बांसुरी स्वराज का केजरीवाल पर बड़ा हमला: 'आप' में 'वैचारिक दिवालियापन', दोहरे मानदंडों का पर्दाफाश
सारांश
Key Takeaways
- भाजपा सांसद बांसुरी स्वराज ने 25 अप्रैल को अरविंद केजरीवाल और आम आदमी पार्टी पर 'दोहरे मापदंड' और 'वैचारिक दिवालियापन' का आरोप लगाया।
- आप के 7 राज्यसभा सांसदों के भाजपा में शामिल होने के बाद यह प्रेस कॉन्फ्रेंस की गई।
- स्वराज ने शीश महल विवाद को दोहराते हुए कहा कि कोविड-19 के दौरान जनता के पैसों से यह बनवाया गया।
- केजरीवाल पर पंजाब में सरकारी हेलीकॉप्टर और बंगले के दुरुपयोग का आरोप लगाया गया।
- स्वराज ने कहा कि केजरीवाल ने दिल्ली की जनता से सरकारी गाड़ी और सरकारी आवास न लेने का वादा किया था, जो उन्होंने तोड़ा।
- 'आप' नेतृत्व से आत्म-मंथन की मांग की गई; 2027 पंजाब चुनाव से पहले यह संकट पार्टी के अस्तित्व पर सवाल खड़ा करता है।
नई दिल्ली, 25 अप्रैल: भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) की सांसद बांसुरी स्वराज ने शनिवार को आम आदमी पार्टी (आप) और उसके राष्ट्रीय संयोजक अरविंद केजरीवाल पर जोरदार प्रहार करते हुए कहा कि 'आप' में अब खुलकर 'वैचारिक दिवालियापन' दिखने लगा है। उन्होंने आरोप लगाया कि केजरीवाल आम जनता से सादगी का वादा करते हैं, लेकिन खुद आलीशान जीवनशैली अपनाकर 'दोहरे मापदंड' की राजनीति करते हैं।
सात सांसदों के इस्तीफे के बाद भाजपा का पलटवार
आम आदमी पार्टी के सात राज्यसभा सांसदों के भाजपा में शामिल होने के तुरंत बाद बांसुरी स्वराज ने पत्रकारों को संबोधित किया। उन्होंने कहा कि जिस पार्टी ने खुद को एक नए राजनीतिक विकल्प के रूप में पेश किया था, वह वास्तव में 'नई बोतल में पुरानी शराब' साबित हुई।
स्वराज ने कहा, "वे अन्ना हजारे आंदोलन की कोख से जन्मे थे, लेकिन सत्ता मिलते ही उन्होंने अन्ना हजारे को भी धोखा देने में संकोच नहीं किया।" उन्होंने पार्टी छोड़ने वाले सात सांसदों की तारीफ करते हुए कहा कि इन नेताओं ने 'आप' की महिला-विरोधी राजनीति, झूठ और दोहरे मापदंडों को अस्वीकार किया।
शीश महल और सरकारी सुविधाओं के दुरुपयोग के आरोप
भाजपा सांसद ने केजरीवाल पर 'शीश महल' विवाद को लेकर फिर से निशाना साधा। उन्होंने कहा, "कोविड-19 महामारी के सबसे कठिन दौर में, जब दिल्ली की जनता को अपने मुख्यमंत्री की सर्वाधिक जरूरत थी, तब वे जनता के करोड़ों रुपयों से अपना 'शीश महल' बनवाने में लगे थे।"
स्वराज ने यह भी कहा कि दिल्ली विधानसभा चुनाव में हार के बाद केजरीवाल पंजाब गए और वहाँ सरकारी हेलीकॉप्टर व विमान जैसी सुविधाओं का उपयोग व्यक्तिगत यात्राओं और कभी-कभी चुनावी प्रचार के लिए किया, जो पंजाब के करदाताओं के धन का सीधा दुरुपयोग है।
उन्होंने आगे कहा, "विधायक या मुख्यमंत्री का पद न होने के बावजूद, केजरीवाल अपने एक पूर्व राज्यसभा सांसद के सरकारी आवास में ठहरे।" स्वराज ने याद दिलाया कि केजरीवाल ने दिल्ली की जनता से वादा किया था कि वे कभी सरकारी गाड़ी नहीं लेंगे और न ही सरकारी बंगले में रहेंगे — लेकिन उन्होंने दोनों वादे तोड़े।
मफलर और 'नकाब' पर तीखा तंज
केजरीवाल के प्रसिद्ध मफलर को लेकर बांसुरी स्वराज ने व्यंग्यात्मक टिप्पणी की। उन्होंने कहा, "चुनाव से ठीक पहले ही उन्हें खाँसी आने लगती है।" उन्होंने आरोप लगाया कि केजरीवाल आम आदमी जैसे कपड़े पहनते हैं, लेकिन यह पहनावा जनता को भ्रमित करने का एक सुनियोजित तरीका है।
स्वराज ने स्पष्ट किया, "मुद्दा आलीशान जीवन जीने का नहीं है — मुद्दा उस दोहरेपन का है जो वे जनता के सामने दिखाते हैं और पर्दे के पीछे जीते हैं।"
गहरा संदर्भ: 'आप' का पतन और राजनीतिक विरोधाभास
गौरतलब है कि 2011 के अन्ना हजारे आंदोलन की नींव पर खड़ी आम आदमी पार्टी ने 2013 में दिल्ली में सत्ता का पहला स्वाद चखा था। तब केजरीवाल ने सादगी, पारदर्शिता और भ्रष्टाचार-मुक्त शासन का वादा किया था। लेकिन 2024-25 के दौरान शराब नीति घोटाला, शीश महल विवाद और अब संस्थापक सदस्यों का पार्टी छोड़ना — ये सब मिलकर उस छवि को तार-तार कर रहे हैं।
यह वही पार्टी है जिसके नेताओं ने कभी सरकारी सुविधाएं लेने से इनकार किया था और ऑटो-रिक्शा में दफ्तर जाने का नाटक किया था। आज उन्हीं नेताओं पर सरकारी हेलीकॉप्टर और बंगलों के दुरुपयोग के आरोप हैं — यह विरोधाभास 'आप' की राजनीतिक विश्वसनीयता पर सबसे बड़ा प्रश्नचिह्न है।
बांसुरी स्वराज ने 'आप' नेतृत्व से आग्रह किया कि वे इन सामूहिक इस्तीफों पर 'आत्म-मंथन' करें और जनता के सामने अपनी वास्तविकता रखें।
आने वाले दिनों में 'आप' के भीतर और टूट होती है या पार्टी इस संकट से उबरती है — यह देखना राजनीतिक दृष्टि से अत्यंत महत्वपूर्ण होगा। पंजाब में 2027 के विधानसभा चुनाव को देखते हुए यह घटनाक्रम 'आप' के लिए अस्तित्व की लड़ाई बन सकता है।