क्या आयोना ने मौत के बाद भी जिंदगी को नया अर्थ दिया?

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क्या आयोना ने मौत के बाद भी जिंदगी को नया अर्थ दिया?

सारांश

केरल के कन्नूर जिले की 17 वर्षीय छात्रा आयोना की मृत्यु ने कई जिंदगियों को प्रभावित किया। उनके अंगदान से गंभीर रोगियों को नया जीवन मिला। जानिए इस अद्वितीय फैसले के पीछे की कहानी।

Key Takeaways

  • आयोना का अंगदान कई जिंदगियों को नया जीवन दिया।
  • घरेलू उड़ान से अंगों का परिवहन किया गया।
  • परिवार का निर्णय मानवता का एक उत्कृष्ट उदाहरण है।

तिरुवनंतपुरम, 15 जनवरी (राष्ट्र प्रेस)। केरल के कन्नूर जिले के पहाड़ी कस्बे पय्यावूर में कक्षा 12 की 17 वर्षीय छात्रा आयोना मॉनसन की मृत्यु ने पूरे क्षेत्र को शोक में डाल दिया है। लेकिन इस गहरे दुख के बीच, आयोना और उसके परिवार ने एक ऐसा निर्णय लिया, जिसने कई जिंदगियों को नई आशा दी।

आयोना पय्यावूर के एक विद्यालय में पढ़ाई कर रही थी। सोमवार की सुबह, वह कथित तौर पर स्कूल की बिल्डिंग से कूद गई, जिससे वह गंभीर रूप से घायल हो गई। यह घटना उसकी प्रयोगशाला मॉडल परीक्षाओं से कुछ दिन पहले हुई।

घायल अवस्था में उसे कन्नूर के एक निजी अस्पताल में भर्ती कराया गया, जहां वह आईसीयू में वेंटिलेटर सपोर्ट पर थी। कई प्रयासों के बावजूद, बुधवार की रात उसने दम तोड़ दिया। पुलिस मामले की जांच कर रही है।

आयोना को उसके शिक्षक और सहपाठी एक प्रतिभाशाली, स्नेही और मेहनती छात्रा के रूप में जानते थे। वह शिक्षा के साथ-साथ अन्य गतिविधियों में भी सक्रिय रहती थी।

इस कठिन समय में, आयोना के माता-पिता ने एक अद्वितीय और मानवीय निर्णय लिया। उन्होंने अपनी बेटी के अंगदान की सहमति दी। आयोना का हृदय, दोनों किडनी और अन्य महत्वपूर्ण अंग दान किए गए, जिससे कई गंभीर रोगियों को नया जीवन मिल सका।

एक किडनी को घरेलू उड़ान से तिरुवनंतपुरम भेजा गया। यह राज्य में पहली बार था, जब किसी आंतरिक उड़ान का उपयोग अंग परिवहन के लिए किया गया। एयरपोर्ट से तिरुवनंतपुरम मेडिकल कॉलेज अस्पताल तक ग्रीन कॉरिडोर बनाया गया ताकि प्रत्यारोपण समय पर हो सके।

आयोना का हृदय चेन्नई भेजा गया, जहां एक गंभीर मरीज का इलाज चल रहा था। अन्य अंगों को केरल के विभिन्न हिस्सों में जरूरतमंद मरीजों को वितरित किया गया।

आयोना के माता-पिता का कहना है, "वह भले ही हमारे बीच नहीं है, लेकिन उसके माध्यम से दूसरों को जीवन मिल रहा है।"

आयोना का अंतिम संस्कार शुक्रवार को दोपहर 2:30 बजे तिरूर स्थित सेंट फ्रांसिस ऑफ असीसी चर्च के कब्रिस्तान में होगा।

Point of View

मानवता की ज्योति जलती रहती है। आयोना का अंगदान न केवल समाज के लिए एक प्रेरणा है, बल्कि यह उन सभी के लिए एक सीख है जो जीवन के प्रति सकारात्मक दृष्टिकोण रखते हैं।
NationPress
15/01/2026

Frequently Asked Questions

आयोना का अंतिम संस्कार कब होगा?
आयोना का अंतिम संस्कार शुक्रवार को दोपहर 2:30 बजे तिरूर स्थित सेंट फ्रांसिस ऑफ असीसी चर्च के कब्रिस्तान में होगा।
आयोना के अंगों का क्या हुआ?
आयोना के अंगों का दान कई गंभीर रोगियों को नया जीवन देने के लिए किया गया।
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