असम बाढ़: एनडीआरएफ ने 4,037 लोगों को सुरक्षित निकाला, 6 शव बरामद; बचाव अभियान तेज
सारांश
मुख्य बातें
राष्ट्रीय आपदा प्रतिक्रिया बल (एनडीआरएफ) ने असम के बाढ़ प्रभावित जिलों में 24 जुलाई को अपना फ्लड वाटर रेस्क्यू (एफडब्ल्यूआर) अभियान और तेज कर दिया। आधिकारिक आंकड़ों के अनुसार, टीमों ने अब तक 59 लोगों को बचाया, 4,037 लोगों को सुरक्षित स्थानों पर पहुंचाया, 48 मवेशियों का सफलतापूर्वक बचाव किया और बाढ़ प्रभावित क्षेत्रों से 6 शव बरामद किए। लगातार हो रही बारिश और प्रमुख नदियों के बढ़ते जलस्तर के कारण राज्य के कई निचले इलाके अब भी जलमग्न हैं।
मुख्य घटनाक्रम
एनडीआरएफ की टीमें उन संवेदनशील जिलों में तैनात हैं, जहां नदियों के उफान और जलभराव ने जनजीवन को बुरी तरह प्रभावित किया है। बचाव दल नावों और विशेष उपकरणों की मदद से चौबीसों घंटे राहत कार्य में जुटे हुए हैं। राज्य आपदा प्रतिक्रिया बल (एसडीआरएफ), जिला प्रशासन, पुलिस, अग्निशमन एवं आपातकालीन सेवाएं तथा स्थानीय स्वयंसेवक भी इस संयुक्त अभियान में सक्रिय रूप से सहयोग कर रहे हैं।
मुख्यमंत्री की प्रतिक्रिया
मुख्यमंत्री हिमंत बिस्वा सरमा ने एक्स (पूर्व में ट्विटर) पर लिखा, "प्रभावित इलाकों में राहत और निकासी अभियान विभिन्न एजेंसियों के समन्वय से लगातार जारी है। एनडीआरएफ के जवानों की अटूट प्रतिबद्धता और सेवा भावना सराहनीय है।" उन्होंने ताजा अभियान के आंकड़े साझा करते हुए बाढ़ प्रभावित जिलों में चल रहे व्यापक राहत कार्यों की जानकारी भी दी।
आम जनता पर असर
लगातार बारिश और नदियों के बढ़ते जलस्तर के कारण कई निचले इलाके जलमग्न हैं, जिससे परिवहन व्यवस्था बाधित हुई है और कई जिलों में सामान्य जनजीवन अस्त-व्यस्त हो गया है। संयुक्त अभियान का मुख्य उद्देश्य बाढ़ में फंसे लोगों को सुरक्षित निकालना, संवेदनशील परिवारों को राहत शिविरों तक पहुंचाना और मवेशियों की सुरक्षा सुनिश्चित करना है। जिला प्रशासन के माध्यम से प्रभावित लोगों तक राहत सामग्री भी पहुंचाई जा रही है।
प्रशासन की तैयारी
प्रशासन बाढ़ की स्थिति पर लगातार नजर बनाए हुए है। संवेदनशील क्षेत्रों में रहने वाले लोगों से सरकारी दिशा-निर्देशों का पालन करने और बचाव दलों के साथ सहयोग करने की अपील की गई है। आपातकालीन एजेंसियों को किसी भी बिगड़ती स्थिति से निपटने के लिए पूरी तरह सतर्क रखा गया है।
क्या होगा आगे
राज्य सरकार ने स्पष्ट किया है कि सभी संबंधित विभाग आपसी समन्वय के साथ काम कर रहे हैं ताकि बाढ़ के प्रभाव को कम किया जा सके और प्रभावित लोगों को समय पर हरसंभव सहायता मिल सके। गौरतलब है कि असम में हर वर्ष मानसून के दौरान बाढ़ की विनाशकारी स्थिति उत्पन्न होती है और यह राज्य के लिए एक दीर्घकालिक चुनौती बनी हुई है। बचाव अभियान तब तक जारी रहने की उम्मीद है जब तक नदियों का जलस्तर सुरक्षित सीमा से नीचे नहीं आ जाता।