7 अक्टूबर 2026
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आयुष्मान भारत के 8 साल: ब्रजेश पाठक बोले — गरीबों को मिला स्वास्थ्य सुरक्षा का अभेद्य कवच

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आयुष्मान भारत के 8 साल: ब्रजेश पाठक बोले — गरीबों को मिला स्वास्थ्य सुरक्षा का अभेद्य कवच

सारांश

आयुष्मान भारत के 8 साल पूरे होने पर लखनऊ में 'आयुष्मान संवाद' में उपमुख्यमंत्री ब्रजेश पाठक ने अनियमित अस्पतालों के खिलाफ कड़ी कार्रवाई, डेटा-आधारित निगरानी और डिजिटल हेल्थ मिशन के जरिए योजना को और सुदृढ़ करने का संकल्प लिया। उनका जोर साफ था — गरीब मरीज का हक सर्वोपरि।

मुख्य बातें

आयुष्मान भारत प्रधानमंत्री जन आरोग्य योजना ने 7 अक्टूबर 2026 को 8 वर्ष सफलतापूर्वक पूर्ण किए।
उपमुख्यमंत्री ब्रजेश पाठक ने लखनऊ के इंदिरा गांधी प्रतिष्ठान में 'आयुष्मान संवाद' कार्यक्रम को संबोधित किया।
अनियमितता पर अस्पतालों के विरुद्ध निलंबन, डी-एम्पैनलमेंट, आर्थिक दंड और रिकवरी की कार्रवाई जारी।
डेटा एनालिटिक्स, फील्ड ऑडिट और तकनीक-आधारित निगरानी से पारदर्शिता बढ़ाई जा रही है।
आने वाले समय में आयुष्मान भारत डिजिटल मिशन और गुणवत्तापूर्ण अस्पताल नेटवर्क से योजना को सुदृढ़ करने का संकल्प।
पात्र लाभार्थियों से आह्वान — जिनका आयुष्मान कार्ड नहीं बना, वे शीघ्र बनवाएँ।

उत्तर प्रदेश के उपमुख्यमंत्री ब्रजेश पाठक ने 7 अक्टूबर 2026 को लखनऊ स्थित इंदिरा गांधी प्रतिष्ठान में आयोजित 'आयुष्मान संवाद' कार्यक्रम में कहा कि आयुष्मान भारत प्रधानमंत्री जन आरोग्य योजना करोड़ों गरीब और वंचित परिवारों के लिए स्वास्थ्य सुरक्षा का मजबूत कवच बन चुकी है। यह कार्यक्रम योजना के सफलतापूर्वक आठ वर्ष पूर्ण होने के उपलक्ष्य में आयोजित किया गया था। पाठक ने स्पष्ट किया कि राज्य सरकार का संकल्प है कि कोई भी पात्र परिवार आयुष्मान कार्ड से वंचित न रहे।

योजना का विस्तार और सरकार की प्राथमिकताएँ

उपमुख्यमंत्री पाठक ने कहा कि आयुष्मान भारत योजना प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के 'सबका साथ, सबका विकास, सबका विश्वास, सबका प्रयास' के संकल्प को धरातल पर उतारती है। उन्होंने बताया कि उत्तर प्रदेश सरकार का लक्ष्य प्रत्येक पात्र परिवार तक इस योजना का लाभ पहुँचाना है। इस दिशा में अस्पतालों की गुणवत्ता, फायर सेफ्टी, चिकित्सकों की उपलब्धता तथा डिजिटल हेल्थ रिकॉर्ड जैसी व्यवस्थाओं पर विशेष ध्यान दिया जा रहा है।

यह ऐसे समय में आया है जब देशभर में सरकारी स्वास्थ्य योजनाओं की पहुँच और पारदर्शिता पर सवाल उठ रहे हैं। गौरतलब है कि उत्तर प्रदेश जैसे बड़े राज्य में योजना का प्रभावी क्रियान्वयन राष्ट्रीय स्वास्थ्य नीति के लिए एक महत्वपूर्ण संकेतक माना जाता है।

पारदर्शिता और निगरानी तंत्र

पाठक ने बताया कि योजना को अधिक पारदर्शी और प्रभावी बनाने के लिए डेटा एनालिटिक्स, फील्ड ऑडिट और तकनीक-आधारित निगरानी प्रणाली को मजबूत किया गया है। संदिग्ध क्लेम और अनियमितताओं की पहचान कर नियमों का उल्लंघन करने वाले अस्पतालों के विरुद्ध निलंबन, डी-एम्पैनलमेंट, आर्थिक दंड और रिकवरी जैसी कार्रवाई की जा रही है।

डिप्टी सीएम ने स्पष्ट संदेश दिया कि गरीब और जरूरतमंद मरीज का अधिकार सर्वोपरि है और आयुष्मान योजना में किसी भी प्रकार की अनियमितता के लिए कोई स्थान नहीं है। अच्छा कार्य करने वाले अस्पताल सरकार के सहयोगी हैं, लेकिन कदाचार के मामले में कड़ी कार्रवाई जारी रहेगी।

आगे की राह: डिजिटल मिशन और गुणवत्ता नेटवर्क

उपमुख्यमंत्री ने बताया कि आने वाले समय में आयुष्मान भारत डिजिटल मिशन, गुणवत्तापूर्ण अस्पताल नेटवर्क, बेहतर शिकायत निवारण, मजबूत ऑडिट तथा डेटा-आधारित निगरानी के माध्यम से योजना को और सुदृढ़ किया जाएगा। यह कदम स्वास्थ्य सेवाओं के डिजिटलीकरण की दिशा में एक महत्वपूर्ण प्रयास है।

लाभार्थियों और स्वास्थ्यकर्मियों से अपील

पाठक ने योजना के सफल क्रियान्वयन में महत्वपूर्ण भूमिका निभाने वाले चिकित्सकों, आयुष्मान मित्रों, आशा बहनों, जिला प्रशासन, मुख्य चिकित्सा अधिकारियों तथा सूचीबद्ध सरकारी एवं निजी अस्पतालों का आभार व्यक्त किया। उन्होंने पात्र लाभार्थियों से अपील की कि जिन लोगों का अभी तक आयुष्मान कार्ड नहीं बना है, वे शीघ्र अपना कार्ड बनवाएँ और योजना से संबंधित जानकारी केवल अधिकृत माध्यमों से ही प्राप्त करें।

सरकार का संकल्प है कि आर्थिक अभाव के कारण किसी भी पात्र मरीज का आवश्यक उपचार न रुके — यह प्रतिबद्धता उत्तर प्रदेश में सार्वजनिक स्वास्थ्य व्यवस्था के भविष्य की दिशा तय करेगी।

संपादकीय दृष्टिकोण

लेकिन असली सवाल यह है कि क्या योजना की पहुँच और गुणवत्ता उतनी ही तेजी से बढ़ी है जितनी इसके नामांकन के आँकड़े। उत्तर प्रदेश में डी-एम्पैनलमेंट और आर्थिक दंड की कार्रवाइयाँ यह संकेत देती हैं कि फर्जी क्लेम और अस्पतालों की मनमानी अभी भी एक बड़ी चुनौती है। डिजिटल निगरानी और डेटा एनालिटिक्स की घोषणाएँ सकारात्मक हैं, किंतु इनका लाभ तभी मिलेगा जब जिला स्तर पर पारदर्शी शिकायत निवारण और जवाबदेही तंत्र वास्तव में काम करें — न केवल मंच से दिए गए वादों में।
RashtraPress
7 अक्टूबर 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

आयुष्मान भारत प्रधानमंत्री जन आरोग्य योजना क्या है?
आयुष्मान भारत प्रधानमंत्री जन आरोग्य योजना भारत सरकार की एक प्रमुख स्वास्थ्य बीमा योजना है, जो गरीब और वंचित परिवारों को सरकारी एवं सूचीबद्ध निजी अस्पतालों में निःशुल्क उपचार की सुविधा देती है। यह योजना 2018 में शुरू हुई थी और अक्टूबर 2026 में इसने आठ वर्ष सफलतापूर्वक पूर्ण किए।
'आयुष्मान संवाद' कार्यक्रम कहाँ और क्यों आयोजित हुआ?
यह कार्यक्रम 7 अक्टूबर 2026 को लखनऊ स्थित इंदिरा गांधी प्रतिष्ठान में आयुष्मान भारत के 8 वर्ष पूर्ण होने के उपलक्ष्य में आयोजित किया गया। इसमें उत्तर प्रदेश के उपमुख्यमंत्री ब्रजेश पाठक सहित चिकित्सक, आयुष्मान मित्र, आशा बहनें और जिला प्रशासन के अधिकारी उपस्थित रहे।
उत्तर प्रदेश में अनियमित अस्पतालों पर क्या कार्रवाई हो रही है?
उपमुख्यमंत्री ब्रजेश पाठक के अनुसार, संदिग्ध क्लेम और अनियमितताओं की पहचान कर दोषी अस्पतालों के विरुद्ध निलंबन, डी-एम्पैनलमेंट, आर्थिक दंड और रिकवरी जैसी कार्रवाई की जा रही है। इसके लिए डेटा एनालिटिक्स और फील्ड ऑडिट की प्रणाली को मजबूत किया गया है।
आयुष्मान कार्ड कैसे बनवाएँ और किसे मिलेगा लाभ?
पात्र लाभार्थी अधिकृत केंद्रों या सरकारी पोर्टल के माध्यम से आयुष्मान कार्ड बनवा सकते हैं। उपमुख्यमंत्री पाठक ने अपील की है कि जिन पात्र परिवारों का अभी तक कार्ड नहीं बना है, वे शीघ्र बनवाएँ और योजना की जानकारी केवल अधिकृत माध्यमों से प्राप्त करें।
आगे आयुष्मान भारत योजना में क्या बदलाव होंगे?
आने वाले समय में आयुष्मान भारत डिजिटल मिशन, गुणवत्तापूर्ण अस्पताल नेटवर्क, बेहतर शिकायत निवारण तंत्र और डेटा-आधारित निगरानी के जरिए योजना को और सुदृढ़ किया जाएगा। डिजिटल हेल्थ रिकॉर्ड को भी मजबूत करने पर जोर दिया जाएगा।
राष्ट्र प्रेस
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