13 अक्टूबर 2026
LIVE
Get it on Google Play Download on the App Store

असम के राज्यपाल लक्ष्मण प्रसाद आचार्य का आह्वान: आपदा प्रबंधन में CRPF-NDRF तालमेल हो मज़बूत

शेयर करें:
ऑडियो वॉइस लोड हो रही है…
असम के राज्यपाल लक्ष्मण प्रसाद आचार्य का आह्वान: आपदा प्रबंधन में CRPF-NDRF तालमेल हो मज़बूत

सारांश

असम के राज्यपाल लक्ष्मण प्रसाद आचार्य ने गुवाहाटी में स्पष्ट संदेश दिया — आपदा प्रबंधन संकट आने के बाद नहीं, पहले शुरू होना चाहिए। CRPF-NDRF समन्वय और नियमित मॉक ड्रिल पर उनका जोर राज्य की बार-बार आने वाली बाढ़-भूकंप चुनौतियों की पृष्ठभूमि में अहम है।

मुख्य बातें

असम के राज्यपाल लक्ष्मण प्रसाद आचार्य ने 13 अक्टूबर 2026 को गुवाहाटी में आपदा-रोधी भारत के लिए CRPF और NDRF के बीच बेहतर तालमेल का आह्वान किया।
'नमो मातृभूमि सुरक्षा एवं स्वावलंबन संकल्प सप्ताह' के तहत CRPF के सहयोग से लोक भवन असम द्वारा कार्यक्रम आयोजित किया गया।
राज्यपाल ने शिवसागर , चराइदेव , जोरहाट और गोलाघाट में हालिया बाढ़ राहत कार्यों में NDRF , SDRF व पुलिस के प्रयासों की सराहना की।
कार्यक्रम में NDRF द्वारा आपदा प्रबंधन मॉक ड्रिल का आयोजन किया गया, जिसमें आपातकालीन प्रक्रियाओं का प्रदर्शन हुआ।
राज्यपाल ने शैक्षणिक संस्थानों और युवाओं से आपदा तैयारी व सामुदायिक सेवा में सक्रिय भूमिका निभाने का आग्रह किया।

असम के राज्यपाल लक्ष्मण प्रसाद आचार्य ने 13 अक्टूबर 2026 को गुवाहाटी में आयोजित एक कार्यक्रम में आपदा-रोधी भारत के निर्माण के लिए बेहतर तैयारी, नियमित मॉक ड्रिल और इमरजेंसी रिस्पॉन्स एजेंसियों के बीच सुदृढ़ समन्वय की आवश्यकता पर बल दिया। उन्होंने सेंट्रल रिज़र्व पुलिस फ़ोर्स (CRPF) और नेशनल डिज़ास्टर रिस्पॉन्स फ़ोर्स (NDRF) की परस्पर पूरक भूमिकाओं को रेखांकित किया।

कार्यक्रम का संदर्भ

'नमो मातृभूमि सुरक्षा एवं स्वावलंबन संकल्प सप्ताह' के अंतर्गत CRPF के सहयोग से 'लोक भवन असम' द्वारा यह आयोजन किया गया। राज्यपाल आचार्य ने इस अवसर पर 'समन्वय', 'सुरक्षा' और 'संवेदना' के तीन मूल सिद्धांतों को आपदा प्रबंधन की नींव बताया। उन्होंने कहा कि CRPF और NDRF दोनों बल 'राष्ट्र प्रथम, जनसेवा सर्वोपरि' की भावना के जीवंत उदाहरण हैं।

असम की आपदा-संवेदनशीलता और हालिया बाढ़

राज्यपाल ने असम की विशेष भौगोलिक स्थिति का उल्लेख करते हुए कहा कि राज्य भूकंप, बाढ़ और भूस्खलन जैसी आपदाओं के प्रति अत्यंत संवेदनशील है, इसलिए यहाँ मज़बूत तैयारी और त्वरित समन्वित कार्रवाई अपरिहार्य है। उन्होंने शिवसागर, चराइदेव, जोरहाट और गोलाघाट जिलों में हाल ही में आई बाढ़ का विशेष संदर्भ दिया और NDRF, राज्य आपदा प्रतिक्रिया बल (SDRF), पुलिस तथा अन्य एजेंसियों के समन्वित प्रयासों की सराहना की।

यह ऐसे समय में आया है जब असम में मानसूनी बाढ़ हर वर्ष लाखों लोगों को प्रभावित करती है। राज्यपाल की यह टिप्पणी बहु-एजेंसी प्रतिक्रिया तंत्र को और अधिक संस्थागत रूप देने की दिशा में एक महत्त्वपूर्ण संकेत है।

CRPF की भूमिका और महिला कर्मियों की सराहना

राज्यपाल आचार्य ने CRPF के साहस, अनुशासन और कर्तव्यनिष्ठा की प्रशंसा की। उन्होंने विशेष रूप से महिला कर्मियों के योगदान को उल्लेखनीय बताया और अंतरराष्ट्रीय मिशनों में बल की भागीदारी की भी चर्चा की, जिसने वैश्विक शांति-स्थापना और मानवीय प्रयासों में भारत का प्रतिनिधित्व किया है।

युवाओं और शैक्षणिक संस्थानों से आग्रह

राज्यपाल ने शैक्षणिक संस्थानों से छात्रों के बीच आपदा की तैयारी और सामुदायिक सेवा की संस्कृति विकसित करने का अनुरोध किया। उन्होंने युवाओं को विज्ञान, प्रौद्योगिकी, नवाचार और सामाजिक सेवा के माध्यम से एक सुरक्षित, आत्मनिर्भर और आपदा-रोधी भारत के निर्माण में सक्रिय भागीदारी के लिए प्रोत्साहित किया।

मॉक ड्रिल और प्रदर्शनी

कार्यक्रम में NDRF द्वारा आपदा प्रबंधन मॉक ड्रिल का आयोजन किया गया, जिसमें आपातकालीन प्रतिक्रिया प्रक्रियाओं का प्रदर्शन किया गया। राज्यपाल ने बचाव उपकरणों की प्रदर्शनी वाले स्टॉल का दौरा किया और भाग लेने वाले छात्रों से संवाद किया। इस अवसर पर CRPF के वरिष्ठ अधिकारी, पुलिस अधिकारी, गुवाहाटी रिफाइनरी के प्रतिनिधि और अन्य गणमान्य व्यक्ति भी उपस्थित रहे।

राज्यपाल आचार्य का यह संदेश स्पष्ट है — आपदा प्रबंधन संकट के बाद की प्रतिक्रिया नहीं, बल्कि एक सतत पूर्व-तैयारी प्रक्रिया होनी चाहिए जो जागरूकता, प्रशिक्षण और संस्थागत समन्वय पर टिकी हो।

संपादकीय दृष्टिकोण

लेकिन असली सवाल यह है कि बार-बार होने वाली असम की बाढ़ के बावजूद संस्थागत समन्वय अब तक पर्याप्त क्यों नहीं बन पाया। CRPF और NDRF की भूमिकाएँ पूरक ज़रूर हैं, पर इनके बीच जमीनी तालमेल की कमी हर मानसून में उजागर होती रही है। मॉक ड्रिल और जागरूकता कार्यक्रम तभी सार्थक होंगे जब इनके परिणाम मापने की कोई जवाबदेह प्रणाली हो। एकमात्र भाषण से आपदा-रोधी राज्य नहीं बनते — इसके लिए नियमित क्षमता-आकलन और बजटीय प्रतिबद्धता दोनों ज़रूरी हैं।
RashtraPress
13 अक्टूबर 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

असम के राज्यपाल ने आपदा प्रबंधन पर क्या कहा?
राज्यपाल लक्ष्मण प्रसाद आचार्य ने 13 अक्टूबर 2026 को गुवाहाटी में कहा कि आपदा-रोधी भारत के निर्माण के लिए बेहतर तैयारी, नियमित मॉक ड्रिल और इमरजेंसी रिस्पॉन्स एजेंसियों के बीच सुदृढ़ समन्वय आवश्यक है। उन्होंने CRPF और NDRF की परस्पर पूरक भूमिकाओं को भी रेखांकित किया।
यह कार्यक्रम किस अवसर पर आयोजित हुआ?
'नमो मातृभूमि सुरक्षा एवं स्वावलंबन संकल्प सप्ताह' के तहत CRPF के सहयोग से लोक भवन असम द्वारा यह कार्यक्रम आयोजित किया गया। इसमें NDRF की आपदा प्रबंधन मॉक ड्रिल, बचाव उपकरणों की प्रदर्शनी और छात्रों से संवाद शामिल थे।
असम में हाल में कहाँ-कहाँ बाढ़ आई जिसका ज़िक्र हुआ?
राज्यपाल आचार्य ने शिवसागर, चराइदेव, जोरहाट और गोलाघाट जिलों में हाल ही में आई बाढ़ का उल्लेख किया। उन्होंने इन इलाकों में NDRF, SDRF, पुलिस और अन्य एजेंसियों के बचाव व राहत प्रयासों की सराहना की।
CRPF और NDRF की भूमिकाएँ एक-दूसरे की पूरक कैसे हैं?
राज्यपाल के अनुसार CRPF आंतरिक सुरक्षा और कानून-व्यवस्था बनाए रखती है, जबकि NDRF आपात स्थितियों में बचाव और राहत कार्य संपन्न करती है। दोनों मिलकर 'राष्ट्र प्रथम, जनसेवा सर्वोपरि' की भावना को साकार करते हैं।
युवाओं और शैक्षणिक संस्थानों से क्या अपेक्षा जताई गई?
राज्यपाल आचार्य ने शैक्षणिक संस्थानों से छात्रों के बीच आपदा तैयारी और सामुदायिक सेवा की संस्कृति विकसित करने का आग्रह किया। उन्होंने युवाओं को विज्ञान, प्रौद्योगिकी और नवाचार के माध्यम से आपदा-रोधी और आत्मनिर्भर भारत बनाने में योगदान देने के लिए प्रोत्साहित किया।
राष्ट्र प्रेस
सिलसिला

जुड़े बिंदु

इस ख़बर के पीछे की कड़ियाँ — सबसे नई पहले।

8 बिंदु
  1. नवीनतम 2 महीने पहले
  2. 2 महीने पहले
  3. 3 महीने पहले
  4. 4 महीने पहले
  5. 4 महीने पहले
  6. 5 महीने पहले
  7. 1 साल पहले
  8. 1 साल पहले