4 सितंबर 2026
LIVE
Get it on Google Play Download on the App Store

कार्बी आंगलोंग शांति समझौते के 5 साल: CM सरमा बोले — मोदी-शाह ने असम को दिया विकास का नया रास्ता

शेयर करें:
ऑडियो वॉइस लोड हो रही है…
कार्बी आंगलोंग शांति समझौते के 5 साल: CM सरमा बोले — मोदी-शाह ने असम को दिया विकास का नया रास्ता

सारांश

कार्बी आंगलोंग शांति समझौते के पाँच साल पूरे होने पर CM सरमा ने इसे असम के इतिहास का निर्णायक मोड़ बताया। दशकों की हिंसा झेलने वाले इस क्षेत्र में अब विकास और अवसरों की वापसी हो रही है — और इसका श्रेय सरमा ने PM मोदी व गृह मंत्री शाह के सीधे हस्तक्षेप को दिया।

मुख्य बातें

कार्बी आंगलोंग शांति समझौते की 5वीं वर्षगाँठ पर CM हिमंत बिस्वा सरमा ने 4 सितंबर 2026 को एक्स पर पोस्ट के ज़रिए प्रतिक्रिया दी।
समझौता सितंबर 2021 में केंद्र, असम सरकार और कार्बी सशस्त्र समूहों के बीच हस्ताक्षरित हुआ था।
सरमा ने PM मोदी और गृह मंत्री अमित शाह की भूमिका को शांति और स्थिरता लाने में निर्णायक बताया।
समझौते के बाद कार्बी आंगलोंग में आर्थिक अवसर लौटे और लोग असम की विकास यात्रा में सक्रिय हिस्सेदार बने।
कार्बी आंगलोंग असम का सबसे बड़ा ज़िला है, जो लंबे समय तक सशस्त्र संघर्ष का केंद्र रहा था।

असम के मुख्यमंत्री हिमंत बिस्वा सरमा ने 4 सितंबर 2026 को कार्बी आंगलोंग शांति समझौते की पाँचवीं वर्षगाँठ पर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह की सराहना की। सरमा ने कहा कि इस समझौते ने दशकों से हिंसा और अशांति में घिरे कार्बी आंगलोंग क्षेत्र में शांति बहाल कर विकास और आर्थिक अवसरों के द्वार खोले हैं।

समझौते की पृष्ठभूमि

कार्बी आंगलोंग शांति समझौते पर सितंबर 2021 में केंद्र सरकार, असम सरकार और कार्बी सशस्त्र समूहों के प्रतिनिधियों के बीच हस्ताक्षर किए गए थे। इसका उद्देश्य दशकों से चले आ रहे सशस्त्र संघर्ष को समाप्त करना और इस क्षेत्र में राजनीतिक स्थिरता तथा विकास के लिए एक ठोस ढाँचा तैयार करना था। यह समझौता उत्तर-पूर्व भारत में शांति प्रक्रियाओं की उस व्यापक श्रृंखला का हिस्सा रहा है, जिसे केंद्र सरकार ने 2014 के बाद तेज़ किया।

मुख्यमंत्री की प्रतिक्रिया

सोशल मीडिया प्लेटफ़ॉर्म एक्स पर एक पोस्ट में सरमा ने लिखा, 'आज ही के दिन पाँच साल पहले, कार्बी आंगलोंग शांति समझौते के साथ, उस इलाके में शांति लौटी जो अक्सर हिंसा और अशांति से घिरा रहता था।' उन्होंने इसे 'महज एक और शांति समझौता' मानने से इनकार करते हुए कहा कि यह कार्बी आंगलोंग के लिए एक ऐतिहासिक मोड़ साबित हुआ। सरमा के अनुसार, प्रधानमंत्री और गृह मंत्री का 'सीधे तौर पर शामिल होने का तरीका' जटिल मुद्दों के समाधान में निर्णायक रहा।

विकास पर असर

सरमा ने कहा कि समझौते के बाद इलाके में आर्थिक अवसर लौटे हैं और लोग अब अपने घरों के पास ही भविष्य बना पा रहे हैं। उनके अनुसार, कार्बी आंगलोंग के निवासी अब असम की व्यापक विकास यात्रा में बराबर के हिस्सेदार बन गए हैं। यह ऐसे समय में आया है जब राज्य सरकार उत्तर-पूर्व के सीमावर्ती ज़िलों में बुनियादी ढाँचे और निवेश को बढ़ावा देने पर ज़ोर दे रही है।

ऐतिहासिक महत्व

गौरतलब है कि कार्बी आंगलोंग असम का सबसे बड़ा ज़िला है और लंबे समय तक अलगाववादी आंदोलनों का केंद्र रहा। सरमा ने कहा कि जब भविष्य में राज्य के इतिहास का अध्ययन किया जाएगा, तो PM मोदी और गृह मंत्री शाह के योगदान को विशेष रूप से याद किया जाएगा। कार्बी आंगलोंग के लोग इन नेताओं के प्रति हमेशा आभारी रहेंगे, ऐसा उन्होंने कहा।

आगे की राह

समझौते की पाँचवीं वर्षगाँठ पर की गई यह समीक्षा इस बात का संकेत है कि राज्य सरकार शांति के साथ-साथ आर्थिक एकीकरण को भी प्राथमिकता दे रही है। विशेषज्ञों का मानना है कि स्थायी शांति के लिए सुशासन और स्थानीय रोज़गार सृजन की निरंतर आवश्यकता बनी रहेगी।

संपादकीय दृष्टिकोण

शिक्षा और बुनियादी ढाँचे में कितना बदलाव आया — इसका कोई सत्यापन-योग्य डेटा इस बयान में नहीं है। उत्तर-पूर्व में कई शांति समझौतों के बाद भी विस्थापित समुदायों के पुनर्वास और आर्थिक एकीकरण की चुनौती बनी रहती है। 'अवसर लौटे हैं' जैसे वाक्यांश तब तक अधूरे हैं जब तक कि उन्हें मापने योग्य संकेतकों से नहीं जोड़ा जाता।
RashtraPress
4 सितंबर 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

कार्बी आंगलोंग शांति समझौता क्या है?
कार्बी आंगलोंग शांति समझौता सितंबर 2021 में केंद्र सरकार, असम सरकार और कार्बी सशस्त्र समूहों के बीच हस्ताक्षरित एक ऐतिहासिक करार है। इसका उद्देश्य दशकों से चले आ रहे सशस्त्र संघर्ष को समाप्त कर इस क्षेत्र में राजनीतिक स्थिरता और विकास का ढाँचा तैयार करना था।
CM हिमंत बिस्वा सरमा ने 5वीं वर्षगाँठ पर क्या कहा?
CM सरमा ने एक्स पर पोस्ट करते हुए कहा कि इस समझौते ने कार्बी आंगलोंग — जो लंबे समय से हिंसा से जूझ रहा था — में शांति और विकास के द्वार खोले। उन्होंने PM मोदी और गृह मंत्री अमित शाह के 'सीधे तौर पर शामिल होने' को इस सफलता का मुख्य कारण बताया।
कार्बी आंगलोंग शांति समझौते से इस क्षेत्र को क्या फायदा हुआ?
सरमा के अनुसार, समझौते के बाद इलाके में आर्थिक अवसर लौटे हैं और लोग अपने घरों के पास ही भविष्य बना पा रहे हैं। कार्बी आंगलोंग के निवासी अब असम की व्यापक विकास यात्रा में बराबर के हिस्सेदार बन गए हैं।
कार्बी आंगलोंग क्षेत्र में इससे पहले क्या स्थिति थी?
कार्बी आंगलोंग असम का सबसे बड़ा ज़िला है और दशकों तक अलगाववादी सशस्त्र आंदोलनों का केंद्र रहा। 2021 के समझौते से पहले यह इलाका बार-बार हिंसा और अशांति की चपेट में आता था, जिससे विकास बाधित होता था।
क्या उत्तर-पूर्व भारत में ऐसे अन्य शांति समझौते भी हुए हैं?
हाँ, केंद्र सरकार ने 2014 के बाद उत्तर-पूर्व में कई शांति समझौते किए हैं, जिनमें बोडो समझौता (2020) और त्रिपुरा से जुड़े करार शामिल हैं। कार्बी आंगलोंग समझौता इसी शृंखला का एक महत्वपूर्ण हिस्सा है।
राष्ट्र प्रेस
सिलसिला

जुड़े बिंदु

इस ख़बर के पीछे की कड़ियाँ — सबसे नई पहले।

8 बिंदु
  1. नवीनतम 9 घंटे पहले
  2. 2 सप्ताह पहले
  3. 2 महीने पहले
  4. 2 महीने पहले
  5. 3 महीने पहले
  6. 7 महीने पहले
  7. 8 महीने पहले
  8. 9 महीने पहले