2 अक्टूबर 2026
LIVE
Get it on Google Play Download on the App Store

असम में बांस क्रांति: गुवाहाटी के पार्कों में उतरेगी BIS प्रमाणित बांस साइकिल, CM सरमा ने की सवारी

शेयर करें:
ऑडियो वॉइस लोड हो रही है…
असम में बांस क्रांति: गुवाहाटी के पार्कों में उतरेगी BIS प्रमाणित बांस साइकिल, CM सरमा ने की सवारी

सारांश

असम में बांस सिर्फ जंगल की उपज नहीं रहा — अब यह साइकिल की फ्रेम बन रहा है। CM सरमा की BIS प्रमाणित बांस साइकिल गुवाहाटी के पार्कों में उतरने वाली है, और यह 800 से अधिक संभावित उत्पादों वाली एक बड़ी बांस अर्थव्यवस्था की शुरुआत भर है।

मुख्य बातें

असम के CM हिमंत बिस्व सरमा ने BIS प्रमाणित बांस साइकिल को गुवाहाटी के पार्कों में उतारने की घोषणा की।
व्यावसायिक लॉन्च से पहले पार्कों में पायलट फीडबैक कार्यक्रम चलाया जाएगा।
सरमा के अनुसार, असम के बांस से 800 से अधिक उप-उत्पाद — मेथनॉल, ATF, निर्माण सामग्री — तैयार किए जा सकते हैं।
केंद्र सरकार ने बांस को 'घास' की श्रेणी में रखकर इसकी खेती और प्रसंस्करण को आसान बनाया।
यह पहल असम में बांस आधारित रोजगार और आजीविका के नए अवसर सृजित करने के व्यापक प्रयास का हिस्सा है।

असम के मुख्यमंत्री हिमंत बिस्व सरमा ने 2 अक्टूबर 2026 को घोषणा की कि राज्य सरकार जल्द ही गुवाहाटी के विभिन्न पार्कों में भारतीय मानक ब्यूरो (BIS) प्रमाणित बांस की साइकिल आम लोगों के उपयोग के लिए उपलब्ध कराएगी। यह कदम व्यावसायिक लॉन्च से पहले उपभोक्ताओं से सीधा फीडबैक जुटाने की रणनीति के तहत उठाया गया है।

मुख्यमंत्री ने खुद की सवारी

मुख्यमंत्री सरमा ने बताया कि उन्होंने हाल ही में इस बांस साइकिल की व्यक्तिगत रूप से सवारी की है। साइकिल की पूरी संरचना बांस से निर्मित है और इसे BIS का प्रमाणन प्राप्त हो चुका है, जो इसे राष्ट्रीय गुणवत्ता मानकों पर खरा साबित करता है। उन्होंने सोशल मीडिया पर लिखा, 'जानना चाहते हैं कि मैं क्या चला रहा हूं? यह बांस की साइकिल है, जिसकी संरचना पूरी तरह बांस से बनी है और इसे BIS से प्रमाणित किया गया है।'

गुवाहाटी पार्कों में पायलट परीक्षण

आने वाले दिनों में गुवाहाटी के चुनिंदा पार्कों में ये साइकिलें रखी जाएंगी, जहाँ नागरिक इन्हें चलाकर अपना अनुभव साझा कर सकेंगे। इस पायलट कार्यक्रम से डिजाइन, उपयोग में सुविधा और प्रदर्शन से जुड़े महत्वपूर्ण सुझाव मिलने की उम्मीद है। प्राप्त फीडबैक के आधार पर उत्पाद में आवश्यक सुधार करके इसे व्यापक स्तर पर बाज़ार में उतारा जाएगा।

बांस की अपार संभावनाएँ

मुख्यमंत्री ने बताया कि असम में पाए जाने वाले बांस से 800 से अधिक प्रकार के उप-उत्पाद तैयार किए जा सकते हैं। उन्होंने कहा, 'इसका इस्तेमाल मेथनॉल से लेकर एटीएफ (ATF), मजबूत संरचनाओं और कई अन्य क्षेत्रों में बड़े पैमाने पर किया जा सकता है।' यह पहल बांस आधारित अर्थव्यवस्था को मजबूत करने और स्थानीय रोजगार के नए अवसर सृजित करने के व्यापक रोडमैप का हिस्सा है।

केंद्र सरकार की नीति का लाभ

सरमा ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की सरकार द्वारा बांस को 'घास' की श्रेणी में रखने के नीतिगत निर्णय का भी उल्लेख किया। उनके अनुसार, इस वर्गीकरण परिवर्तन से बांस की खेती, प्रसंस्करण और औद्योगिक उपयोग में काफी नए रास्ते खुले हैं। गौरतलब है कि पहले बांस को वन अधिनियम के तहत 'वृक्ष' माना जाता था, जिससे इसकी कटाई और परिवहन पर कड़े प्रतिबंध थे।

टिकाऊ विकास की दिशा में कदम

यह पहल ऐसे समय में सामने आई है जब विनिर्माण और बुनियादी ढाँचे के क्षेत्र में टिकाऊ और स्थानीय संसाधनों से तैयार विकल्पों की माँग तेजी से बढ़ रही है। बांस की साइकिल को इस बात के जीवंत उदाहरण के रूप में प्रस्तुत किया जा रहा है कि पारंपरिक और सहज उपलब्ध संसाधनों को आधुनिक उपभोक्ता उत्पादों में किस तरह परिवर्तित किया जा सकता है। असम सरकार का लक्ष्य बांस को केवल एक कच्चे माल के रूप में नहीं, बल्कि एक पूर्ण औद्योगिक मूल्य शृंखला के आधार के रूप में स्थापित करना है।

संपादकीय दृष्टिकोण

लेकिन असली सवाल यह है कि क्या यह पायलट एक स्थायी औद्योगिक श्रृंखला में बदलेगा या महज एक जनसंपर्क अभ्यास बनकर रह जाएगा। असम बांस संसाधनों में देश के अग्रणी राज्यों में से एक है, फिर भी बांस आधारित उद्योग अब तक अपनी पूर्ण क्षमता से कोसों दूर रहे हैं। 800 उप-उत्पादों की संभावना तभी साकार होगी जब प्रसंस्करण इकाइयाँ, कुशल कारीगर और बाज़ार संपर्क एक साथ विकसित हों। BIS प्रमाणन एक सकारात्मक कदम है, लेकिन स्केल-अप के लिए नीतिगत निरंतरता और निजी निवेश दोनों की ज़रूरत होगी।
RashtraPress
2 अक्टूबर 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

असम की बांस साइकिल क्या है और यह खास क्यों है?
यह एक ऐसी साइकिल है जिसकी पूरी फ्रेम बांस से बनी है और इसे भारतीय मानक ब्यूरो (BIS) का प्रमाणन प्राप्त है। यह असम सरकार की बांस आधारित अर्थव्यवस्था को बढ़ावा देने की पहल का हिस्सा है और स्थानीय संसाधनों से आधुनिक उत्पाद बनाने का उदाहरण है।
गुवाहाटी के पार्कों में बांस साइकिल कब उपलब्ध होगी?
मुख्यमंत्री हिमंत बिस्व सरमा के अनुसार, 'आने वाले दिनों में' गुवाहाटी के विभिन्न पार्कों में ये साइकिलें रखी जाएंगी। व्यावसायिक लॉन्च से पहले यह एक पायलट फीडबैक कार्यक्रम होगा।
असम में बांस से कितने तरह के उत्पाद बन सकते हैं?
CM सरमा के अनुसार, असम में पाए जाने वाले बांस से 800 से अधिक प्रकार के उप-उत्पाद बनाए जा सकते हैं। इनमें मेथनॉल, एविएशन टर्बाइन फ्यूल (ATF), निर्माण सामग्री और परिवहन उत्पाद शामिल हैं।
केंद्र सरकार ने बांस के वर्गीकरण में क्या बदलाव किया?
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की सरकार ने बांस को वन अधिनियम के तहत 'वृक्ष' की बजाय 'घास' की श्रेणी में रखा। इससे बांस की खेती, कटाई, परिवहन और औद्योगिक उपयोग पर पहले लगी कड़ी पाबंदियाँ काफी हद तक हटी हैं।
यह पहल असम की अर्थव्यवस्था को कैसे प्रभावित करेगी?
असम सरकार का लक्ष्य बांस आधारित उद्योगों के जरिए स्थानीय रोजगार और आजीविका के नए अवसर सृजित करना है। बांस के प्रचुर प्राकृतिक संसाधनों का मूल्य संवर्धन करके राज्य आर्थिक विकास की एक टिकाऊ राह बनाना चाहता है।
राष्ट्र प्रेस
सिलसिला

जुड़े बिंदु

इस ख़बर के पीछे की कड़ियाँ — सबसे नई पहले।

8 बिंदु
  1. नवीनतम 2 सप्ताह पहले
  2. 2 सप्ताह पहले
  3. 1 महीना पहले
  4. 2 महीने पहले
  5. 2 महीने पहले
  6. 3 महीने पहले
  7. 5 महीने पहले
  8. 9 महीने पहले