हिमंता बिस्वा सरमा दूसरी बार असम के मुख्यमंत्री, राज्यपाल ने दिलाई शपथ; NDA का लगातार तीसरा कार्यकाल
सारांश
मुख्य बातें
असम के मुख्यमंत्री हिमंता बिस्वा सरमा ने 12 मई 2026 को गुवाहाटी में आयोजित भव्य शपथ ग्रहण समारोह में लगातार दूसरी बार मुख्यमंत्री पद की शपथ ली। राज्यपाल लक्ष्मण प्रसाद आचार्य ने उन्हें पद और गोपनीयता की शपथ दिलाई। इस ऐतिहासिक अवसर के साथ सरमा असम में लगातार दो कार्यकाल तक मुख्यमंत्री बनने वाले पहले गैर-कांग्रेसी नेता बन गए।
शपथ ग्रहण समारोह का विशेष महत्व
गुवाहाटी में आयोजित इस समारोह में राष्ट्रीय नेतृत्व की उपस्थिति ने इसे विशेष बना दिया। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी, केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह, रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह, वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण और भारतीय जनता पार्टी (BJP) के राष्ट्रीय अध्यक्ष नितिन नवीन समेत एनडीए शासित राज्यों के मुख्यमंत्री और उपमुख्यमंत्री शामिल हुए। राज्यपाल ने उन्हें एनडीए विधायक दल का नेता चुने जाने के बाद रविवार को ही मुख्यमंत्री नियुक्त किया था।
असम में NDA का तीसरा कार्यकाल
यह असम में एनडीए सरकार का लगातार तीसरा कार्यकाल है। 2016 में BJP के नेतृत्व में सर्बानंद सोनोवाल ने पहली बार राज्य की कमान संभाली थी। इसके बाद 2021 में हिमंता बिस्वा सरमा ने मुख्यमंत्री पद ग्रहण किया था। अब लगातार तीसरी बार एनडीए सरकार बनने से पूर्वोत्तर में BJP की पकड़ और मजबूत हुई है।
हिमंता सरमा की राजनीतिक यात्रा
हिमंता बिस्वा सरमा का राजनीतिक सफर छात्र राजनीति से शुरू हुआ। 1991-92 में वह कॉटन कॉलेज छात्र संघ के महासचिव रहे और बाद में ऑल असम स्टूडेंट्स यूनियन (AASU) से जुड़े। 1990 के दशक में उन्होंने कांग्रेस में प्रवेश किया और 2001 में जालुकबारी सीट से पहली बार विधायक बने — वह इस सीट से अब तक लगातार जीतते आ रहे हैं।
2015 में उन्होंने कांग्रेस छोड़कर अमित शाह की पहल पर BJP का दामन थामा। उस समय असम में कांग्रेस का वर्चस्व था और BJP के पास केवल पाँच विधायक थे। 2016 में BJP ने उन्हें नॉर्थ ईस्ट डेमोक्रेटिक अलायंस (NEDA) का संयोजक बनाया, जिसके बाद उन्होंने पूर्वोत्तर के क्षेत्रीय दलों को BJP के साथ जोड़ने में निर्णायक भूमिका निभाई। राजनीतिक विश्लेषकों के अनुसार पूर्वोत्तर में BJP के तेज़ी से बढ़ते प्रभाव के पीछे सरमा की रणनीति सबसे बड़ा कारण रही है।
शिक्षा और शैक्षणिक पृष्ठभूमि
सरमा की संपूर्ण शिक्षा गुवाहाटी में हुई। उन्होंने कामरूप अकादमी से स्कूली पढ़ाई की और प्रतिष्ठित कॉटन कॉलेज से राजनीति विज्ञान में बीए और एमए की डिग्री हासिल की। इसके बाद गवर्नमेंट लॉ कॉलेज से एलएलबी पूरी कर कुछ समय तक गुवाहाटी उच्च न्यायालय में वकालत भी की।
2006 में उन्होंने गुवाहाटी विश्वविद्यालय से पीएचडी की उपाधि प्राप्त की। उनका शोध विषय 'नॉर्थ ईस्टर्न काउंसिल: ए स्ट्रक्चरल एंड फंक्शनल एनालिसिस' था, जिसमें पूर्वोत्तर भारत के विकास में परिषद की भूमिका का अध्ययन किया गया था।
आगे की राह
लगातार दूसरे कार्यकाल में सरमा के सामने असम के विकास, बाढ़ प्रबंधन, रोज़गार सृजन और पूर्वोत्तर में शांति बनाए रखने की चुनौतियाँ रहेंगी। राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि इस कार्यकाल में उनकी नीतियाँ 2031 के विधानसभा चुनाव की दिशा भी तय करेंगी।