बहराइच में ओवैसी का सपा-कांग्रेस पर प्रहार: 'मुस्लिमों की राजनीतिक हिस्सेदारी नहीं चाहते ये दल'
सारांश
मुख्य बातें
ऑल इंडिया मजलिस-ए-इत्तेहादुल मुस्लिमीन (AIMIM) के प्रमुख असदुद्दीन ओवैसी ने 4 अक्टूबर 2026 को उत्तर प्रदेश के बहराइच में आयोजित एक जनसभा में समाजवादी पार्टी (सपा) और भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस (INC) पर तीखे आरोप लगाए। ओवैसी ने कहा कि ये दल कभी नहीं चाहते कि मुस्लिम समाज की अपनी कोई स्वतंत्र राजनीतिक ताकत बने। उन्होंने कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खड़गे के चुनावों को लेकर दिए गए बयान पर भी तंज कसा।
सपा पर लगाए गंभीर आरोप
ओवैसी ने समाजवादी पार्टी पर निशाना साधते हुए आरोप लगाया कि 2014 के बाद हुए चुनावों में सपा लगातार हार का सामना करती रही है, फिर भी मुस्लिम समाज को वोट-बैंक से अधिक कुछ नहीं माना गया। उन्होंने कहा, 'सपा के लोग बस यह चाहते हैं कि अब्दुल सिर्फ दरी बिछाए, भैया के आगे-पीछे दौड़ता रहे और वोट देकर फिर सो जाए। हमारी मस्जिदें टूटती रहें, झूठे इल्जाम लगाकर एनकाउंटर कर दिया जाए या फिर जेल में डाल दिया जाए।'
ओवैसी का आरोप है कि ये दल कभी नहीं चाहते कि मुस्लिम समाज अपने मान-सम्मान और राजनीतिक हिस्सेदारी की बात करे। उन्होंने इसे मुस्लिम मतदाताओं के साथ दशकों पुराने राजनीतिक छल की संज्ञा दी।
भाजपा की 'बी टीम' के आरोपों पर पलटवार
AIMIM को भारतीय जनता पार्टी (BJP) की सहयोगी पार्टी बताए जाने के आरोपों पर ओवैसी ने कड़ा पलटवार किया। उन्होंने कहा कि ऐसे बयान देने वाले अहंकार में डूबे हुए हैं और इन बयानों से मुस्लिम समाज के प्रति उनकी वास्तविक सोच उजागर होती है। ओवैसी ने व्यंग्यात्मक लहजे में कहा, 'खुशखबरी यह है कि अब हम भाजपा की 'बी टीम' नहीं रहे, क्योंकि हार का ठीकरा ये लोग मुझ पर ही फोड़ते आ रहे हैं। अब ये यह भी कह दें कि उनकी हार के पीछे हमारी पार्टी वजह नहीं रही है।'
खड़गे के बयान पर तंज
कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खड़गे के लोकसभा और राज्य विधानसभाओं को भंग कर बैलेट पेपर से नए चुनाव कराने संबंधी बयान पर ओवैसी ने सवाल उठाए। उन्होंने कहा कि यदि चुनावी प्रक्रिया को ही अवैध बताया जा रहा है, तो कर्नाटक, तेलंगाना और केरल में कांग्रेस की अपनी सरकारों की वैधता पर क्या रुख है। यह ओवैसी का कांग्रेस के विरोधाभासी रवैये पर सीधा प्रश्न था।
मतदाता सूची पुनरीक्षण पर विरोध
ओवैसी ने मतदाता सूची के विशेष गहन पुनरीक्षण (SIR) का मुद्दा भी उठाया। उन्होंने कहा कि वह पहले भी SIR के विरोध में थे और अब भी हैं। उन्होंने बताया कि बिहार में SIR को लेकर वे सर्वोच्च न्यायालय तक गए थे और शीर्ष अदालत ने इस मामले में अपना निर्णय दिया था। ओवैसी ने दावा किया कि आम जनता SIR की प्रक्रिया से परेशान है।
आगे क्या
ओवैसी का बहराइच दौरा ऐसे समय में हुआ है जब उत्तर प्रदेश में आगामी राजनीतिक गतिविधियों की पृष्ठभूमि तैयार हो रही है। AIMIM की यह आक्रामक रणनीति — सपा और कांग्रेस दोनों पर एक साथ प्रहार — संकेत देती है कि पार्टी यूपी में अपनी जमीन मजबूत करने की कोशिश में है। राजनीतिक विश्लेषकों का कहना है कि इस तरह के बयान मुस्लिम मतदाताओं में वैकल्पिक राजनीतिक नेतृत्व की माँग को भुनाने का प्रयास हैं।