असम में बांस क्रांति: गुवाहाटी के पार्कों में उतरेगी BIS प्रमाणित बांस साइकिल, CM सरमा ने की सवारी
सारांश
मुख्य बातें
असम के मुख्यमंत्री हिमंत बिस्व सरमा ने 2 अक्टूबर 2026 को घोषणा की कि राज्य सरकार जल्द ही गुवाहाटी के विभिन्न पार्कों में भारतीय मानक ब्यूरो (BIS) प्रमाणित बांस की साइकिल आम लोगों के उपयोग के लिए उपलब्ध कराएगी। यह कदम व्यावसायिक लॉन्च से पहले उपभोक्ताओं से सीधा फीडबैक जुटाने की रणनीति के तहत उठाया गया है।
मुख्यमंत्री ने खुद की सवारी
मुख्यमंत्री सरमा ने बताया कि उन्होंने हाल ही में इस बांस साइकिल की व्यक्तिगत रूप से सवारी की है। साइकिल की पूरी संरचना बांस से निर्मित है और इसे BIS का प्रमाणन प्राप्त हो चुका है, जो इसे राष्ट्रीय गुणवत्ता मानकों पर खरा साबित करता है। उन्होंने सोशल मीडिया पर लिखा, 'जानना चाहते हैं कि मैं क्या चला रहा हूं? यह बांस की साइकिल है, जिसकी संरचना पूरी तरह बांस से बनी है और इसे BIS से प्रमाणित किया गया है।'
गुवाहाटी पार्कों में पायलट परीक्षण
आने वाले दिनों में गुवाहाटी के चुनिंदा पार्कों में ये साइकिलें रखी जाएंगी, जहाँ नागरिक इन्हें चलाकर अपना अनुभव साझा कर सकेंगे। इस पायलट कार्यक्रम से डिजाइन, उपयोग में सुविधा और प्रदर्शन से जुड़े महत्वपूर्ण सुझाव मिलने की उम्मीद है। प्राप्त फीडबैक के आधार पर उत्पाद में आवश्यक सुधार करके इसे व्यापक स्तर पर बाज़ार में उतारा जाएगा।
बांस की अपार संभावनाएँ
मुख्यमंत्री ने बताया कि असम में पाए जाने वाले बांस से 800 से अधिक प्रकार के उप-उत्पाद तैयार किए जा सकते हैं। उन्होंने कहा, 'इसका इस्तेमाल मेथनॉल से लेकर एटीएफ (ATF), मजबूत संरचनाओं और कई अन्य क्षेत्रों में बड़े पैमाने पर किया जा सकता है।' यह पहल बांस आधारित अर्थव्यवस्था को मजबूत करने और स्थानीय रोजगार के नए अवसर सृजित करने के व्यापक रोडमैप का हिस्सा है।
केंद्र सरकार की नीति का लाभ
सरमा ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की सरकार द्वारा बांस को 'घास' की श्रेणी में रखने के नीतिगत निर्णय का भी उल्लेख किया। उनके अनुसार, इस वर्गीकरण परिवर्तन से बांस की खेती, प्रसंस्करण और औद्योगिक उपयोग में काफी नए रास्ते खुले हैं। गौरतलब है कि पहले बांस को वन अधिनियम के तहत 'वृक्ष' माना जाता था, जिससे इसकी कटाई और परिवहन पर कड़े प्रतिबंध थे।
टिकाऊ विकास की दिशा में कदम
यह पहल ऐसे समय में सामने आई है जब विनिर्माण और बुनियादी ढाँचे के क्षेत्र में टिकाऊ और स्थानीय संसाधनों से तैयार विकल्पों की माँग तेजी से बढ़ रही है। बांस की साइकिल को इस बात के जीवंत उदाहरण के रूप में प्रस्तुत किया जा रहा है कि पारंपरिक और सहज उपलब्ध संसाधनों को आधुनिक उपभोक्ता उत्पादों में किस तरह परिवर्तित किया जा सकता है। असम सरकार का लक्ष्य बांस को केवल एक कच्चे माल के रूप में नहीं, बल्कि एक पूर्ण औद्योगिक मूल्य शृंखला के आधार के रूप में स्थापित करना है।