11 जुलाई 2026
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बारामती उपचुनाव: संजय राउत ने पार्थ पवार पर हमले किए, भाजपा पर धमकाने का आरोप

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बारामती उपचुनाव: संजय राउत ने पार्थ पवार पर हमले किए, भाजपा पर धमकाने का आरोप

सारांश

बारामती उपचुनाव ने राजनीतिक गर्माहट को बढ़ा दिया है, जहां संजय राउत ने पार्थ पवार की आलोचना की और भाजपा पर धमकाने का आरोप लगाया। यह चुनावी हलचल महाराष्ट्र की राजनीतिक स्थिति को प्रभावित कर रही है।

मुख्य बातें

बारामती उपचुनाव का राजनीतिक महत्व बढ़ गया है।
संजय राउत ने पार्थ पवार पर तीखी टिप्पणियाँ की हैं।
कांग्रेस ने अपने उम्मीदवार को उतारने का निर्णय लिया है।
महाविकास अघाड़ी का रुख साफ नहीं है।
बारामती के मतदाता समझदार और निर्णय लेने में सतर्क हैं।

मुंबई, 7 अप्रैल (राष्ट्र प्रेस)। बारामती उपचुनाव के लिए सुनिता पवार द्वारा नामांकन पत्र प्रस्तुत करने के बाद महाराष्ट्र का राजनीतिक माहौल और भी गरमाया हुआ है। कांग्रेस के उनके खिलाफ उम्मीदवार खड़ा करने के निर्णय ने राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी (एनसीपी) और उसके सहयोगियों के बीच तीखी बहस को जन्म दिया है।

एनसीपी के सांसद पार्थ पवार ने कहा था कि कांग्रेस का चुनाव में उतरना महाराष्ट्र में उसके पतन की शुरुआत है। इस पर संजय राउत ने प्रेस कॉन्फ्रेंस में जवाब दिया और शरद पवार के दृष्टिकोण का समर्थन किया। उन्होंने कहा, "मैं शरद पवार से सहमत हूं। कांग्रेस एक राष्ट्रीय पार्टी है और उसे चुनाव लड़ने का पूरा अधिकार है।"

उन्होंने पार्थ पवार की आलोचना पर सवाल उठाते हुए हाल की घटनाओं का संदर्भ दिया। उन्होंने पूछा, "जब अजित पवार ने लक्ष्मण जगताप के निधन के बाद पिंपरी-चिंचवड़ उपचुनाव कांग्रेस की मदद से लड़ा था, तो अब कांग्रेस चुनाव क्यों नहीं लड़ सकती?"

शरद पवार पहले ही पार्थ के बयान को खारिज कर चुके हैं, यह कहते हुए कि बड़े राजनीतिक निर्णयों पर राय देने के लिए परिपक्वता आवश्यक होती है।

यह विवाद बारामती से आगे बढ़कर राहुरी सीट तक पहुँच गया, जहाँ पूर्व एनसीपी (एसपी) मंत्री प्राजक्त तनपुरे ने अपनी उम्मीदवारी वापस ले ली। कुछ लोगों का कहना है कि उन्हें मनाया गया, जबकि राउत ने गंभीर आरोप लगाए। उन्होंने कहा, "आज की राजनीति में कोई मनाता नहीं, बल्कि धमकाता है।"

उन्होंने भाजपा नेताओं राधाकृष्ण विखे पाटिल और रवींद्र चव्हाण की भूमिका पर सवाल उठाते हुए पूछा कि क्या वे कोई महान क्रांतिकारी या स्वतंत्रता सेनानी हैं? जो लोग डर जाते हैं, वे पीछे हट जाते हैं, लेकिन जो राजनीति में टिकना चाहते हैं, उन्हें लड़ाई लड़नी होती है। यदि लड़ाई नहीं करनी है, तो भाजपा के गुलाम बनकर रहो। राउत ने कहा कि उनकी पार्टी भाजपा की तानाशाही से नहीं डरती। उन्होंने कहा, "यह लोकतंत्र है, ‘ट्रंपशाही’ नहीं।"

महाविकास अघाड़ी (एमवीए) की स्थिति पर चर्चा करते हुए राउत ने कहा कि पवार परिवार के प्रति व्यक्तिगत सम्मान हो सकता है, लेकिन एमवीए के किसी भी दल ने आधिकारिक रूप से सुनिता पवार की उम्मीदवारी का समर्थन नहीं किया है।

संजय राउत ने यह भी दावा किया कि कांग्रेस ने अपने उम्मीदवार आकाश मोरे को लेकर एक शर्त रखी है। उन्होंने कहा, "कांग्रेस ने कहा है कि वे अपना उम्मीदवार तभी वापस लेंगे, जब अजित पवार से जुड़े संदिग्ध दुर्घटना मामले में महाराष्ट्र में एफआईआर दर्ज होगी।"

हालांकि, एनसीपी (एसपी) प्रमुख शरद पवार ने पारिवारिक कारणों से उम्मीदवार नहीं उतारा है, वहीं शिवसेना (यूबीटी) का रुख अभी स्पष्ट नहीं है। राउत ने संकेत दिया कि उद्धव ठाकरे जल्द ही पार्टी की आधिकारिक स्थिति स्पष्ट करेंगे।

उन्होंने अंत में कहा, "बारामती का चुनाव शायद ज्यादा शोर-शराबे के बिना होगा। यहाँ के मतदाता समझदार हैं और वे अपने फैसले को शांति से मतदान के जरिए व्यक्त करेंगे।"

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

बारामती उपचुनाव में कौन-कौन से नेता शामिल हैं?
इस उपचुनाव में प्रमुख नेता संजय राउत, पार्थ पवार और सुनिता पवार शामिल हैं।
संजय राउत का क्या कहना है?
संजय राउत ने पार्थ पवार पर हमले किए हैं और भाजपा पर धमकाने का आरोप लगाया है।
कांग्रेस की भूमिका क्या है?
कांग्रेस ने सुनिता पवार के खिलाफ उम्मीदवार उतारने का फैसला किया है।
महाविकास अघाड़ी की स्थिति क्या है?
महाविकास अघाड़ी ने आधिकारिक रूप से सुनिता पवार की उम्मीदवारी का समर्थन नहीं किया है।
बारामती उपचुनाव में मतदाता क्या सोचते हैं?
बारामती के मतदाता समझदार हैं और वे अपने फैसले को मतदान के माध्यम से व्यक्त करेंगे।
राष्ट्र प्रेस
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