दतिया, बांकीपुर और मंजलपुर उपचुनाव मतगणना 3 अगस्त: BJP-कांग्रेस में कड़ी टक्कर
सारांश
मुख्य बातें
मध्य प्रदेश के दतिया, बिहार के बांकीपुर और गुजरात के मंजलपुर विधानसभा क्षेत्रों में 30 जुलाई को संपन्न हुए उपचुनावों की मतगणना सोमवार, 3 अगस्त की सुबह कड़ी सुरक्षा व्यवस्था के बीच आरंभ हो गई। तीनों सीटों के अंतिम परिणाम आज देर तक घोषित होने की उम्मीद है, और राजनीतिक दल हर रुझान पर पैनी नज़र बनाए हुए हैं।
मुख्य घटनाक्रम
तीनों निर्वाचन क्षेत्रों में 30 जुलाई को मतदान हुआ था। दतिया में 71.44 प्रतिशत मतदान दर्ज किया गया, जो तीनों सीटों में सर्वाधिक रहा। वहीं मंजलपुर में मतदान प्रतिशत अपेक्षाकृत कम — 37.5 प्रतिशत — रहा। बांकीपुर में 25 उम्मीदवारों के भाग्य का फैसला पटना के काला भवन में हो रहा है, जहाँ इलेक्ट्रॉनिक वोटिंग मशीनों (EVM) को मतगणना से पूर्व तीन स्तरीय सुरक्षा घेरे में रखा गया था।
दतिया: BJP के नए प्रदेश अध्यक्ष की पहली परीक्षा
मध्य प्रदेश के दतिया उपचुनाव में मुख्य मुकाबला भारतीय जनता पार्टी (BJP) के उम्मीदवार आशुतोष तिवारी और भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस (कांग्रेस) के उम्मीदवार घनश्याम सिंह के बीच है। दोनों दल अपनी जीत को लेकर आश्वस्त बताए जा रहे हैं। यह उपचुनाव BJP के नवनियुक्त प्रदेश अध्यक्ष हेमंत खंडेलवाल के लिए पहली चुनावी कसौटी भी है — इसलिए इसका परिणाम प्रदेश में सत्तारूढ़ दल के संगठनात्मक नेतृत्व के लिए राजनीतिक रूप से विशेष महत्व रखता है।
मंजलपुर: रिक्त सीट, कम मतदान, तीखा मुकाबला
गुजरात के मंजलपुर में यह उपचुनाव BJP विधायक और पूर्व मंत्री योगेश पटेल के निधन के कारण आवश्यक हुआ। यहाँ मुख्य प्रतिस्पर्धा BJP उम्मीदवार सतीश गोविंदभाई पटेल और कांग्रेस नेता भीखाभाई रबारी के बीच है। 37.5 प्रतिशत का अपेक्षाकृत कम मतदान इस सीट पर परिणाम को अनिश्चित बनाता है।
राजनीतिक महत्व
यह ऐसे समय में आया है जब तीनों राज्यों में BJP और कांग्रेस अपनी-अपनी ज़मीनी पकड़ को मज़बूत करने में जुटी हैं। गौरतलब है कि उपचुनाव अक्सर सत्तारूढ़ दल की लोकप्रियता का तात्कालिक पैमाना माने जाते हैं। तीनों सीटों पर परिणाम आने वाले महीनों में इन राज्यों की राजनीतिक दिशा का संकेत दे सकते हैं।
क्या होगा आगे
चुनाव अधिकारी मतगणना प्रक्रिया की निगरानी कर रहे हैं और अंतिम परिणाम 3 अगस्त की शाम तक स्पष्ट होने की संभावना है। राजनीतिक दलों के प्रतिनिधि मतगणना केंद्रों पर मौजूद हैं और हर दौर के रुझानों पर बारीकी से नज़र रख रहे हैं।