नवसारी बाढ़: NDRF ने 80 से अधिक लोगों को बचाया, कावेरी-पूर्णा नदियाँ उफान पर, राहत अभियान जारी
सारांश
मुख्य बातें
गुजरात के नवसारी जिले में 24 जुलाई को भारी बारिश के बाद बाढ़ जैसे हालात बने हुए हैं, जहाँ राष्ट्रीय आपदा प्रतिक्रिया बल (NDRF) की टीमों ने अब तक 80 से अधिक लोगों को सुरक्षित स्थानों पर पहुँचाया है। बारिश थम जाने के बावजूद शहर के कई इलाकों में जलभराव बना हुआ है और बचाव अभियान निरंतर जारी है।
मुख्य घटनाक्रम
NDRF की 6वीं बटालियन की टीम पहले 22 जुलाई को सूरत में तैनात की गई थी। स्थिति की गंभीरता को देखते हुए 23 जुलाई को टीम को नवसारी भेजा गया, जहाँ जिले के विभिन्न बाढ़-प्रभावित क्षेत्रों में राहत एवं बचाव अभियान शुरू किया गया।
NDRF इंस्पेक्टर राजेंद्र भाटी ने बताया कि 23 जुलाई को 45 लोगों को सुरक्षित निकाला गया — इनमें महिलाएँ, पुरुष, बच्चे और गर्भवती महिलाएँ भी शामिल थीं। 24 जुलाई को जारी अभियान में अब तक करीब 35 और लोगों को सुरक्षित स्थानों पर पहुँचाया जा चुका है।
सबसे अधिक प्रभावित क्षेत्र
भारी वर्षा के कारण कावेरी और पूर्णा नदियाँ उफान पर आ गईं, जिससे जिले में बाढ़ जैसी स्थिति उत्पन्न हुई। सर्वाधिक नुकसान शांतिवन सोसायटी-1 और शांतिवन सोसायटी-2 में हुआ, जहाँ 300 से अधिक घरों में पानी घुस गया। शांतादेवी और आसपास के इलाकों में भी जलभराव से लोगों को भारी परेशानियों का सामना करना पड़ रहा है।
प्रशासन की प्रतिक्रिया
NDRF और स्थानीय प्रशासन की टीमें मिलकर दिन-रात बचाव अभियान चला रही हैं। इंस्पेक्टर भाटी ने कहा कि जरूरतमंद लोगों तक हरसंभव मदद पहुँचाई जा रही है और जब तक पानी पूरी तरह नहीं उतर जाता, अभियान रुकेगा नहीं।
प्रशासन ने प्रभावित क्षेत्रों के निवासियों से अपील की है कि वे अनावश्यक रूप से जलभराव वाले इलाकों में न जाएँ और केवल आधिकारिक निर्देशों का पालन करें।
आम जनता पर असर
घरों और सड़कों पर पानी भर जाने से नवसारी में सामान्य जनजीवन बुरी तरह प्रभावित हुआ है। कई घरों में अब भी पानी भरा हुआ है, जिससे लोगों की दिनचर्या ठप पड़ी है। यह ऐसे समय में आया है जब गुजरात के कई जिलों में मानसून की अत्यधिक बारिश से नदियाँ खतरे के निशान के करीब बह रही हैं।
क्या होगा आगे
अधिकारियों के अनुसार जब तक जलस्तर पूरी तरह नहीं उतरता, राहत एवं बचाव अभियान जारी रहेगा। NDRF की टीम नवसारी में तैनात है और स्थिति पर लगातार नज़र रखी जा रही है। प्रशासन की प्राथमिकता अभी भी जलभराव वाले इलाकों में फँसे लोगों को सुरक्षित निकालना है।