमा ने विपक्ष को चुनौती दी है।
आगामी विधानसभा चुनावों में भाजपा का प्रभाव बढ़ सकता है।

गुवाहाटी, 8 जनवरी (राष्ट्र प्रेस)। असम के मुख्यमंत्री हिमंत बिस्वा सरमा ने गुरुवार को यह बात फिर से कही कि राज्य में डेमोग्राफिक बदलाव के कारण इसकी आबादी का प्रोफाइल काफी बदल सकता है। उन्होंने यह भी संकेत दिया कि अगली जनगणना में असम की जनसंख्या में 'बांग्लादेशी मुसलमानों' का हिस्सा लगभग 40 प्रतिशत हो सकता है।

सीएम सरमा ने एक सरकारी कार्यक्रम के दौरान पत्रकारों से बातचीत करते हुए कहा कि यह जनगणना असम के लिए 'दुर्भाग्यपूर्ण खबर' लेकर आएगी, और उन्होंने आरोप लगाया कि बांग्लादेशी मूल के मुसलमानों की जनसंख्या दशकों से लगातार बढ़ रही है।

उन्होंने कहा, "जनगणना से यह स्पष्ट होगा कि बांग्लादेशी मुसलमानों की संख्या राज्य की जनसंख्या के लगभग 40 प्रतिशत तक पहुँच सकती है।"

मुख्यमंत्री ने यह भी याद दिलाया कि पिछले साल जुलाई में उन्होंने चेतावनी दी थी कि यदि वर्तमान विकास दर बनी रही, तो 2041 तक असम में मुस्लिम जनसंख्या हिंदुओं के बराबर हो सकती है।

2011 की जनगणना के अनुसार, असम की कुल जनसंख्या 3.12 करोड़ थी, जिसमें मुसलमानों की संख्या 1.07 करोड़ थी, जो कि 34.22 प्रतिशत थी, जबकि हिंदुओं की संख्या 1.92 करोड़ या 61.47 प्रतिशत थी।

देशव्यापी जनगणना, जो मूल रूप से 2021 में होने वाली थी, लेकिन कोविड-19 महामारी के कारण स्थगित कर दी गई थी, अब दो चरणों में आयोजित की जाएगी।

मकानों की सूची और आवास जनगणना अप्रैल और सितंबर 2026 के बीच होगी, जिसके बाद फरवरी 2027 में जनसंख्या गणना होगी।

मुख्यमंत्री सरमा ने असम में चल रहे मतदाता सूची के विशेष गहन संशोधन का भी उल्लेख किया और कहा कि सभी भाजपा विधायकों और बूथ-स्तरीय एजेंटों को निर्धारित कानूनी प्रक्रिया के माध्यम से किसी भी 'संदिग्ध व्यक्ति' को चिह्नित करने का निर्देश दिया गया है।

उन्होंने कहा, "हम यह सुनिश्चित करने का प्रयास करेंगे कि संदिग्ध मुस्लिम वोटों की पहचान की जाए और उन्हें हटाया जाए। विधायकों और बूथ स्तर के एजेंटों से औपचारिक रूप से आपत्तियां उठाने के लिए कहा गया है।"

विपक्ष के आरोपों को खारिज करते हुए कि भाजपा का समर्थन न करने वाले मतदाताओं को जानबूझकर सूची से हटाया जा रहा है, सीएम सरमा ने कहा कि यदि किसी राजनीतिक दल को लगता है कि योग्य मतदाताओं को बाहर कर दिया गया है, तो उन्हें प्रेस कॉन्फ्रेंस करने के बजाय संबंधित फॉर्म जमा करके अधिकारियों से संपर्क करना चाहिए।

सीएम सरमा ने कांग्रेस पर निशाना साधते हुए दावा किया कि पार्टी ने असम में अपनी प्रासंगिकता खो दी है।

उन्होंने कहा, "अवैध बांग्लादेशियों को छोड़कर, कौन से स्वदेशी लोग कांग्रेस को वोट देंगे?"

उन्होंने यह भी दावा किया कि मार्च-अप्रैल 2026 में होने वाले आगामी राज्य विधानसभा चुनावों में विपक्ष का बहुत कम प्रभाव होगा, और यह भी कहा कि वे जमीनी स्तर पर सक्रिय नहीं हैं। असम चुनावों में सीट-शेयरिंग के बारे में मुख्यमंत्री ने कहा कि भाजपा इस पर 15 फरवरी तक अंतिम फैसला लेगी।

संपादकीय दृष्टिकोण

बल्कि पूरे देश के लिए महत्वपूर्ण है। डेमोग्राफिक बदलाव और राजनीतिक प्रभावों का अध्ययन आवश्यक है। सभी पक्षों को इसे गंभीरता से लेना चाहिए।
RashtraPress
13 मई 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

अगली जनगणना कब होगी?
अगली जनगणना अप्रैल और सितंबर 2026 के बीच मकानों की सूची के साथ होगी, उसके बाद फरवरी 2027 में जनसंख्या गणना होगी।
सीएम सरमा ने क्या कहा?
उन्होंने कहा कि बांग्लादेशी मुसलमानों की संख्या अगली जनगणना में 40 प्रतिशत तक पहुँच सकती है।
असम की वर्तमान जनसंख्या क्या है?
2011 की जनगणना के अनुसार, असम की कुल जनसंख्या 3.12 करोड़ है।
मतदाता सूची में संशोधन कब हो रहा है?
मुख्यमंत्री ने असम में चल रहे मतदाता सूची के विशेष गहन संशोधन का उल्लेख किया।
कांग्रेस की स्थिति क्या है?
सीएम सरमा ने दावा किया कि कांग्रेस ने असम में अपनी प्रासंगिकता खो दी है।
राष्ट्र प्रेस
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