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पूर्वोत्तर में 12 शांति समझौते और 10,000 उग्रवादियों का आत्मसमर्पण: सीएम हिमंत बिस्वा सरमा

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पूर्वोत्तर में 12 शांति समझौते और 10,000 उग्रवादियों का आत्मसमर्पण: सीएम हिमंत बिस्वा सरमा

सारांश

एक दशक पहले उग्रवाद की पहचान रखने वाला पूर्वोत्तर भारत अब 12 शांति समझौतों और 10,000 से अधिक उग्रवादियों के आत्मसमर्पण के साथ नई तस्वीर पेश कर रहा है। सीएम हिमंत बिस्वा सरमा के अनुसार, इस बदलाव का सबसे बड़ा लाभार्थी असम है — जहाँ निवेश, पर्यटन और बुनियादी ढाँचे को नई गति मिली है।

मुख्य बातें

असम के मुख्यमंत्री हिमंत बिस्वा सरमा ने 20 जून को एक्स पर पोस्ट कर पूर्वोत्तर के बदलाव को रेखांकित किया।
2014 से अब तक पूर्वोत्तर में 12 प्रमुख शांति समझौते संपन्न हुए हैं।
10,000 से अधिक उग्रवादियों ने केंद्र और राज्य सरकारों की पुनर्वास नीतियों के तहत आत्मसमर्पण किया।
2015 के बाद से उग्रवाद से जुड़ी नागरिक मौतों में 97% और उग्रवादी घटनाओं में 82% की कमी आई है।
यह जानकारी केंद्र सरकार के अभियान 'नॉर्थ ईस्ट के आगे बढ़ने के 12 साल' के तहत साझा की गई है।

असम के मुख्यमंत्री हिमंत बिस्वा सरमा ने 20 जून को कहा कि पिछले एक दशक में पूर्वोत्तर भारत ने उग्रवाद और अस्थिरता की छाया से निकलकर शांति, कनेक्टिविटी और आर्थिक प्रगति के नए अध्याय में प्रवेश किया है। उन्होंने एक्स (पूर्व में ट्विटर) पर साझा पोस्ट में इस बदलाव का सबसे बड़ा लाभार्थी असम को बताया।

मुख्य घटनाक्रम

मुख्यमंत्री सरमा की यह पोस्ट केंद्र सरकार के अभियान 'नॉर्थ ईस्ट के आगे बढ़ने के 12 साल' के तहत साझा की गई, जो प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में पूर्वोत्तर के विकास को रेखांकित करता है। सरमा ने लिखा, "पिछले कुछ वर्षों में पूर्वोत्तर की विकास गाथा उग्रवाद और अस्थिरता से निकलकर इंफ्रास्ट्रक्चर, कनेक्टिविटी और आर्थिक विकास की ओर बढ़ी है। इस शांतिपूर्ण माहौल का सबसे बड़ा लाभ असम को मिला है।"

आंकड़े क्या कहते हैं

अभियान के तहत जारी आंकड़ों के अनुसार, वर्ष 2014 से अब तक पूर्वोत्तर में 12 प्रमुख शांति समझौते संपन्न हुए हैं, जिन्होंने दशकों पुराने संघर्षों के समाधान में निर्णायक भूमिका निभाई है। इसी अवधि में 10,000 से अधिक उग्रवादियों ने आत्मसमर्पण किया है — जिसे केंद्र और राज्य सरकारों की पुनर्वास नीतियों की सफलता के रूप में प्रस्तुत किया गया है।

गौरतलब है कि इन आंकड़ों के अनुसार 2015 के बाद से उग्रवाद से जुड़ी नागरिक मौतों में 97 प्रतिशत की कमी आई है, जबकि 2014 के बाद उग्रवादी घटनाओं में 82 प्रतिशत की गिरावट दर्ज की गई है। ये आँकड़े केंद्र सरकार के अभियान की सामग्री से लिए गए हैं।

पूर्वोत्तर में बुनियादी ढाँचे का विस्तार

पिछले एक दशक में केंद्र सरकार ने पूर्वोत्तर को भारत की विकास यात्रा का प्रमुख इंजन बनाने पर जोर दिया है। सड़क, रेलवे, हवाई अड्डों, जलमार्ग, डिजिटल कनेक्टिविटी और सीमावर्ती क्षेत्रों के बुनियादी ढाँचे पर बड़े पैमाने पर निवेश किया गया है। यह ऐसे समय में आया है जब पूर्वोत्तर को ऐतिहासिक रूप से बुनियादी ढाँचे की कमी और भौगोलिक अलगाव का सामना करना पड़ता था।

असम पर असर

असम सरकार के अनुसार, बेहतर सुरक्षा माहौल के कारण राज्य में निवेश बढ़ा है, पर्यटन को गति मिली है और आधारभूत ढाँचा परियोजनाओं में तेज़ी आई है। प्रधानमंत्री मोदी ने पहले कहा था कि पूर्वोत्तर में शांति, सुरक्षा और आर्थिक परिवर्तन उनकी सर्वोच्च प्राथमिकताओं में शामिल रहे हैं।

आगे की राह

अभियान सामग्री में पूर्वोत्तर के इस बदलाव को 'शांति, प्रगति और स्थिरता की यात्रा' बताया गया है। क्षेत्र में शांति समझौतों की निरंतरता और पुनर्वासित उग्रवादियों के दीर्घकालिक पुनर्एकीकरण की सफलता पर नज़र बनी रहेगी।

संपादकीय दृष्टिकोण

000 आत्मसमर्पणों के आँकड़े प्रभावशाली हैं, लेकिन ये केंद्र सरकार के अपने अभियान की सामग्री से लिए गए हैं — स्वतंत्र सत्यापन की गुंजाइश बनती है। उग्रवादी घटनाओं में 82% की गिरावट निर्विवाद रूप से सकारात्मक है, परंतु असली कसौटी यह है कि पुनर्वासित उग्रवादियों का दीर्घकालिक सामाजिक-आर्थिक एकीकरण कितना सफल रहा। पूर्वोत्तर में शांति और विकास की यह कहानी तब और पुख्ता होगी जब स्वतंत्र संस्थाएँ भी इन दावों की पुष्टि करें।
RashtraPress
10 अगस्त 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

पूर्वोत्तर में 12 शांति समझौते कब और किनके बीच हुए?
केंद्र सरकार के अभियान 'नॉर्थ ईस्ट के आगे बढ़ने के 12 साल' के आंकड़ों के अनुसार, ये 12 प्रमुख शांति समझौते 2014 से अब तक संपन्न हुए हैं। इनमें विभिन्न उग्रवादी संगठनों और केंद्र व राज्य सरकारों के बीच समझौते शामिल हैं, जिन्होंने दशकों पुराने संघर्षों के समाधान में भूमिका निभाई।
पूर्वोत्तर में उग्रवादी घटनाओं में कितनी कमी आई है?
सरकारी आंकड़ों के अनुसार, 2014 के बाद उग्रवादी घटनाओं में 82 प्रतिशत की गिरावट दर्ज की गई है और 2015 के बाद से उग्रवाद से जुड़ी नागरिक मौतों में 97 प्रतिशत की कमी आई है। ये आँकड़े केंद्र सरकार के अभियान सामग्री से लिए गए हैं।
सीएम हिमंत बिस्वा सरमा ने असम के लिए क्या दावा किया?
मुख्यमंत्री हिमंत बिस्वा सरमा ने कहा कि पूर्वोत्तर में स्थापित शांतिपूर्ण माहौल का सबसे बड़ा लाभ असम को मिला है। उनके अनुसार, बेहतर सुरक्षा वातावरण के कारण राज्य में निवेश, पर्यटन और बुनियादी ढाँचा परियोजनाओं को नई गति मिली है।
'नॉर्थ ईस्ट के आगे बढ़ने के 12 साल' अभियान क्या है?
यह केंद्र सरकार का एक अभियान है जो प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में पूर्वोत्तर में 12 वर्षों की विकास यात्रा को रेखांकित करता है। इसमें शांति समझौतों, उग्रवादी आत्मसमर्पण, बुनियादी ढाँचे में निवेश और कनेक्टिविटी के आँकड़े साझा किए गए हैं।
पूर्वोत्तर में बुनियादी ढाँचे के विकास में क्या हुआ है?
केंद्र सरकार ने पिछले एक दशक में पूर्वोत्तर में सड़क, रेलवे, हवाई अड्डों, जलमार्ग, डिजिटल कनेक्टिविटी और सीमावर्ती क्षेत्रों के बुनियादी ढाँचे पर बड़े पैमाने पर निवेश किया है। इसका उद्देश्य इस क्षेत्र को भारत की विकास यात्रा का प्रमुख इंजन बनाना बताया गया है।
राष्ट्र प्रेस
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