मोदी के 25 वर्षीय सार्वजनिक जीवन पर असम कैबिनेट ने पारित किए 75 प्रस्ताव, ₹27,000 करोड़ की सेमीकंडक्टर परियोजना सहित विकास कार्यों की सराहना
सारांश
मुख्य बातें
असम मंत्रिमंडल ने 9 अक्टूबर 2026 को गुवाहाटी में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के 25 वर्षों के सार्वजनिक जीवन को समर्पित एक विशेष बैठक में 75 प्रस्ताव पारित किए, जिनमें असम और पूर्वोत्तर में बुनियादी ढाँचे, संपर्क, औद्योगिक निवेश, स्वास्थ्य सेवा, शिक्षा और सुरक्षा के क्षेत्र में हुए सुधारों को रेखांकित किया गया। मुख्यमंत्री हिमंता बिस्वा सरमा की अध्यक्षता में यह बैठक 90 मिनट तक चली और इसमें गुजरात के मुख्यमंत्री से लेकर प्रधानमंत्री पद तक मोदी के सम्पूर्ण कार्यकाल को समाहित किया गया।
बैठक का स्वरूप और मुख्य संदेश
बैठक के बाद मीडिया को संबोधित करते हुए मुख्यमंत्री सरमा ने कहा कि शांति ने विकास के लिए परिस्थितियाँ बनाईं, संपर्क ने अवसरों के द्वार खोले, उद्योग और निवेश ने नई आर्थिक संभावनाएँ पैदा कीं, और स्वास्थ्य सेवा तथा शिक्षा ने मानवीय क्षमताओं को मज़बूत किया। उन्होंने यह भी कहा कि असम एक शांतिपूर्ण और निवेश के लिए तैयार राज्य के रूप में उभर रहा है — पूर्वोत्तर के प्रवेश द्वार और 'विकसित भारत' के राष्ट्रीय दृष्टिकोण में एक महत्त्वपूर्ण योगदानकर्ता के रूप में।
गौरतलब है कि यह ऐसे समय में आया है जब केंद्र और राज्य, दोनों स्तरों पर भाजपा सरकारें पूर्वोत्तर को 'विकास का नया केंद्र' बताने की कोशिश में लगी हैं।
प्रमुख अवसंरचना परियोजनाएँ
पारित प्रस्तावों में कई बड़ी परियोजनाओं का उल्लेख किया गया। जगीरोड में ₹27,000 करोड़ की सेमीकंडक्टर असेंबली और परीक्षण सुविधा, नुमालीगढ़ रिफाइनरी का ₹28,000 करोड़ का विस्तार और प्रस्तावित गोहपुर-नुमालीगढ़ ट्विन-ट्यूब सड़क सुरंग — जिसकी अनुमानित लागत ₹18,662 करोड़ है — विशेष रूप से उल्लेखनीय हैं।
इनके अतिरिक्त गुवाहाटी रिंग रोड, काजीरंगा एलिवेटेड कॉरिडोर और सिलचर-सौराष्ट्र हाई-स्पीड कॉरिडोर का भी ज़िक्र किया गया। 718 किलोमीटर लंबी बरौनी-गुवाहाटी प्राकृतिक गैस पाइपलाइन, प्रस्तावित नामरूप-चतुर्थ अमोनिया-यूरिया परिसर और नुमालीगढ़ में बाँस आधारित द्वितीय पीढ़ी के बायोएथेनॉल संयंत्र भी इसमें शामिल रहे।
शांति समझौते और सामाजिक विकास
प्रस्तावों में बोडो, कार्बी, आदिवासी और संयुक्त मुक्ति मोर्चा (यूएलएफए) समूहों के साथ हुए शांति समझौतों को दीर्घकालिक संघर्षों के समाधान में सहायक बताया गया। स्वास्थ्य और शिक्षा के क्षेत्र में एम्स गुवाहाटी और आईआईएम गुवाहाटी की स्थापना का विशेष उल्लेख किया गया।
इसके साथ ही चराइदेव मोइदम को यूनेस्को विश्व धरोहर स्थल का दर्जा मिलने और 2024 में असमिया भाषा को शास्त्रीय भाषा का दर्जा मिलने को भी सांस्कृतिक उपलब्धियों के रूप में दर्ज किया गया।
एडवांटेज असम और निवेश का परिदृश्य
एडवांटेज असम 2.0 निवेश शिखर सम्मेलन का भी प्रस्तावों में उल्लेख किया गया, जिसे राज्य की औद्योगिक संभावनाओं को वैश्विक मंच पर प्रस्तुत करने की कोशिश के रूप में देखा जा रहा है। प्रस्तावों में यह भी रेखांकित किया गया कि प्रधानमंत्री बनने के बाद से मोदी 36 बार असम का दौरा कर चुके हैं।
आगे की दिशा
यह प्रस्ताव मुख्यतः प्रतीकात्मक स्वरूप के हैं, परंतु राजनीतिक रूप से इनका संदेश स्पष्ट है — असम सरकार ने केंद्र के साथ अपने संबंधों और विकास-कथा को औपचारिक दस्तावेज़ में दर्ज किया है। आलोचकों का कहना है कि ऐसे प्रस्तावों की वास्तविक उपयोगिता तभी स्पष्ट होगी जब इन परियोजनाओं का ज़मीनी क्रियान्वयन समयबद्ध तरीके से हो। राज्य में आगामी चुनावों की पृष्ठभूमि में इस पहल का राजनीतिक निहितार्थ भी स्पष्ट है।