कार्बी आंगलोंग शांति समझौते के 5 साल: CM सरमा बोले — मोदी-शाह ने असम को दिया विकास का नया रास्ता
सारांश
मुख्य बातें
असम के मुख्यमंत्री हिमंत बिस्वा सरमा ने 4 सितंबर 2026 को कार्बी आंगलोंग शांति समझौते की पाँचवीं वर्षगाँठ पर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह की सराहना की। सरमा ने कहा कि इस समझौते ने दशकों से हिंसा और अशांति में घिरे कार्बी आंगलोंग क्षेत्र में शांति बहाल कर विकास और आर्थिक अवसरों के द्वार खोले हैं।
समझौते की पृष्ठभूमि
कार्बी आंगलोंग शांति समझौते पर सितंबर 2021 में केंद्र सरकार, असम सरकार और कार्बी सशस्त्र समूहों के प्रतिनिधियों के बीच हस्ताक्षर किए गए थे। इसका उद्देश्य दशकों से चले आ रहे सशस्त्र संघर्ष को समाप्त करना और इस क्षेत्र में राजनीतिक स्थिरता तथा विकास के लिए एक ठोस ढाँचा तैयार करना था। यह समझौता उत्तर-पूर्व भारत में शांति प्रक्रियाओं की उस व्यापक श्रृंखला का हिस्सा रहा है, जिसे केंद्र सरकार ने 2014 के बाद तेज़ किया।
मुख्यमंत्री की प्रतिक्रिया
सोशल मीडिया प्लेटफ़ॉर्म एक्स पर एक पोस्ट में सरमा ने लिखा, 'आज ही के दिन पाँच साल पहले, कार्बी आंगलोंग शांति समझौते के साथ, उस इलाके में शांति लौटी जो अक्सर हिंसा और अशांति से घिरा रहता था।' उन्होंने इसे 'महज एक और शांति समझौता' मानने से इनकार करते हुए कहा कि यह कार्बी आंगलोंग के लिए एक ऐतिहासिक मोड़ साबित हुआ। सरमा के अनुसार, प्रधानमंत्री और गृह मंत्री का 'सीधे तौर पर शामिल होने का तरीका' जटिल मुद्दों के समाधान में निर्णायक रहा।
विकास पर असर
सरमा ने कहा कि समझौते के बाद इलाके में आर्थिक अवसर लौटे हैं और लोग अब अपने घरों के पास ही भविष्य बना पा रहे हैं। उनके अनुसार, कार्बी आंगलोंग के निवासी अब असम की व्यापक विकास यात्रा में बराबर के हिस्सेदार बन गए हैं। यह ऐसे समय में आया है जब राज्य सरकार उत्तर-पूर्व के सीमावर्ती ज़िलों में बुनियादी ढाँचे और निवेश को बढ़ावा देने पर ज़ोर दे रही है।
ऐतिहासिक महत्व
गौरतलब है कि कार्बी आंगलोंग असम का सबसे बड़ा ज़िला है और लंबे समय तक अलगाववादी आंदोलनों का केंद्र रहा। सरमा ने कहा कि जब भविष्य में राज्य के इतिहास का अध्ययन किया जाएगा, तो PM मोदी और गृह मंत्री शाह के योगदान को विशेष रूप से याद किया जाएगा। कार्बी आंगलोंग के लोग इन नेताओं के प्रति हमेशा आभारी रहेंगे, ऐसा उन्होंने कहा।
आगे की राह
समझौते की पाँचवीं वर्षगाँठ पर की गई यह समीक्षा इस बात का संकेत है कि राज्य सरकार शांति के साथ-साथ आर्थिक एकीकरण को भी प्राथमिकता दे रही है। विशेषज्ञों का मानना है कि स्थायी शांति के लिए सुशासन और स्थानीय रोज़गार सृजन की निरंतर आवश्यकता बनी रहेगी।