ऑस्ट्राहिंद-2026: भारत-ऑस्ट्रेलिया का 14 दिवसीय संयुक्त सैन्य अभ्यास, जंगल से समुद्र तक आतंकवाद विरोधी ट्रेनिंग
सारांश
मुख्य बातें
भारत और ऑस्ट्रेलिया की सेनाएँ संयुक्त सैन्य अभ्यास 'ऑस्ट्राहिंद-2026' के तहत जंगल, द्वीपीय क्षेत्रों और समुद्र तटों पर एक साथ युद्धाभ्यास कर रही हैं, जिसमें आतंकवाद विरोधी अभियान, युद्धक तैराकी और ड्रोन संचालन प्रमुख रूप से शामिल हैं। भारतीय सेना ने रविवार, 25 अक्टूबर 2026 को बताया कि यह 14 दिवसीय अभ्यास 19 अक्टूबर से 1 नवंबर 2026 तक चलेगा और दोनों देशों के बीच रक्षा सहयोग को नई ऊँचाई देने की दिशा में एक महत्वपूर्ण पहल है।
अभ्यास में भाग लेने वाले दल
इस संयुक्त अभ्यास में भारतीय सेना की प्रतिष्ठित गढ़वाल राइफल्स रेजिमेंट और ऑस्ट्रेलिया की 13वीं इन्फैंट्री ब्रिगेड के सैनिक भाग ले रहे हैं। दोनों देशों के दस्ते विविध भौगोलिक परिस्थितियों — जंगल, द्वीप और तटीय क्षेत्रों — में संयुक्त अभियान चलाने का प्रशिक्षण ले रहे हैं। यह इसलिए महत्वपूर्ण है क्योंकि वास्तविक परिचालन परिस्थितियाँ अक्सर इन्हीं विविध भूगोलों में उभरती हैं।
मुख्य प्रशिक्षण गतिविधियाँ
अभ्यास में सैनिक युद्धक तैराकी, रस्सी के सहारे तीव्र अवरोहण (रैपेलिंग), घात लगाकर हमला करने और ड्रोन संचालन का अभ्यास कर रहे हैं। इसके अतिरिक्त, आतंकवाद और उग्रवाद से निपटने की रणनीतियाँ और शारीरिक क्षमता बढ़ाने वाले अभ्यास भी इस ट्रेनिंग का अभिन्न हिस्सा हैं। बदलती युद्धक प्रौद्योगिकी के मद्देनज़र ड्रोन संचालन को इस वर्ष विशेष महत्व दिया गया है।
सामरिक उद्देश्य और महत्व
भारतीय सेना के अनुसार, इस अभ्यास का प्रमुख उद्देश्य दोनों सेनाओं के बीच सामरिक तालमेल को मज़बूत करना, एक-दूसरे की कार्यप्रणाली को गहराई से समझना और चुनौतीपूर्ण परिस्थितियों में संयुक्त निर्णय लेने की क्षमता विकसित करना है। गौरतलब है कि भारत और ऑस्ट्रेलिया दोनों क्वाड (QUAD) गठबंधन के सदस्य हैं, और यह अभ्यास दोनों देशों के बीच इंडो-पैसिफिक क्षेत्र में सुरक्षा सहयोग की व्यापक रणनीति का हिस्सा है।
रक्षा संबंधों में बढ़ता सहयोग
'ऑस्ट्राहिंद' श्रृंखला के तहत यह अभ्यास दोनों देशों के बीच लंबे समय से चले आ रहे द्विपक्षीय रक्षा संबंधों को और गहरा करने का काम करता है। यह ऐसे समय में आया है जब इंडो-पैसिफिक क्षेत्र में भू-राजनीतिक तनाव बढ़ रहे हैं और बहुपक्षीय सैन्य समन्वय की ज़रूरत पहले से कहीं अधिक महसूस की जा रही है। अभ्यास के समापन के साथ दोनों सेनाओं के बीच आपसी विश्वास और अभियान संबंधी तत्परता में उल्लेखनीय वृद्धि की उम्मीद जताई जा रही है।
अभ्यास 1 नवंबर 2026 को संपन्न होगा, जिसके बाद दोनों पक्षों द्वारा संयुक्त समीक्षा और भविष्य के सहयोग की रूपरेखा तय की जाएगी।