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डीके शिवकुमार ने कहा, कर्नाटक सरकार की गारंटियाँ बोझ हैं, लेकिन लोगों को नहीं होगा मानसिक तनाव

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डीके शिवकुमार ने कहा, कर्नाटक सरकार की गारंटियाँ बोझ हैं, लेकिन लोगों को नहीं होगा मानसिक तनाव

सारांश

डिप्टी सीएम डीके शिवकुमार ने 'कुसुमा संजीविनी' पहल का उद्घाटन करते हुए कहा कि कांग्रेस सरकार की योजनाएं कर्नाटक को आर्थिक बोझ में डाल सकती हैं, परंतु लोगों को मानसिक तनाव से बचाने का प्रयास कर रही हैं।

मुख्य बातें

कर्नाटक सरकार की योजनाएं आर्थिक बोझ हो सकती हैं लोगों को मानसिक तनाव से बचाने का प्रयास हीमोफीलिया के मरीजों के लिए विशेष इलाज सरकार ने 5 गारंटियां दी हैं स्वास्थ्य क्षेत्र में क्रांति लाने का वादा

बेंगलुरु, २५ फरवरी (राष्ट्र प्रेस)। भाजपा द्वारा कांग्रेस सरकार की पांच गारंटी को कर्नाटक को दिवालिया की ओर धकेलने की आलोचना के बीच, डिप्टी सीएम डीके शिवकुमार ने 'कुसुमा संजीविनी' पहल के बारे में बात करते हुए कहा कि यह पहल हीमोफीलिया के मरीजों को बचाव का इलाज उपलब्ध कराती है। उन्होंने कहा कि जबकि ये योजनाएं राज्य सरकार पर बोझ बन सकती हैं, लेकिन सरकार यह सुनिश्चित करना चाहती है कि आर्थिक समस्याओं के कारण लोगों को मानसिक तनाव का सामना न करना पड़े।

डिप्टी सीएम ने बुधवार को बेंगलुरु के नेहरू प्लेनेटेरियम में हेल्थ एंड फैमिली वेलफेयर डिपार्टमेंट के एक कार्यक्रम में कुसुमा संजीविनी पहल के तहत हीमोफीलिया के मरीजों के लिए प्रिवेंटिव ट्रीटमेंट और 108 एम्बुलेंस सेवा का उद्घाटन किया। उन्होंने कहा कि हमने पांच गारंटी दी हैं, जिनमें महिलाओं के लिए फ्री बस सेवा, फ्री बिजली और २ हजार रुपए की वित्तीय सहायता शामिल है। ये सभी लाभ राज्य सरकार के लिए बोझ बन सकते हैं, लेकिन हम लोगों को आर्थिक चिंताओं से मुक्त रखना चाहते हैं।

शिवकुमार ने आगे कहा कि अगर लोगों में विश्वास है, तो वे मदद के लिए आगे आएंगे। सरकार का उद्देश्य है कि लोगों में आर्थिक विश्वास और मानसिक ताकत का संचार हो, ताकि वे आर्थिक रूप से मजबूत बन सकें।

उन्होंने हीमोफीलिया के बारे में कहा कि यह एक गंभीर बीमारी है और आज यहां मरीज, शोधकर्ता और डॉक्टर एकत्र हुए हैं। यह एक विशेष अवसर है। हमें यह मानना होगा कि किसी भी बच्चे या व्यक्ति को ऐसी बीमारियों का सामना नहीं करना चाहिए; यह प्रकृति का नियम है। इसमें बच्चों या उनके माता-पिता की कोई गलती नहीं है। स्वास्थ्य मंत्री दिनेश गुंडू राव ने बताया कि हर महीने एक इंजेक्शन की कीमत लगभग ५० हजार रुपए है और हर मरीज के लिए सालाना ५ लाख रुपए का खर्च आता है। खर्च कोई मुद्दा नहीं है। इस बीमारी से पीड़ित लोगों को खुद को लाचार नहीं महसूस करना चाहिए। माता-पिता की आर्थिक समस्याओं को देखते हुए, सरकार ने हस्तक्षेप का निर्णय लिया है।

उन्होंने आगे बताया कि स्वास्थ्य मंत्री ने कैबिनेट के सामने प्रस्ताव रखा था और इसे स्वीकृति मिल गई थी। यह मायने नहीं रखता कि देश में कौन सी सरकार यह काम करती है, लेकिन कर्नाटक को लीड करना चाहिए और हमने यह निर्णय लिया है। शिवकुमार ने बताया कि वह पहले मेडिकल एजुकेशन मंत्री रह चुके हैं। कर्नाटक मेडिकल एजुकेशन में एक लीडर है। आप किसी भी देश में जा सकते हैं और पाएंगे कि हमारे डॉक्टर बहुत अच्छा कर रहे हैं। हर साल, हम १३,९४० डॉक्टर तैयार करते हैं, जिनमें ३ हजार से अधिक पोस्टग्रेजुएट हैं। कर्नाटक देश का एकमात्र राज्य है जहां लगभग ७० मेडिकल कॉलेज हैं और हर जिले में कम से कम एक मेडिकल कॉलेज है।

उन्होंने कहा कि राज्य में एक लाख से अधिक पैरामेडिकल स्टाफ को प्रशिक्षित किया जाता है। जब मैं जिम्मेदार था, तब मैंने खुले दिल से अनुमति दी थी। आज, केरल और असम से युवा लड़के और लड़कियां यहां प्रशिक्षण के लिए आते हैं और बाद में विदेश में बस जाते हैं। मानवता की सेवा करना हमारी सरकार की सबसे बड़ी प्रतिबद्धता है। उन्होंने मरीजों से अपील की कि वे उम्मीद न खोएं और बच्चों को भी ऐसा नहीं करना चाहिए। कुछ भी असंभव नहीं है। भगवान अवसर देते हैं, तोहफे या श्राप नहीं। हमारा हेल्थ डिपार्टमेंट स्वास्थ्य सेवा क्षेत्र में एक क्रांति ला रहा है। लगातार सेवा को सुनिश्चित करने के लिए इस सरकार को वापस लाएं। उन्होंने आगे कहा कि सरकार हेल्थ डिपार्टमेंट की किसी भी मांग पर कभी समझौता नहीं करेगी।

उन्होंने कहा कि माता-पिता को अब इलाज पर हर महीने ५० हजार रुपए खर्च करने की चिंता नहीं करनी पड़ेगी। स्वास्थ्य से खुशहाली आती है। आपकी सरकार हमेशा आपके साथ खड़ी है। किसी भी समय उम्मीद मत खोना। यह कांग्रेस सरकार हर कदम पर आपके साथ खड़ी रहेगी।

संपादकीय दृष्टिकोण

विरोधी दलों का आरोप है कि ये गारंटियां सरकार पर बोझ हैं। ऐसे में यह देखना होगा कि आगे सरकार किस प्रकार की नीतियों को लागू करती है।
RashtraPress
3 नवंबर 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

कुसुमा संजीविनी पहल क्या है?
यह पहल हीमोफीलिया के मरीजों को बचाव का इलाज प्रदान करती है।
डीके शिवकुमार ने किस कार्यक्रम में हिस्सा लिया?
उन्होंने नेहरू प्लेनेटेरियम में हेल्थ एंड फैमिली वेलफेयर डिपार्टमेंट के एक इवेंट में हिस्सा लिया।
कर्नाटक सरकार की पांच गारंटियों में क्या शामिल है?
इन गारंटियों में महिलाओं के लिए फ्री बस सेवा, फ्री बिजली और 2000 रुपए की वित्तीय मदद शामिल है।
सरकार का उद्देश्य क्या है?
सरकार का उद्देश्य लोगों को आर्थिक चिंताओं से मुक्त करना और मानसिक ताकत प्रदान करना है।
क्या सरकार ने स्वास्थ्य क्षेत्र में कोई पहल की है?
हाँ, सरकार ने कुसुमा संजीविनी पहल के तहत महत्वपूर्ण योजनाएं लागू की हैं।
राष्ट्र प्रेस
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