बांकीपुर उपचुनाव: भाजपा को नीरज कुमार सिन्हा की जीत का भरोसा, मतगणना के बीच बन रहे 200 क्विंटल लड्डू
सारांश
मुख्य बातें
पटना में 3 अगस्त को बांकीपुर विधानसभा सीट के उपचुनाव की मतगणना सुबह 8 बजे से एएन कॉलेज में शुरू हो गई। नतीजे आने से पहले ही भारतीय जनता पार्टी (BJP) के कार्यकर्ता अपने प्रत्याशी नीरज कुमार सिन्हा की जीत को लेकर पूरी तरह आश्वस्त हैं और जश्न की तैयारी में 200 क्विंटल लड्डू बनवाए जा रहे हैं।
मतगणना की प्रक्रिया
मतगणना की शुरुआत डाक मतपत्रों की गिनती से हुई। इसके बाद सुबह 8.30 बजे से ईवीएम की गिनती का सिलसिला शुरू हुआ। पटना के एएन कॉलेज में स्थापित मतगणना केंद्र पर सुरक्षा के कड़े इंतज़ाम किए गए हैं।
भाजपा की जश्न की तैयारी
भाजपा की प्रदेश कार्य समिति सदस्य कृष्ण कुमार कल्लू ने कहा, 'बांकीपुर में भाजपा-एनडीए के प्रत्याशी नीरज कुमार सिन्हा की भव्य जीत हो रही है। इसलिए जश्न की भी भव्य तैयारी चल रही है। हम 200 क्विंटल लड्डू बना रहे हैं। सभी जनमानस के बीच में लड्डू बांटे जाएंगे। सुबह 11 बजे से समर्थकों को लड्डू बांटे जाएंगे।'
उन्होंने यह भी कहा कि निश्चित तौर पर भाजपा की जीत सुनिश्चित है और पार्टी ने पहले से ही नीरज कुमार सिन्हा को बांकीपुर से जिताने का संकल्प लिया था।
कार्यकर्ताओं का आत्मविश्वास
भाजपा कार्यकर्ता सत्यप्रकाश ने कहा कि बांकीपुर में पार्टी प्रत्याशी की भारी मतों से जीत होगी। उन्होंने कहा, 'बांकीपुर में फिर से जो कमल खिल रहा है, इसकी खुशी के लिए हम लड्डू बना रहे हैं। नतीजों के बाद जनता में खुशी की लहर दौड़ेगी।' सत्यप्रकाश ने यह भी जोड़ा कि जब बिहार में भाजपा के विधायकों की संख्या कम रही, तब भी बांकीपुर सीट पार्टी के पाले में रही — और इस उपचुनाव में पार्टी उसी परंपरा को दोहराने जा रही है।
मुख्य प्रत्याशी
इस उपचुनाव में भाजपा ने नीरज कुमार सिन्हा को मैदान में उतारा है। जन सुराज पार्टी के संस्थापक प्रशांत किशोर भी इस मुकाबले में शामिल हैं। वहीं, राष्ट्रीय जनता दल (RJD) की ओर से रेखा गुप्ता चुनाव लड़ रही हैं। यह ऐसे समय में आया है जब बिहार में राजनीतिक समीकरण लगातार बदल रहे हैं और जन सुराज पार्टी की उपस्थिति ने मुकाबले को त्रिकोणीय बना दिया है।
आगे क्या
मतगणना जारी है और अंतिम नतीजे दिन में आने की उम्मीद है। भाजपा कार्यकर्ताओं के अनुसार, सुबह 11 बजे से ही समर्थकों के बीच लड्डू वितरण शुरू होने की योजना है। यह उपचुनाव बिहार की राजनीति में नए दलों की स्वीकार्यता और पारंपरिक सीटों पर पकड़ की परीक्षा भी है।