23 सितंबर 2026
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UP में 'वन डिस्ट्रिक्ट-वन आयुष मेडिकल कॉलेज' की तैयारी, केशव मौर्य ने लॉन्च किया रजिस्ट्रेशन एप

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UP में 'वन डिस्ट्रिक्ट-वन आयुष मेडिकल कॉलेज' की तैयारी, केशव मौर्य ने लॉन्च किया रजिस्ट्रेशन एप

सारांश

उत्तर प्रदेश सरकार ने आयुष सेवाओं को डिजिटल रूप देने की दिशा में बड़ा कदम उठाया है। उपमुख्यमंत्री केशव प्रसाद मौर्य ने लखनऊ में आयुष रजिस्ट्रेशन एप लॉन्च किया और हर जिले में आयुष मेडिकल कॉलेज की योजना को गति देने का संकल्प दोहराया — पारंपरिक चिकित्सा को आधुनिक तकनीक से जोड़ने की राज्य सरकार की मंशा साफ़ है।

मुख्य बातें

उपमुख्यमंत्री केशव प्रसाद मौर्य ने 23 सितंबर 2026 को लखनऊ में 11वें आयुर्वेद दिवस समारोह में आयुष क्लीनिकल एस्टेब्लिशमेंट रजिस्ट्रेशन सिस्टम एप लॉन्च किया।
उत्तर प्रदेश सरकार 'वन डिस्ट्रिक्ट-वन आयुष मेडिकल कॉलेज' योजना पर तेज़ी से काम कर रही है, जिससे प्रदेश के सभी 75 जिलों में आयुष शिक्षा और सेवाएँ पहुँचेंगी।
नए एप से आयुष क्लीनिकों और संस्थानों का पंजीकरण अधिक पारदर्शी, त्वरित और सुगम होगा।
राष्ट्रीय आयुष मिशन के तहत प्रदेश में आयुष हेल्थ एंड वेलनेस सेंटर और डिजिटल आयुष सेवाओं का विस्तार जारी है।
मौर्य ने 'मेक इन इंडिया' के तहत बनी मशीन से 150 स्वास्थ्य पैरामीटरों की जाँच कराई और योग-आयुर्वेद को भारतीय विरासत बताया।

उत्तर प्रदेश के उपमुख्यमंत्री केशव प्रसाद मौर्य ने 23 सितंबर 2026 को लखनऊ के इंदिरा गांधी प्रतिष्ठान में आयोजित 11वें आयुर्वेद दिवस समारोह में 'आयुष क्लीनिकल एस्टेब्लिशमेंट रजिस्ट्रेशन सिस्टम एप' का शुभारंभ किया। इस अवसर पर उन्होंने घोषणा की कि प्रदेश सरकार 'वन डिस्ट्रिक्ट-वन आयुष मेडिकल कॉलेज' योजना को तेज़ी से अमल में लाने की दिशा में सक्रिय रूप से काम कर रही है, जिससे उत्तर प्रदेश के हर ज़िले में आयुष चिकित्सा शिक्षा और स्वास्थ्य सेवाओं का विस्तार सुनिश्चित किया जा सके।

मुख्य घटनाक्रम

मुख्य अतिथि के रूप में समारोह में पहुँचे केशव प्रसाद मौर्य ने कार्यक्रम से पहले परिसर में लगी आयुष प्रदर्शनी का अवलोकन किया। उन्होंने 'मेक इन इंडिया' के तहत निर्मित अत्याधुनिक स्वास्थ्य जाँच मशीन के ज़रिये अपने स्वास्थ्य से जुड़े 150 पैरामीटरों की जाँच भी कराई। इसके बाद भगवान धन्वंतरि की प्रतिमा पर पुष्पांजलि अर्पित कर और दीप प्रज्वलित कर मुख्य कार्यक्रम का विधिवत उद्घाटन किया।

कार्यक्रम में योगासन, स्लोगन लेखन और चित्रकला प्रतियोगिताओं में उत्कृष्ट प्रदर्शन करने वाले शिक्षकों एवं छात्र-छात्राओं को पुरस्कार और प्रमाण-पत्र प्रदान किए गए। उपमुख्यमंत्री ने प्रतिभागियों से सीधा संवाद कर उनका मार्गदर्शन भी किया।

डिजिटल आयुष: नए एप की भूमिका

नवलॉन्च आयुष क्लीनिकल एस्टेब्लिशमेंट रजिस्ट्रेशन सिस्टम एप के ज़रिये आयुष चिकित्सा संस्थानों और क्लीनिकों का पंजीकरण अब अधिक पारदर्शी, त्वरित और सुगम हो सकेगा। मौर्य ने कहा कि इस पोर्टल और एप से प्रदेशवासियों को गुणवत्तापूर्ण एवं प्रामाणिक आयुष चिकित्सा सेवाएँ उपलब्ध कराने में सहायता मिलेगी।

उन्होंने राष्ट्रीय आयुष मिशन के तहत प्रदेश में आयुष हेल्थ एंड वेलनेस सेंटरों और डिजिटल आयुष सेवाओं के निरंतर विस्तार का उल्लेख करते हुए बताया कि आयुष सेवाओं को व्यापक स्वास्थ्य व्यवस्था से जोड़ा जा रहा है। इस संदर्भ में उन्होंने आयुष्मान भारत-प्रधानमंत्री जन आरोग्य योजना की सफलता का भी हवाला दिया।

वैश्विक पहचान और भारतीय ज्ञान परंपरा

मौर्य ने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में योग और आयुर्वेद को वैश्विक स्तर पर नई एवं प्रामाणिक पहचान मिली है। उनके अनुसार भारतीय चिकित्सा पद्धतियों की समृद्ध परंपरा को आधुनिक तकनीक से जोड़कर आम लोगों तक गुणवत्तापूर्ण स्वास्थ्य सेवाएँ पहुँचाने पर विशेष ज़ोर दिया जा रहा है।

उन्होंने यह भी कहा कि विदेशों में भारतीय डॉक्टरों, इंजीनियरों और उद्यमियों की साख के पीछे देश की अनुशासित जीवनशैली तथा समृद्ध ज्ञान परंपरा का महत्वपूर्ण योगदान है। योग और आयुर्वेद को भारतीय विरासत बताते हुए उन्होंने इसे व्यापक स्तर पर आगे बढ़ाने की ज़रूरत पर बल दिया।

आम जनता पर असर

मौर्य ने संतुलित आहार, योग और नियमित व्यायाम को स्वस्थ जीवन का आधार बताते हुए कहा, 'स्वस्थ शरीर निरोगी काया, इससे बढ़कर ना कोई दूजी माया।' उन्होंने प्रदेशवासियों से स्वस्थ जीवनशैली अपनाने और इसे दैनिक जीवन का अभिन्न हिस्सा बनाने का आह्वान किया।

यह ऐसे समय में आया है जब उत्तर प्रदेश में आयुष बुनियादी ढाँचे के विस्तार को लेकर सरकार सक्रिय है और राज्य में गुणवत्तापूर्ण वैकल्पिक चिकित्सा की माँग तेज़ी से बढ़ रही है। गौरतलब है कि 'वन डिस्ट्रिक्ट-वन आयुष मेडिकल कॉलेज' की परिकल्पना साकार होने पर उत्तर प्रदेश के सभी 75 जिलों में आयुष शिक्षा और स्वास्थ्य सेवाओं की पहुँच सुनिश्चित होगी।

संपादकीय दृष्टिकोण

लेकिन उत्तर प्रदेश के 75 जिलों में संस्थान खोलने के लिए ज़रूरी बुनियादी ढाँचे, संकाय और वित्त-पोषण की कोई ठोस समयसीमा अभी सार्वजनिक नहीं की गई है। डिजिटल रजिस्ट्रेशन एप पारदर्शिता की दिशा में सही कदम है, पर असली परीक्षा यह है कि क्या अनौपचारिक आयुष क्लीनिक वास्तव में इसमें पंजीकृत होंगे — अन्य राज्यों के अनुभव बताते हैं कि अनुपालन दर शुरुआत में कम रहती है। आयुर्वेद को मुख्यधारा की स्वास्थ्य सेवा से जोड़ने की बात सालों से होती आई है; जब तक प्रशिक्षित जनशक्ति और निगरानी तंत्र नहीं बनता, यह कदम नीतिगत संकल्प से अधिक कुछ नहीं बन पाएगा।
RashtraPress
23 सितंबर 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

'वन डिस्ट्रिक्ट-वन आयुष मेडिकल कॉलेज' योजना क्या है?
यह उत्तर प्रदेश सरकार की एक योजना है जिसके तहत प्रदेश के हर जिले में एक आयुष मेडिकल कॉलेज स्थापित किया जाएगा, ताकि आयुर्वेद, योग, यूनानी, सिद्ध और होम्योपैथी की शिक्षा और स्वास्थ्य सेवाएँ स्थानीय स्तर पर सुलभ हों। उपमुख्यमंत्री केशव प्रसाद मौर्य ने 23 सितंबर 2026 को इस दिशा में तेज़ गति से काम करने की जानकारी दी।
आयुष क्लीनिकल एस्टेब्लिशमेंट रजिस्ट्रेशन सिस्टम एप क्या है?
यह एक नया डिजिटल एप है जिसे 23 सितंबर 2026 को लखनऊ में 11वें आयुर्वेद दिवस पर लॉन्च किया गया। इस एप के ज़रिये उत्तर प्रदेश के आयुष क्लीनिकों और चिकित्सा संस्थानों का पंजीकरण पारदर्शी, त्वरित और सुगम तरीके से किया जा सकेगा, जिससे प्रामाणिक आयुष सेवाओं की पहुँच बढ़ेगी।
राष्ट्रीय आयुष मिशन के तहत उत्तर प्रदेश में क्या काम हो रहा है?
राष्ट्रीय आयुष मिशन के तहत प्रदेश में आयुष हेल्थ एंड वेलनेस सेंटरों का विस्तार किया जा रहा है और डिजिटल आयुष सेवाओं को मज़बूत बनाया जा रहा है। सरकार का लक्ष्य आयुष सेवाओं को आयुष्मान भारत-प्रधानमंत्री जन आरोग्य योजना जैसी व्यापक स्वास्थ्य व्यवस्था से जोड़ना है।
11वाँ आयुर्वेद दिवस समारोह कहाँ और कब हुआ?
11वाँ आयुर्वेद दिवस समारोह 23 सितंबर 2026 को लखनऊ के इंदिरा गांधी प्रतिष्ठान में आयोजित हुआ। इसमें उपमुख्यमंत्री केशव प्रसाद मौर्य मुख्य अतिथि थे और योगासन, स्लोगन लेखन तथा चित्रकला प्रतियोगिताओं के विजेताओं को पुरस्कार भी वितरित किए गए।
आयुष सेवाओं के डिजिटलीकरण से आम लोगों को क्या फ़ायदा होगा?
डिजिटल पंजीकरण एप के ज़रिये केवल पंजीकृत और प्रामाणिक आयुष संस्थान ही सेवाएँ दे सकेंगे, जिससे मरीज़ों को नकली या अप्रशिक्षित प्रदाताओं से बचाया जा सकेगा। साथ ही, हर जिले में आयुष कॉलेज बनने से दूरदराज़ के इलाकों में भी गुणवत्तापूर्ण पारंपरिक चिकित्सा सुलभ होगी।
राष्ट्र प्रेस
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